चारा घोटाले में CBI का बड़ा ऑपरेशन: 25 साल से फरार सत्येंद्र कुमार लखनऊ रेलवे स्टेशन पर गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने 23 अक्टूबर 2026 को चारा घोटाले के एक मामले में बड़ी सफलता हासिल करते हुए 25 वर्षों से अधिक समय से फरार चल रहे वांछित अपराधी सत्येंद्र कुमार को लखनऊ रेलवे स्टेशन पर आधी रात गिरफ्तार किया। वर्ष 2001 में चार्जशीट दाखिल होने के बाद से आरोपी न्यायालय के समक्ष कभी पेश नहीं हुआ था, जिसके बाद अदालत ने उसके खिलाफ स्थायी गिरफ्तारी वारंट जारी कर रखा था।
फरारी और गिरफ्तारी का घटनाक्रम
वर्ष 2001 में चारा घोटाले के इस मामले में चार्जशीट दाखिल होने के बाद सत्येंद्र कुमार फरार हो गया था। मुकदमे का सामना करने से बचने के लिए वह लंबे समय तक नेपाल में छिपा रहा। CBI को भौतिक एवं तकनीकी निगरानी तथा मानवीय खुफिया जानकारी के आधार पर पता चला कि आरोपी नेपाल में है।
हाल ही में सत्येंद्र कुमार भारत में दाखिल हुआ और गुरुवार को वह ट्रेन से गुना (मध्य प्रदेश) से लखनऊ (उत्तर प्रदेश) की यात्रा कर रहा था। खुफिया जानकारी मिलते ही CBI ने एक विशेष टीम गठित की और उसे लखनऊ रेलवे स्टेशन पर पहले से तैनात कर दिया। आधी रात के आसपास टीम ने आरोपी को ट्रेन से उतरते ही पकड़ लिया।
25 साल की लंबी तलाश का अंत
यह गिरफ्तारी CBI की दीर्घकालीन जांच क्षमता का उदाहरण मानी जा रही है। गौरतलब है कि चारा घोटाला 1990 के दशक में बिहार में सामने आया था, जिसमें पशुपालन विभाग के नाम पर करोड़ों रुपये की फर्जी निकासी की गई थी। इस घोटाले में कई बड़े नाम शामिल रहे और अनेक मामलों में मुकदमे दशकों से चल रहे हैं। सत्येंद्र कुमार का मामला उन्हीं में से एक है, जहाँ आरोपी ने फरारी के जरिये न्याय से बचने की कोशिश की।
CBI के अनुसार, आरोपी के नेपाल में ठिकाने का पता लगाने में तकनीकी निगरानी ने अहम भूमिका निभाई। यह ऐसे समय में आया है जब एजेंसी पुराने मामलों के फरारी आरोपियों को पकड़ने के लिए सक्रिय अभियान चला रही है।
लखनऊ कोर्ट का दूसरा फैसला: इंस्पेक्टर हत्याकांड में 10 साल की सजा
इसी दिन CBI की कार्रवाई का एक दूसरा मामला उत्तर प्रदेश से सामने आया। लखनऊ की एक अदालत ने आरोपी बोचा उर्फ राजू सोनी को दोषी करार देते हुए 10 वर्ष की कैद और ₹9,000 के जुर्माने की सजा सुनाई।
यह मामला 19 नवंबर 2015 को उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ स्थित कोतवाली थाने के तत्कालीन एसएचओ इंस्पेक्टर अनिल कुमार की गैर-इरादतन हत्या से जुड़ा है। इंस्पेक्टर अनिल कुमार उस समय प्रतापगढ़ के कोतवाली थाने के एसएचओ थे, जिन्हें बाद में निलंबित भी किया गया था। घटना प्रतापगढ़ स्थित 'होटल वैष्णवी' की 'मॉडल शॉप' पर हुई थी।
CBI ने कैसे अपने हाथ में ली थी जांच
इलाहाबाद हाईकोर्ट (लखनऊ बेंच) के आदेश पर CBI ने 29 जून 2018 को प्रतापगढ़ के कोतवाली थाने से यह मामला अपने हाथ में लिया था। जांच पूरी होने के बाद CBI ने दो आरोपियों — जीशान खान और बोचा उर्फ राजू सोनी — के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। 14 दिसंबर 2022 को दोनों के खिलाफ आरोप भी तय किए गए थे। अब लखनऊ अदालत ने बोचा उर्फ राजू सोनी को दोषी मानते हुए सजा सुना दी है, जबकि जीशान खान का मामला अभी भी न्यायालय में विचाराधीन है।
आगे की राह
सत्येंद्र कुमार को गिरफ्तारी के बाद संबंधित न्यायालय में पेश किया जाएगा, जहाँ उसे पहले से जारी गिरफ्तारी वारंट के तहत न्यायिक हिरासत में भेजे जाने की संभावना है। चारा घोटाले के इस मामले में अब मुकदमा आगे बढ़ने का रास्ता खुल सकता है। CBI सूत्रों के अनुसार, ऐसे अन्य फरारी आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी के प्रयास भी जारी हैं।