11 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

गुरिंदरवीर के राष्ट्रीय रिकॉर्ड पर श्रेय-विवाद: विजेंदर सिंह ने पंजाब सरकार को घेरा

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
गुरिंदरवीर के राष्ट्रीय रिकॉर्ड पर श्रेय-विवाद: विजेंदर सिंह ने पंजाब सरकार को घेरा

सारांश

गुरिंदरवीर ने रांची में 10.09 सेकंड से 100 मीटर का राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ा, तो पंजाब सरकार बधाई देने दौड़ी। विजेंदर सिंह का सवाल तीखा है — जब संघर्ष था, तब सरकार कहाँ थी?

मुख्य बातें

गुरिंदरवीर सिंह ने 24 मई 2026 को रांची में 10.09 सेकंड से 100 मीटर दौड़कर नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया।
उन्होंने उसी दिन सेमीफाइनल में 10.17 सेकंड से अनिमेष कुजूर के 10.18 सेकंड के पुराने रिकॉर्ड को भी तोड़ा — यानी दो दिन में दो राष्ट्रीय रिकॉर्ड ।
गुरिंदरवीर 100 मीटर में 10.10 सेकंड से कम समय में दौड़ पूरी करने वाले पहले भारतीय एथलीट बने।
ओलंपिक पदक विजेता विजेंदर सिंह ने एक्स पर पंजाब सरकार पर निशाना साधा — आरोप लगाया कि सरकारी नौकरी देने के बाद भी प्रशिक्षण के लिए सही माहौल नहीं दिया गया।
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने 24 मई को एक्स पर बधाई पोस्ट की, जिस पर विजेंदर ने श्रेय-विवाद को लेकर सवाल उठाए।

ओलंपिक पदक विजेता मुक्केबाज़ विजेंदर सिंह ने धावक गुरिंदरवीर सिंह की ऐतिहासिक सफलता का श्रेय लेने पर पंजाब सरकार की कड़ी आलोचना की है। विजेंदर का कहना है कि सरकार ने जब एथलीट को सबसे ज़्यादा ज़रूरत थी — संघर्ष के दौरान — तब उसे नज़रअंदाज़ किया, और अब रिकॉर्ड टूटने के बाद बधाइयों की होड़ मच गई है।

गुरिंदरवीर की ऐतिहासिक उपलब्धि

25 वर्षीय गुरिंदरवीर सिंह ने शनिवार, 24 मई 2026 को रांची में आयोजित नेशनल सीनियर एथलेटिक्स फेडरेशन कॉम्पिटिशन 2026 में इतिहास रच दिया। रिलायंस का प्रतिनिधित्व करते हुए पंजाब के इस धावक ने पुरुषों की 100 मीटर स्पर्धा में 10.09 सेकंड का समय निकालकर स्वर्ण पदक जीता और राष्ट्रीय रिकॉर्ड अपने नाम किया।

उल्लेखनीय है कि गुरिंदरवीर ने उसी दिन ओपनिंग सेमीफाइनल हीट में 10.17 सेकंड का समय निकालकर अनिमेष कुजूर के 10.18 सेकंड के पिछले राष्ट्रीय रिकॉर्ड को पहले ही ध्वस्त कर दिया था। इस तरह उन्होंने दो दिन में दो राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़े और 100 मीटर में 10.10 सेकंड से कम समय में दौड़ पूरी करने वाले पहले भारतीय एथलीट बन गए।

विजेंदर सिंह का तीखा प्रहार

विजेंदर सिंह ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए लिखा, "पंजाब सरकार अब गुरिंदरवीर सिंह का श्रेय लेने के लिए आगे आई है, लेकिन अगर आप उनका इंटरव्यू सुनें, तो वह साफ कहते हैं कि उन्हें न तो राष्ट्रीय स्तर का स्टेडियम मिला और न ही सरकार से सही समर्थन मिला।"

विजेंदर ने आगे लिखा, "उन्होंने उन्हें सरकारी नौकरी दी, लेकिन फिर अभ्यास और तैयारी के लिए सही माहौल दिए बिना ड्यूटी पर भेज दिया। गुरिंदरवीर ने जैसे ही राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ा, हर कोई श्रेय लेने के लिए दौड़ पड़ा। एथलीट को जीतने के बाद सपोर्ट की जरूरत नहीं होती — उन्हें अपने संघर्ष के दौरान सपोर्ट की जरूरत होती है।"

पंजाब के मुख्यमंत्री की बधाई पर सवाल

गुरिंदरवीर का नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनते ही पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने 24 मई को एक्स पर पोस्ट कर बधाई दी। उन्होंने लिखा, "रांची में फेडरेशन कप में 100 मीटर फ्रीस्टाइल रेस में गोल्ड मेडल जीतने के लिए हमारे होनहार एथलीट गुरिंदरवीर सिंह को दिल से बधाई। हमारे बहादुर बेटे ने सिर्फ 10.09 सेकंड में रेस पूरी करके नया नेशनल रिकॉर्ड बनाया है।"

यह ऐसे समय में आया है जब गुरिंदरवीर के हालिया इंटरव्यू में उनके संघर्ष की तस्वीर सामने आई थी — जिसमें उन्होंने कथित तौर पर स्वीकार किया था कि सरकारी नौकरी मिलने के बावजूद उन्हें राष्ट्रीय स्तर के स्टेडियम तक पहुँच नहीं मिली और प्रशिक्षण के लिए पर्याप्त सहयोग नहीं मिला।

भारतीय एथलेटिक्स में पुरानी समस्या

गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब किसी भारतीय एथलीट की सफलता के बाद सरकारी श्रेय-विवाद उठा हो। आलोचकों का कहना है कि भारत में खेल प्रशासन की एक पुरानी कमज़ोरी यही रही है — एथलीटों को प्रशिक्षण के दौरान संसाधन और बुनियादी ढाँचा मुहैया कराने की बजाय, पदक या रिकॉर्ड के बाद उन्हें 'अपना' बताने की होड़ मच जाती है।

आगे क्या

विजेंदर सिंह की इस टिप्पणी के बाद खेल जगत और सोशल मीडिया पर बहस तेज़ हो गई है। यह देखना होगा कि पंजाब सरकार इस आलोचना पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया देती है या नहीं। गुरिंदरवीर सिंह की यह उपलब्धि भारतीय स्प्रिंट एथलेटिक्स के लिए एक नया अध्याय है, और उम्मीद है कि आने वाले अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी वे देश का नाम रोशन करेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन प्रशिक्षण के बुनियादी ढाँचे में निवेश में पीछे। गुरिंदरवीर का मामला यह भी उजागर करता है कि 'सरकारी नौकरी' और 'खेल सहयोग' दो अलग-अलग चीज़ें हैं — एक से रोज़ी मिलती है, दूसरे से रिकॉर्ड। जब तक प्रशिक्षण सुविधाएँ और खेल अवकाश नीति एक साथ नहीं आती, ऐसे विवाद हर बड़ी जीत के बाद उठते रहेंगे। असली सवाल यह है कि क्या यह आलोचना नीति बदलाव की ओर ले जाएगी, या बस एक चुनावी चक्र तक सोशल मीडिया पर गूँजकर खामोश हो जाएगी।
RashtraPress
11 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गुरिंदरवीर सिंह ने कौन सा राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ा?
गुरिंदरवीर सिंह ने 24 मई 2026 को रांची में नेशनल सीनियर एथलेटिक्स फेडरेशन कॉम्पिटिशन में 100 मीटर दौड़ 10.09 सेकंड में पूरी कर नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया। इससे पहले उन्होंने उसी दिन सेमीफाइनल में 10.17 सेकंड से अनिमेष कुजूर के 10.18 सेकंड के पुराने रिकॉर्ड को भी तोड़ा था।
विजेंदर सिंह ने पंजाब सरकार की आलोचना क्यों की?
विजेंदर सिंह ने आरोप लगाया कि पंजाब सरकार ने गुरिंदरवीर को सरकारी नौकरी तो दी, लेकिन प्रशिक्षण के लिए न राष्ट्रीय स्तर का स्टेडियम दिया और न ही सही माहौल। उनका कहना है कि रिकॉर्ड टूटने के बाद श्रेय लेना उचित नहीं, क्योंकि संघर्ष के समय सरकार का सहयोग नहीं था।
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने गुरिंदरवीर पर क्या कहा?
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने 24 मई 2026 को एक्स पर पोस्ट कर गुरिंदरवीर को बधाई दी और उन्हें 'पंजाब का बहादुर बेटा' बताया। उन्होंने कहा कि गुरिंदरवीर 100 मीटर में 10.10 सेकंड से कम समय में दौड़ पूरी करने वाले पहले भारतीय एथलीट बने हैं।
गुरिंदरवीर सिंह किस टीम का प्रतिनिधित्व करते हैं?
गुरिंदरवीर सिंह फेडरेशन कप 2026 में रिलायंस का प्रतिनिधित्व कर रहे थे। वे पंजाब के मूल निवासी हैं और उन्हें पंजाब सरकार ने सरकारी नौकरी भी दी हुई है।
भारतीय एथलीटों को सरकारी समर्थन की समस्या क्यों बार-बार उठती है?
आलोचकों का कहना है कि भारत में खेल प्रशासन में एथलीटों को प्रशिक्षण के दौरान ज़रूरी बुनियादी ढाँचा और संसाधन देने की बजाय, सफलता मिलने के बाद उन्हें 'अपना' बताने की परंपरा रही है। गुरिंदरवीर का मामला इसी पुरानी समस्या का ताज़ा उदाहरण बताया जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 1 महीना पहले
  7. 1 महीना पहले
  8. 3 महीने पहले