कपिल परमार ने एशियन पैरा गेम्स 2026 में पैरा-जूडो ब्रॉन्ज जीता, खेल मंत्री मांडविया ने दी बधाई
सारांश
मुख्य बातें
नागोया के आइची प्रीफेक्चुरल मार्शल आर्ट्स हॉल में 19 अक्टूबर 2026 को भारत के कपिल परमार ने 2026 एशियन पैरा गेम्स के पुरुष जे1-70 किग्रा पैरा-जूडो इवेंट में ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया। उन्होंने ब्रॉन्ज मेडल मुकाबले में इंडोनेशिया के राफली अहनाफ शिदकी को मात्र 69 सेकंड में इप्पोन से पराजित कर यह पदक सुनिश्चित किया। इस उपलब्धि के साथ भारत ने प्रतियोगिता के पहले दिन तीसरा पदक हासिल किया।
मुकाबले का पूरा घटनाक्रम
परमार की यात्रा क्वार्टर फाइनल से शुरू हुई, जहाँ उनका सामना मंगोलिया के बातरसुरेन बैट-एर्डीन से हुआ। यह मुकाबला कड़ा रहा और गोल्डन स्कोर तक खिंचा। परमार ने 4 मिनट 53 सेकंड के रोमांचक गोल्डन स्कोर संघर्ष के बाद इप्पोन से जीत दर्ज की और सेमीफाइनल में जगह बनाई।
सेमीफाइनल में इंडोनेशिया के जुनेदी ने परमार को इप्पोन से हरा दिया, जिससे गोल्ड मेडल की उनकी उम्मीद समाप्त हो गई। हालाँकि, सेमीफाइनल की हार के बाद परमार ने हार नहीं मानी और ब्रॉन्ज मेडल मुकाबले में शिदकी के खिलाफ दमदार प्रदर्शन करते हुए महज एक मिनट नौ सेकंड में मैच समाप्त कर दिया।
खेल मंत्री की प्रतिक्रिया
केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर परमार को बधाई देते हुए लिखा, 'भारत के लिए गर्व का पल, कपिल परमार ने एशियन पैरा गेम्स 2026 में पैरा जूडो में ब्रॉन्ज मेडल जीता।' सरकार के स्तर पर इस त्वरित प्रतिक्रिया ने देशभर में परमार की उपलब्धि को और उजागर किया।
कपिल परमार का शानदार करियर
मध्य प्रदेश के सीहोर ज़िले से आने वाले 26 वर्षीय परमार 2017 से पैरा-जूडो में सक्रिय हैं। जे1 कैटेगरी (दृष्टिबाधित एथलीटों के लिए) में वे कोच मुनव्वर अंजार अली सिद्दीकी के मार्गदर्शन में भारत के सर्वश्रेष्ठ पैरा-जूडोका बनकर उभरे हैं।
उनके खाते में पेरिस 2024 पैरालंपिक गेम्स में ब्रॉन्ज, हांगझोऊ एशियन पैरा गेम्स में सिल्वर और 2019 कॉमनवेल्थ जूडो चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल दर्ज हैं। इसके अलावा उन्होंने कई आईबीएसए ग्रैंड प्रिक्स खिताब और सात राष्ट्रीय स्वर्ण पदक भी जीते हैं। 2024-25 में उन्हें प्रतिष्ठित अर्जुन अवॉर्ड से नवाज़ा जा चुका है।
आगे की राह
परमार टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम (TOPS) के अंतर्गत समर्थित एथलीट हैं, जो दर्शाता है कि भारतीय खेल प्राधिकरण उन पर भविष्य के लिए बड़ा दांव लगा रहा है। नागोया में यह ब्रॉन्ज पदक उनके अंतर्राष्ट्रीय पदक संग्रह को और समृद्ध करता है तथा आगामी वैश्विक प्रतियोगिताओं में भारत की पदक आशाओं को मज़बूत करता है।