11 जुलाई 2026
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एलयूसीसी चिट फंड घोटाला: सीबीआई ने 18 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की, ₹400 करोड़ से अधिक की धोखाधड़ी

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एलयूसीसी चिट फंड घोटाला: सीबीआई ने 18 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की, ₹400 करोड़ से अधिक की धोखाधड़ी

सारांश

उत्तराखंड के एलयूसीसी चिट फंड घोटाले में सीबीआई ने 18 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। एक लाख से अधिक निवेशकों से ₹800 करोड़ जुटाए गए और ₹400 करोड़ से अधिक की धोखाधड़ी का आरोप है। मास्टरमाइंड समीर अग्रवाल और उनकी पत्नी कथित तौर पर विदेश फरार हैं।

मुख्य बातें

सीबीआई ने 10 जुलाई को देहरादून की विशेष अदालत में एलयूसीसी घोटाले में 18 आरोपियों और एक संस्था के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की।
उत्तराखंड में 1 लाख से अधिक निवेशकों से लगभग ₹800 करोड़ जमा कराए गए; कुल कथित धोखाधड़ी ₹400 करोड़ से अधिक ।
मुख्य आरोपी समीर अग्रवाल ने 2016 से 50 से अधिक शाखाओं और मुंबई में 10 शेल कंपनियों के जरिए पोंजी नेटवर्क चलाया।
समीर अग्रवाल और उनकी पत्नी सानिया अग्रवाल कथित तौर पर विदेश फरार; सीबीआई ने नोटिस और सर्कुलर जारी किए।
तीन राज्यों में 39 संपत्तियों की पहचान; 29 संपत्तियों की अस्थायी कुर्की के आदेश जारी।
उत्तराखंड उच्च न्यायालय के आदेश पर 26 नवंबर 2025 को सीबीआई ने मामला दर्ज कर 18 एफआईआर की जांच अपने हाथ में ली थी।

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने उत्तराखंड के बहुचर्चित लोनी अर्बन मल्टी स्टेट क्रेडिट एंड थ्रिफ्ट कोऑपरेटिव सोसायटी (एलयूसीसी) चिट फंड घोटाले में 18 व्यक्तियों और एक संस्था के विरुद्ध 10 जुलाई को देहरादून स्थित बीयूडीएस एक्ट की विशेष अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी है। जांच एजेंसी के अनुसार, इस कथित पोंजी स्कीम में उत्तराखंड के एक लाख से अधिक निवेशकों से लगभग ₹800 करोड़ जमा कराए गए और कुल कथित धोखाधड़ी ₹400 करोड़ से अधिक बताई गई है।

चार्जशीट में कौन-कौन हैं आरोपी

सीबीआई की चार्जशीट में समीर अग्रवाल, शादाब हुसैन, उत्तम कुमार सिंह राजपूत, सानिया अग्रवाल, माया सिंह राजपूत, जितेंद्र सिंह निरंजन, दिनेश सिंह, गिरीश चंद सिंह बिष्ट, उर्मिला बिष्ट, जगमोहन बिष्ट, ममता भंडारी, तरुण कुमार मौर्य, गौरव उर्फ गौरव रोहिल्ला, सुशील कुमार गोखरू, किशनलाल उदयलाल जैन, पंकज कुशल सिंह जैन, राजेंद्र सिंह बिष्ट तथा एलयूसीसी सोसाइटी को आरोपी बनाया गया है। आरोपियों पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी), भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), उत्तराखंड प्रोटेक्शन ऑफ इंटरेस्ट्स ऑफ डिपॉजिटर्स एक्ट और बैनिंग ऑफ अनरेगुलेटेड डिपॉजिट स्कीम्स (बीयूडीएस) एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं।

घोटाले की पृष्ठभूमि और जांच का इतिहास

एलयूसीसी का पंजीकरण वर्ष 2012 में मल्टी स्टेट कोऑपरेटिव सोसायटी के रूप में हुआ था। वर्ष 2016 में समीर अग्रवाल ने सोसायटी का प्रबंधन अपने हाथ में लिया और उत्तराखंड में 50 से अधिक शाखाओं के जरिए कथित तौर पर बिना अनुमति की जमा योजनाएं संचालित कीं। गौरतलब है कि वर्ष 2025 में उत्तराखंड उच्च न्यायालय की नैनीताल पीठ ने राज्यभर में दर्ज सभी संबंधित एफआईआर की जांच सीबीआई को स्थानांतरित करने का आदेश दिया था। इसके बाद सीबीआई ने 26 नवंबर 2025 को मामला दर्ज कर उत्तराखंड के विभिन्न थानों में दर्ज 18 मामलों की जांच अपने हाथ में ली।

पोंजी स्कीम का तंत्र: कैसे हुई ठगी

सीबीआई का आरोप है कि सोसायटी के पास कोई वास्तविक लाभकारी व्यवसाय नहीं था। पुराने निवेशकों को भुगतान नए निवेशकों से जुटाई गई राशि से किया जाता था — जो कि एक क्लासिक पोंजी स्कीम का ढांचा है। एजेंसी के अनुसार, समीर अग्रवाल इस पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड था। उसने अपने सहयोगियों किशनलाल उदयलाल जैन और पंकज कुशल सिंह जैन के साथ मिलकर मुंबई में 10 शेल कंपनियों के बैंक खाते खुलवाए, जिनके जरिए निवेशकों की राशि विभिन्न खातों में स्थानांतरित कर उसका दुरुपयोग किया गया।

फरार आरोपी और संपत्तियों की कुर्की

जांच में सामने आया है कि समीर अग्रवाल और उनकी पत्नी सानिया अग्रवाल कथित तौर पर विदेश भाग चुके हैं। उन्हें वापस लाने के लिए सीबीआई ने आवश्यक नोटिस और सर्कुलर जारी किए हैं। एजेंसी ने उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में आरोपियों से जुड़ी 39 संपत्तियों की पहचान की है। इनमें से 29 संपत्तियों की अस्थायी कुर्की के आदेश सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी किए जा चुके हैं, जबकि शेष पर कार्रवाई जारी है।

आगे क्या होगा

यह मामला अब विशेष अदालत में विचाराधीन है। एक लाख से अधिक पीड़ित निवेशकों की निगाहें न्यायिक प्रक्रिया और फरार आरोपियों की वापसी पर टिकी हैं। सीबीआई की विशेष टीम शेष संपत्तियों की कुर्की और अंतरराष्ट्रीय प्रत्यर्पण प्रक्रिया पर समानांतर काम कर रही है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एलयूसीसी चिट फंड घोटाला क्या है?
एलयूसीसी यानी लोनी अर्बन मल्टी स्टेट क्रेडिट एंड थ्रिफ्ट कोऑपरेटिव सोसायटी उत्तराखंड में संचालित एक कथित पोंजी स्कीम है, जिसमें एक लाख से अधिक निवेशकों से ऊंचे रिटर्न का वादा कर लगभग ₹800 करोड़ जमा कराए गए। सीबीआई के अनुसार, कुल कथित धोखाधड़ी ₹400 करोड़ से अधिक की है।
सीबीआई ने इस मामले में चार्जशीट कब और कहाँ दाखिल की?
सीबीआई ने 10 जुलाई को देहरादून स्थित बीयूडीएस एक्ट की विशेष अदालत में 18 व्यक्तियों और एलयूसीसी सोसाइटी के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। जांच एजेंसी ने उत्तराखंड उच्च न्यायालय के आदेश पर 26 नवंबर 2025 को मामला दर्ज किया था।
इस घोटाले का मास्टरमाइंड कौन है और वह अभी कहाँ है?
सीबीआई के अनुसार, समीर अग्रवाल इस पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड है, जिसने 2016 से सोसायटी का प्रबंधन संभाला और शेल कंपनियों के जरिए धन का दुरुपयोग किया। जांच में सामने आया है कि समीर अग्रवाल और उनकी पत्नी सानिया अग्रवाल कथित तौर पर विदेश फरार हैं और उनके खिलाफ नोटिस व सर्कुलर जारी किए गए हैं।
पीड़ित निवेशकों की संपत्ति वापसी के लिए क्या कदम उठाए गए हैं?
सीबीआई ने उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में आरोपियों से जुड़ी 39 संपत्तियों की पहचान की है। इनमें से 29 संपत्तियों की अस्थायी कुर्की के आदेश जारी हो चुके हैं और शेष पर कार्रवाई जारी है।
आरोपियों पर कौन-कौन से कानूनी प्रावधानों के तहत आरोप लगाए गए हैं?
चार्जशीट में आरोपियों पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी), भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), उत्तराखंड प्रोटेक्शन ऑफ इंटरेस्ट्स ऑफ डिपॉजिटर्स एक्ट और बैनिंग ऑफ अनरेगुलेटेड डिपॉजिट स्कीम्स (बीयूडीएस) एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं।
राष्ट्र प्रेस
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