सीबीआई ने उत्तराखंड LUCC चिट फंड घोटाले में मुंबई से 2 मुख्य आरोपी दबोचे, ₹800 करोड़ की धोखाधड़ी
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने 2 जून 2026 को उत्तराखंड के बहुचर्चित LUCC चिट फंड घोटाले में मुंबई से दो मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया। यह गिरफ्तारी वित्तीय अभिलेखों के गहन विश्लेषण, बैंक लेनदेन की जांच और देशभर में व्यापक क्षेत्रीय छानबीन के बाद संभव हुई। इस मामले में 1 लाख से अधिक निवेशकों से कथित तौर पर लगभग ₹800 करोड़ की अवैध वसूली की गई।
मामले की पृष्ठभूमि
उत्तराखंड के नैनीताल उच्च न्यायालय ने 17 अक्टूबर 2025 को पारित आदेश के अनुपालन में सीबीआई की एंटी करप्शन ब्रांच (ACB), देहरादून ने 26 नवंबर 2025 को मेसर्स लोनी अर्बन मल्टी स्टेट क्रेडिट एंड थ्रिफ्ट को-ऑपरेटिव सोसाइटी (LUCC) के पदाधिकारियों और अन्य के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की थी।
यह मामला उत्तराखंड के कई जिलों में फैले निवेशकों को प्रभावित करने वाली अनियमित जमा योजनाओं के संचालन, सार्वजनिक जमा की अवैध वसूली, धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात, आपराधिक षड्यंत्र और धन के दुरुपयोग जैसे गंभीर आरोपों से संबंधित है।
आरोपियों की भूमिका
जांच में सामने आया है कि मुंबई से गिरफ्तार दोनों व्यक्ति LUCC के मुख्य आरोपियों में शामिल हैं। जांच के दौरान एकत्र साक्ष्य यह दर्शाते हैं कि इन्होंने अन्य आरोपियों के साथ मिलकर जमाकर्ताओं से संग्रहित धन के संग्रह, प्रबंधन, हेराफेरी और गबन में सक्रिय भूमिका निभाई।
रिमांड प्राप्त करने के बाद दोनों आरोपियों को देहरादून स्थित न्यायालय के समक्ष पेश किया जाएगा।
पूर्व में हुई गिरफ्तारियाँ
सीबीआई ने इससे पहले 12 और 13 मई 2026 को इस मामले में 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया था। इनमें उत्तराखंड में LUCC के 3 वरिष्ठ सहकारी प्रवर्तक शामिल थे, जो जनता से सक्रिय रूप से जमा राशि एकत्रित कर रहे थे और नकद जमा शाखाओं का प्रबंधन करते थे। ये सभी 5 आरोपी वर्तमान में देहरादून की सुधोवाला जेल में बंद हैं।
संपत्तियों का ब्यौरा और कानूनी कार्रवाई
सीबीआई ने आरोपियों द्वारा अपराध की आय से अर्जित कई अचल संपत्तियों का विवरण भी प्राप्त किया है। यह विवरण BUDS अधिनियम के तहत सक्षम प्राधिकारी — अर्थात उत्तराखंड सरकार के वित्त सचिव — के साथ साझा किया गया है, ताकि संपत्तियों की कुर्की की प्रक्रिया शुरू की जा सके।
आगे क्या होगा
यह गिरफ्तारियाँ सार्वजनिक जमा राशि की अवैध वसूली और गबन के पीछे की बड़ी साजिश का पर्दाफाश करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही हैं। गौरतलब है कि अब तक इस मामले में कुल 7 आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं और जांच अभी जारी है। सीबीआई के सूत्रों के अनुसार, आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियाँ संभव हैं।