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सीबीआई ने उत्तराखंड LUCC चिट फंड घोटाले में मुंबई से 2 मुख्य आरोपी दबोचे, ₹800 करोड़ की धोखाधड़ी

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सीबीआई ने उत्तराखंड LUCC चिट फंड घोटाले में मुंबई से 2 मुख्य आरोपी दबोचे, ₹800 करोड़ की धोखाधड़ी

सारांश

उत्तराखंड के LUCC चिट फंड घोटाले में सीबीआई ने मुंबई से 2 और मुख्य आरोपी दबोचे — अब तक कुल 7 गिरफ्तारियाँ। ₹800 करोड़ की इस कथित धोखाधड़ी में 1 लाख से अधिक निवेशक फँसे हैं। नैनीताल हाई कोर्ट के आदेश पर शुरू हुई यह जांच अब बड़ी साजिश की परतें उघाड़ रही है।

मुख्य बातें

सीबीआई ने 2 जून 2026 को मुंबई से उत्तराखंड LUCC चिट फंड घोटाले में 2 मुख्य आरोपी गिरफ्तार किए।
इस घोटाले में 1 लाख से अधिक निवेशकों से कथित तौर पर लगभग ₹800 करोड़ की अवैध वसूली हुई।
सीबीआई ने इससे पहले 12-13 मई 2026 को 5 आरोपी गिरफ्तार किए थे, जो अब देहरादून की सुधोवाला जेल में हैं।
मामला नैनीताल उच्च न्यायालय के 17 अक्टूबर 2025 के आदेश पर 26 नवंबर 2025 को दर्ज हुआ था।
अपराध की आय से अर्जित अचल संपत्तियों का ब्यौरा BUDS अधिनियम के तहत उत्तराखंड सरकार के वित्त सचिव को सौंपा गया।

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने 2 जून 2026 को उत्तराखंड के बहुचर्चित LUCC चिट फंड घोटाले में मुंबई से दो मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया। यह गिरफ्तारी वित्तीय अभिलेखों के गहन विश्लेषण, बैंक लेनदेन की जांच और देशभर में व्यापक क्षेत्रीय छानबीन के बाद संभव हुई। इस मामले में 1 लाख से अधिक निवेशकों से कथित तौर पर लगभग ₹800 करोड़ की अवैध वसूली की गई।

मामले की पृष्ठभूमि

उत्तराखंड के नैनीताल उच्च न्यायालय ने 17 अक्टूबर 2025 को पारित आदेश के अनुपालन में सीबीआई की एंटी करप्शन ब्रांच (ACB), देहरादून ने 26 नवंबर 2025 को मेसर्स लोनी अर्बन मल्टी स्टेट क्रेडिट एंड थ्रिफ्ट को-ऑपरेटिव सोसाइटी (LUCC) के पदाधिकारियों और अन्य के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की थी।

यह मामला उत्तराखंड के कई जिलों में फैले निवेशकों को प्रभावित करने वाली अनियमित जमा योजनाओं के संचालन, सार्वजनिक जमा की अवैध वसूली, धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात, आपराधिक षड्यंत्र और धन के दुरुपयोग जैसे गंभीर आरोपों से संबंधित है।

आरोपियों की भूमिका

जांच में सामने आया है कि मुंबई से गिरफ्तार दोनों व्यक्ति LUCC के मुख्य आरोपियों में शामिल हैं। जांच के दौरान एकत्र साक्ष्य यह दर्शाते हैं कि इन्होंने अन्य आरोपियों के साथ मिलकर जमाकर्ताओं से संग्रहित धन के संग्रह, प्रबंधन, हेराफेरी और गबन में सक्रिय भूमिका निभाई।

रिमांड प्राप्त करने के बाद दोनों आरोपियों को देहरादून स्थित न्यायालय के समक्ष पेश किया जाएगा।

पूर्व में हुई गिरफ्तारियाँ

सीबीआई ने इससे पहले 12 और 13 मई 2026 को इस मामले में 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया था। इनमें उत्तराखंड में LUCC के 3 वरिष्ठ सहकारी प्रवर्तक शामिल थे, जो जनता से सक्रिय रूप से जमा राशि एकत्रित कर रहे थे और नकद जमा शाखाओं का प्रबंधन करते थे। ये सभी 5 आरोपी वर्तमान में देहरादून की सुधोवाला जेल में बंद हैं।

संपत्तियों का ब्यौरा और कानूनी कार्रवाई

सीबीआई ने आरोपियों द्वारा अपराध की आय से अर्जित कई अचल संपत्तियों का विवरण भी प्राप्त किया है। यह विवरण BUDS अधिनियम के तहत सक्षम प्राधिकारी — अर्थात उत्तराखंड सरकार के वित्त सचिव — के साथ साझा किया गया है, ताकि संपत्तियों की कुर्की की प्रक्रिया शुरू की जा सके।

आगे क्या होगा

यह गिरफ्तारियाँ सार्वजनिक जमा राशि की अवैध वसूली और गबन के पीछे की बड़ी साजिश का पर्दाफाश करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही हैं। गौरतलब है कि अब तक इस मामले में कुल 7 आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं और जांच अभी जारी है। सीबीआई के सूत्रों के अनुसार, आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियाँ संभव हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ बहु-राज्यीय सहकारी समितियाँ वर्षों तक बिना पर्याप्त निगरानी के काम करती रहीं। नैनीताल उच्च न्यायालय को हस्तक्षेप करना पड़ा — यह अपने आप में इस बात का संकेत है कि राज्य की नियामक एजेंसियाँ समय रहते सक्रिय नहीं हुईं। ₹800 करोड़ और 1 लाख से अधिक पीड़ित निवेशक — जिनमें अधिकांश मध्यम और निम्न-मध्यम वर्ग के हैं — यह दर्शाता है कि वित्तीय साक्षरता की कमी का फायदा उठाकर संगठित रूप से लूट की गई। असली सवाल यह है कि क्या सीबीआई की जांच केवल गिरफ्तारियों तक सिमटेगी, या संपत्ति कुर्की और पीड़ितों को मुआवज़ा दिलाने तक पहुँचेगी।
RashtraPress
19 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उत्तराखंड LUCC चिट फंड घोटाला क्या है?
यह मेसर्स लोनी अर्बन मल्टी स्टेट क्रेडिट एंड थ्रिफ्ट को-ऑपरेटिव सोसाइटी (LUCC) द्वारा संचालित कथित अनियमित जमा योजनाओं का मामला है, जिसमें उत्तराखंड के कई जिलों में 1 लाख से अधिक निवेशकों से लगभग ₹800 करोड़ की अवैध वसूली का आरोप है। इसमें धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात और धन के दुरुपयोग जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं।
सीबीआई ने इस मामले में अब तक कितने लोगों को गिरफ्तार किया है?
सीबीआई ने 12-13 मई 2026 को 5 आरोपी और 2 जून 2026 को मुंबई से 2 और मुख्य आरोपी गिरफ्तार किए हैं — कुल 7 गिरफ्तारियाँ हो चुकी हैं। पहले गिरफ्तार 5 आरोपी देहरादून की सुधोवाला जेल में बंद हैं।
यह मामला कब और कैसे दर्ज हुआ?
नैनीताल उच्च न्यायालय के 17 अक्टूबर 2025 के आदेश के अनुपालन में सीबीआई की ACB, देहरादून ने 26 नवंबर 2025 को LUCC के पदाधिकारियों और अन्य के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की थी। अदालत के हस्तक्षेप के बाद ही इस मामले की केंद्रीय जांच शुरू हुई।
मुंबई से गिरफ्तार आरोपियों पर क्या आरोप हैं?
जांच के अनुसार, दोनों आरोपियों ने अन्य सह-आरोपियों के साथ मिलकर LUCC की अनियमित जमा योजनाओं के तहत जमाकर्ताओं से एकत्रित धन के संग्रह, प्रबंधन, हेराफेरी और गबन में सक्रिय भूमिका निभाई। रिमांड के बाद उन्हें देहरादून की अदालत में पेश किया जाएगा।
पीड़ित निवेशकों को उनका पैसा कब वापस मिलेगा?
सीबीआई ने आरोपियों की अपराध-आय से अर्जित अचल संपत्तियों का ब्यौरा BUDS अधिनियम के तहत उत्तराखंड सरकार के वित्त सचिव को सौंपा है, जो संपत्ति कुर्की की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं। हालांकि, पीड़ित निवेशकों को मुआवज़ा मिलने की समयसीमा अभी स्पष्ट नहीं है और यह न्यायालय की कार्यवाही पर निर्भर करेगी।
राष्ट्र प्रेस
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