गुरिंदरवीर के राष्ट्रीय रिकॉर्ड पर श्रेय-विवाद: विजेंदर सिंह ने पंजाब सरकार को घेरा
सारांश
मुख्य बातें
ओलंपिक पदक विजेता मुक्केबाज़ विजेंदर सिंह ने धावक गुरिंदरवीर सिंह की ऐतिहासिक सफलता का श्रेय लेने पर पंजाब सरकार की कड़ी आलोचना की है। विजेंदर का कहना है कि सरकार ने जब एथलीट को सबसे ज़्यादा ज़रूरत थी — संघर्ष के दौरान — तब उसे नज़रअंदाज़ किया, और अब रिकॉर्ड टूटने के बाद बधाइयों की होड़ मच गई है।
गुरिंदरवीर की ऐतिहासिक उपलब्धि
25 वर्षीय गुरिंदरवीर सिंह ने शनिवार, 24 मई 2026 को रांची में आयोजित नेशनल सीनियर एथलेटिक्स फेडरेशन कॉम्पिटिशन 2026 में इतिहास रच दिया। रिलायंस का प्रतिनिधित्व करते हुए पंजाब के इस धावक ने पुरुषों की 100 मीटर स्पर्धा में 10.09 सेकंड का समय निकालकर स्वर्ण पदक जीता और राष्ट्रीय रिकॉर्ड अपने नाम किया।
उल्लेखनीय है कि गुरिंदरवीर ने उसी दिन ओपनिंग सेमीफाइनल हीट में 10.17 सेकंड का समय निकालकर अनिमेष कुजूर के 10.18 सेकंड के पिछले राष्ट्रीय रिकॉर्ड को पहले ही ध्वस्त कर दिया था। इस तरह उन्होंने दो दिन में दो राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़े और 100 मीटर में 10.10 सेकंड से कम समय में दौड़ पूरी करने वाले पहले भारतीय एथलीट बन गए।
विजेंदर सिंह का तीखा प्रहार
विजेंदर सिंह ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए लिखा, "पंजाब सरकार अब गुरिंदरवीर सिंह का श्रेय लेने के लिए आगे आई है, लेकिन अगर आप उनका इंटरव्यू सुनें, तो वह साफ कहते हैं कि उन्हें न तो राष्ट्रीय स्तर का स्टेडियम मिला और न ही सरकार से सही समर्थन मिला।"
विजेंदर ने आगे लिखा, "उन्होंने उन्हें सरकारी नौकरी दी, लेकिन फिर अभ्यास और तैयारी के लिए सही माहौल दिए बिना ड्यूटी पर भेज दिया। गुरिंदरवीर ने जैसे ही राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ा, हर कोई श्रेय लेने के लिए दौड़ पड़ा। एथलीट को जीतने के बाद सपोर्ट की जरूरत नहीं होती — उन्हें अपने संघर्ष के दौरान सपोर्ट की जरूरत होती है।"
पंजाब के मुख्यमंत्री की बधाई पर सवाल
गुरिंदरवीर का नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनते ही पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने 24 मई को एक्स पर पोस्ट कर बधाई दी। उन्होंने लिखा, "रांची में फेडरेशन कप में 100 मीटर फ्रीस्टाइल रेस में गोल्ड मेडल जीतने के लिए हमारे होनहार एथलीट गुरिंदरवीर सिंह को दिल से बधाई। हमारे बहादुर बेटे ने सिर्फ 10.09 सेकंड में रेस पूरी करके नया नेशनल रिकॉर्ड बनाया है।"
यह ऐसे समय में आया है जब गुरिंदरवीर के हालिया इंटरव्यू में उनके संघर्ष की तस्वीर सामने आई थी — जिसमें उन्होंने कथित तौर पर स्वीकार किया था कि सरकारी नौकरी मिलने के बावजूद उन्हें राष्ट्रीय स्तर के स्टेडियम तक पहुँच नहीं मिली और प्रशिक्षण के लिए पर्याप्त सहयोग नहीं मिला।
भारतीय एथलेटिक्स में पुरानी समस्या
गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब किसी भारतीय एथलीट की सफलता के बाद सरकारी श्रेय-विवाद उठा हो। आलोचकों का कहना है कि भारत में खेल प्रशासन की एक पुरानी कमज़ोरी यही रही है — एथलीटों को प्रशिक्षण के दौरान संसाधन और बुनियादी ढाँचा मुहैया कराने की बजाय, पदक या रिकॉर्ड के बाद उन्हें 'अपना' बताने की होड़ मच जाती है।
आगे क्या
विजेंदर सिंह की इस टिप्पणी के बाद खेल जगत और सोशल मीडिया पर बहस तेज़ हो गई है। यह देखना होगा कि पंजाब सरकार इस आलोचना पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया देती है या नहीं। गुरिंदरवीर सिंह की यह उपलब्धि भारतीय स्प्रिंट एथलेटिक्स के लिए एक नया अध्याय है, और उम्मीद है कि आने वाले अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी वे देश का नाम रोशन करेंगे।