मन की बात में PM मोदी ने गुरिंदरवीर-अनिमेष को दी बधाई, दो दिन में तीन बार नेशनल रिकॉर्ड तोड़ने पर सराहा
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 31 मई 2026 को प्रसारित मन की बात के 134वें संस्करण में रांची में आयोजित फेडरेशन कप 2026 के दौरान 100 मीटर स्पर्धा में नेशनल रिकॉर्ड स्थापित करने वाले धावक गुरिंदरवीर सिंह और अनिमेष कुजूर की भरपूर सराहना की। प्रधानमंत्री ने दोनों एथलीटों से सीधे फोन पर बातचीत की और उनकी संघर्षपूर्ण यात्रा को देश के सामने रखा।
रिकॉर्ड-तोड़ प्रदर्शन का विवरण
फेडरेशन कप 2026 में गुरिंदरवीर सिंह ने 100 मीटर फाइनल में 10.09 सेकंड का समय निकालकर नया नेशनल रिकॉर्ड कायम किया — वे 10.1 सेकंड के बैरियर को तोड़ने वाले पहले भारतीय बने। अनिमेष कुजूर 10.20 सेकंड के साथ दूसरे स्थान पर रहे।
इससे पहले सेमीफाइनल में गुरिंदरवीर ने 10.17 सेकंड में रेस पूरी कर अनिमेष का रिकॉर्ड तोड़ा था। ठीक 10 मिनट बाद अनिमेष ने 10.15 सेकंड में दौड़ पूरी कर नया रिकॉर्ड बना दिया, जिसे फाइनल में गुरिंदरवीर ने 10.09 सेकंड से पीछे छोड़ा। इस प्रकार दोनों एथलीटों ने मिलकर दो दिनों के भीतर तीन बार नेशनल रिकॉर्ड तोड़ा।
PM मोदी की 'जुगलबंदी' वाली टिप्पणी
प्रधानमंत्री मोदी ने दोनों की इस प्रतिस्पर्धी साझेदारी को अनूठे अंदाज़ में परिभाषित किया। उन्होंने कहा, 'आप दोनों ने बहुत बड़ा कमाल किया है और सिर्फ दो दिनों के भीतर तीन बार नेशनल रिकॉर्ड तोड़ा है। हमने संगीत में तो जुगलबंदी देखी थी, लेकिन चुनौती में जुगलबंदी होती है कि एक बार एक चुनौती दे फिर दूसरा उस चुनौती को उठा ले।' उन्होंने दोनों की खेल भावना की विशेष प्रशंसा करते हुए कहा कि एक-दूसरे को चुनौती देने के साथ-साथ मदद करना अद्भुत है।
संघर्ष की कहानी: अनिमेष और गुरिंदरवीर की ज़ुबानी
अनिमेष कुजूर ने बताया कि वे छत्तीसगढ़ के सैनिक स्कूल अम्बिकापुर से पास-आउट हैं और पहले फुटबॉल खेलते थे। 2021 में कोविड के बाद फुटबॉल के दोस्तों की सलाह पर उन्होंने राज्य स्तरीय ट्रायल में हिस्सा लिया और सीधे नेशनल स्तर पर चुने गए। वे अभी ओडिशा से खेलते हैं और 200 मीटर तथा 400 मीटर के भी नेशनल रिकॉर्ड धारक हैं। पिछले वर्ष उन्होंने एशियन मेडल और वर्ल्ड यूनिवर्सिटी गेम्स मेडल जीते।
गुरिंदरवीर सिंह भारतीय नौसेना (Indian Navy) में कार्यरत हैं। उन्होंने बताया कि बचपन में पिता की ट्रॉफियाँ और मेडल साफ करते हुए खेल के प्रति लगाव जगा। उनके पिता और दादा दोनों खेल से जुड़े थे, लेकिन घर की जिम्मेदारियों के कारण पिता का सपना अधूरा रह गया। गुरिंदरवीर ने कहा, 'मेरे पिता ने मेरे पर भरोसा किया, वो भरोसा मेरी हिम्मत बना।'
'भारतीयों का शरीर 100 मीटर के लिए नहीं' — इस धारणा को तोड़ा
दोनों एथलीटों ने बताया कि 100 मीटर स्प्रिंट चुनने पर लोगों ने कहा कि भारतीयों की शारीरिक बनावट इस इवेंट के लिए उपयुक्त नहीं है। गुरिंदरवीर के पिता ने इस सोच को नकारते हुए बेटे का पूरा साथ दिया। अनिमेष ने भी कहा कि उनके पिता ने हमेशा प्रेरित किया कि एक बार मैदान में उतरे हो तो पीछे मत देखो। दोनों ने एकमत होकर कहा कि उन्होंने साबित किया है कि भारतीय भी स्प्रिंट कर सकते हैं।
कॉमनवेल्थ गेम्स पर नज़र
दोनों एथलीटों का कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए चयन हो चुका है और उन्होंने वहाँ बेहतर प्रदर्शन का संकल्प जताया। प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें ढेरों शुभकामनाएँ देते हुए विश्वास जताया कि ये दोनों एथलीट आगे भी देश का नाम रोशन करेंगे। यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय ट्रैक एंड फील्ड एथलेटिक्स अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराने की कोशिश में है।