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एशियन पैरा गेम्स 2026: अंजानाबेन का गोल्ड, जयंती का सिल्वर; टी12 में तेजलबेन को ब्रॉन्ज

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एशियन पैरा गेम्स 2026: अंजानाबेन का गोल्ड, जयंती का सिल्वर; टी12 में तेजलबेन को ब्रॉन्ज

सारांश

नागोया में भारत की पैरा-एथलीटों ने इतिहास रचा — अंजानाबेन बंबडिया ने 400 मीटर टी47 में गोल्ड, जयंती नेहरा ने सिल्वर और तेजलबेन दामोर ने टी12 में ब्रॉन्ज जीता। एक ही दिन में तीन पदक, तीन अलग-अलग संघर्षों की जीत।

मुख्य बातें

अंजानाबेन बंबडिया ने 59.97 सेकंड के साथ महिलाओं की 400 मीटर टी47 में गोल्ड जीता।
जयंती नेहरा ने 1:00.65 सेकंड के साथ उसी स्पर्धा में सिल्वर हासिल किया।
तेजलबेन दामोर ने 400 मीटर टी12 में 57.60 सेकंड के साथ ब्रॉन्ज जीता।
अंजानाबेन 2018 जकार्ता एशियन पैरा गेम्स के रिकॉर्ड 58.39 सेकंड को तोड़ने के करीब पहुँचीं।
तीनों पदक 22 अक्टूबर 2026 को नागोया के मिजुहो पार्क एथलेटिक स्टेडियम में जीते गए।

भारतीय पैरा-एथलीट अंजानाबेन बंबडिया और जयंती नेहरा ने 22 अक्टूबर 2026 को नागोया के मिजुहो पार्क एथलेटिक स्टेडियम में महिलाओं की 400 मीटर टी47 स्पर्धा में क्रमशः गोल्ड और सिल्वर जीतकर भारत का तिरंगा बुलंद किया। इसी दिन तेजलबेन दामोर ने महिलाओं की 400 मीटर टी12 स्पर्धा में ब्रॉन्ज पदक हासिल कर भारत की झोली में तीसरा मेडल डाला।

मुख्य घटनाक्रम: टी47 में भारत का दोहरा जलवा

अंजानाबेन बंबडिया ने 59.97 सेकंड (848 रज़ा प्वाइंट्स) का समय निकालकर टी47 स्पर्धा में पहला स्थान हासिल किया। उन्होंने अपनी हमवतन प्रतिद्वंद्वी को एक सेकंड से भी कम के अंतर से पीछे छोड़ा। जयंती नेहरा ने 1:00.65 सेकंड (815 रज़ा प्वाइंट्स) के साथ सिल्वर पर कब्जा किया।

थाईलैंड की ससीरावन इनथाचोट 1:02.58 सेकंड (714 रज़ा प्वाइंट्स) के साथ तीसरे स्थान पर रहीं, जबकि नेपाल की प्रभा आंगदेम्बे 1:15.81 सेकंड (89 रज़ा प्वाइंट्स) के साथ चौथे स्थान पर रहीं। गौरतलब है कि अंजानाबेन इस स्पर्धा के एशियन पैरा गेम्स रिकॉर्ड — 58.39 सेकंड, जो चीन की ली लू ने 2018 के जकार्ता एशियन पैरा गेम्स में बनाया था — को तोड़ने के बेहद करीब पहुँच गई थीं।

टी12 स्पर्धा: तेजलबेन का ब्रॉन्ज

तेजलबेन दामोर ने महिलाओं की 400 मीटर टी12 स्पर्धा में 57.60 सेकंड का समय निकालकर ब्रॉन्ज पदक जीता। ईरान की हजार सफारजादेह ने 56.43 सेकंड के साथ गोल्ड और चीन की शेन याकिन (गाइड हे युचोंग) ने 58.04 सेकंड के साथ सिल्वर अपने नाम किया।

अंजानाबेन: तेज़ी से उभरती पैरा-स्प्रिंटर

गुजरात की रहने वाली अंजानाबेन बंबडिया का जन्म 2001 में हुआ था। जन्मजात विकलांगता के कारण उनका एक हाथ सामान्य से छोटा है। वह देश की सबसे तेजी से उभरती महिला पैरा-स्प्रिंटर्स में गिनी जाती हैं और खेलो इंडिया पैरा गेम्स 2025 की मौजूदा चैंपियन हैं। नई दिल्ली में आयोजित वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप 2025 में उन्होंने 1:00.04 सेकंड का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ समय दर्ज किया था। नागोया में उनका प्रदर्शन उस समय से भी बेहतर रहा, जो उनकी असाधारण प्रगति का प्रमाण है।

जयंती नेहरा: संघर्ष से शिखर तक

ओडिशा की जयंती नेहरा का जन्म 1999 में हुआ था। मात्र एक साल की उम्र में वह मिट्टी के चूल्हे में गिर गई थीं, जिसके कारण उन्हें सेकंड-डिग्री बर्न की चोट आई और उनकी बाईं कोहनी व हाथ में स्थायी जकड़न आ गई। उनके स्कूल के कोच विष्णु प्रसाद मिश्रा ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और साखीगोपाल स्थित अपने गुरुकुल एथलेटिक ट्रेनिंग सेंटर में उन्हें निःशुल्क प्रशिक्षण दिया।

जयंती ने 2018 के एशियन पैरा गेम्स में 400 मीटर टी47 (59.71 सेकंड) और 200 मीटर टी47 (27.45 सेकंड) में दो पदक जीते थे। 2017 में स्विट्जरलैंड के नॉटविल में आयोजित वर्ल्ड जूनियर पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में उन्होंने 400 मीटर में गोल्ड जीतकर 'वर्ल्ड यूथ चैंपियन' का खिताब हासिल किया था। यह ऐसे समय में आया है जब भारत अंतरराष्ट्रीय पैरा-एथलेटिक्स में अपनी उपस्थिति और मज़बूत कर रहा है।

आगे की राह

भारत के इन तीनों पदकों ने एशियन पैरा गेम्स 2026 में देश की पदक तालिका को और समृद्ध किया है। अंजानाबेन की 59.97 सेकंड की दौड़ से स्पष्ट है कि एशियन पैरा गेम्स रिकॉर्ड तोड़ना उनसे अब दूर नहीं। आने वाले अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में भारतीय पैरा-एथलीटों से और बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद बनी रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

जयंती और तेजलबेन की यह उपलब्धि केवल खेल का नतीजा नहीं है — यह भारत की पैरा-एथलेटिक्स पाइपलाइन की बढ़ती गहराई का प्रमाण है। जयंती की कहानी विशेष रूप से उल्लेखनीय है: बचपन की दुर्घटना से लेकर एशियन पैरा गेम्स के पोडियम तक — यह एक कोच की दूरदर्शिता और एक एथलीट की असाधारण जिजीविषा की जीत है। अंजानाबेन का 59.97 सेकंड का समय बताता है कि रिकॉर्ड टूटना अब वक्त की बात है। भारतीय पैरा-स्पोर्ट्स को जिस संस्थागत समर्थन की ज़रूरत है, उसके बारे में ये नतीजे नीति-निर्माताओं को एक स्पष्ट संकेत देते हैं।
RashtraPress
22 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एशियन पैरा गेम्स 2026 में भारत ने 400 मीटर टी47 में कौन-कौन से पदक जीते?
भारत ने 400 मीटर टी47 स्पर्धा में गोल्ड और सिल्वर दोनों पदक जीते। अंजानाबेन बंबडिया ने 59.97 सेकंड के साथ गोल्ड और जयंती नेहरा ने 1:00.65 सेकंड के साथ सिल्वर हासिल किया।
तेजलबेन दामोर ने कौन-सी स्पर्धा में पदक जीता?
तेजलबेन दामोर ने महिलाओं की 400 मीटर टी12 स्पर्धा में 57.60 सेकंड का समय निकालकर ब्रॉन्ज पदक जीता। ईरान की हजार सफारजादेह ने गोल्ड और चीन की शेन याकिन ने सिल्वर जीता।
अंजानाबेन बंबडिया कौन हैं और उनकी पृष्ठभूमि क्या है?
अंजानाबेन बंबडिया गुजरात की रहने वाली पैरा-स्प्रिंटर हैं, जिनका जन्म 2001 में हुआ था और जन्मजात विकलांगता के कारण उनका एक हाथ सामान्य से छोटा है। वह खेलो इंडिया पैरा गेम्स 2025 की चैंपियन हैं और वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप 2025 में 1:00.04 सेकंड का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ दर्ज कर चुकी हैं।
जयंती नेहरा की कहानी क्या है?
ओडिशा की जयंती नेहरा का जन्म 1999 में हुआ था। एक साल की उम्र में मिट्टी के चूल्हे में गिरने से उन्हें सेकंड-डिग्री बर्न हुई और बाईं कोहनी व हाथ में स्थायी जकड़न आ गई। कोच विष्णु प्रसाद मिश्रा ने उनकी प्रतिभा पहचानकर साखीगोपाल के गुरुकुल एथलेटिक ट्रेनिंग सेंटर में निःशुल्क प्रशिक्षण दिया। वह 2017 में वर्ल्ड यूथ पैरा एथलेटिक्स चैंपियन भी रह चुकी हैं।
एशियन पैरा गेम्स 2026 में 400 मीटर टी47 का मौजूदा रिकॉर्ड क्या है?
400 मीटर टी47 का एशियन पैरा गेम्स रिकॉर्ड 58.39 सेकंड है, जो चीन की ली लू ने 2018 के जकार्ता एशियन पैरा गेम्स में बनाया था। अंजानाबेन बंबडिया 59.97 सेकंड के साथ इस रिकॉर्ड के काफी करीब पहुँच गईं।
राष्ट्र प्रेस
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