लॉजिक्स सिटी डेवलपर्स होमबायर्स फ्रॉड: सीबीआई ने ICICI-HDFC अधिकारियों के खिलाफ 8वीं चार्जशीट दाखिल की

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लॉजिक्स सिटी डेवलपर्स होमबायर्स फ्रॉड: सीबीआई ने ICICI-HDFC अधिकारियों के खिलाफ 8वीं चार्जशीट दाखिल की

सारांश

सीबीआई ने नोएडा हाउसिंग फ्रॉड में 8वीं चार्जशीट दाखिल कर बिल्डर-बैंक गठजोड़ का पर्दाफाश किया है। लॉजिक्स सिटी डेवलपर्स के निदेशकों के साथ ICICI और HDFC बैंक के अधिकारी भी आरोपी हैं। सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर चल रही इस जांच में हजारों घर खरीदारों की ठगी के व्यापक साक्ष्य सामने आए हैं।

मुख्य बातें

सीबीआई ने 12 मई 2026 को लॉजिक्स सिटी डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड और बैंक अधिकारियों के खिलाफ 8वीं चार्जशीट दाखिल की।
आईसीआईसीआई बैंक और एचडीएफसी बैंक के अधिकारियों पर बिल्डर की अवैध गतिविधियों को बढ़ावा देने का आरोप।
चार्जशीट में आपराधिक साजिश , धोखाधड़ी , आपराधिक विश्वासघात और भ्रष्टाचार के आरोप शामिल।
सीबीआई देशभर में सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर लगभग 50 मामलों की जांच कर रही है।
मामला उत्तर प्रदेश के नोएडा के एक हाउसिंग प्रोजेक्ट से जुड़ा है जिसमें घर खरीदारों और वित्तीय संस्थानों को भारी नुकसान हुआ।

केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने 12 मई 2026 को नोएडा के एक बड़े हाउसिंग धोखाधड़ी मामले में 8वीं चार्जशीट दाखिल की, जिसमें एम/एस लॉजिक्स सिटी डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड के निदेशकों के साथ-साथ आईसीआईसीआई बैंक और एचडीएफसी बैंक के अधिकारियों को आरोपी बनाया गया है। यह मामला उत्तर प्रदेश के नोएडा में एक हाउसिंग प्रोजेक्ट से जुड़ा है, जिसमें आम घर खरीदारों और वित्तीय संस्थानों को भारी आर्थिक नुकसान पहुंचाने का आरोप है।

मामले का पूरा घटनाक्रम

जांच में सामने आया है कि लॉजिक्स सिटी डेवलपर्स के निदेशकों ने कथित तौर पर अन्य व्यक्तियों और सरकारी अधिकारियों के साथ मिलकर एक सुनियोजित साजिश रची। घर खरीदारों और निवेशकों को झूठे वादों और भ्रामक जानकारी के आधार पर निवेश के लिए प्रेरित किया गया, जिससे बिल्डर को अवैध आर्थिक लाभ मिला।

जांच एजेंसी के अनुसार, कुछ बैंक अधिकारियों ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए बिल्डर की अवैध गतिविधियों को नियमों के विरुद्ध जाकर बढ़ावा दिया। इससे बिल्डर को अनुचित लाभ मिला, जबकि बैंकों और घर खरीदारों को सीधा वित्तीय नुकसान उठाना पड़ा।

चार्जशीट में लगाए गए आरोप

सीबीआई ने यह चार्जशीट भारतीय दंड संहिता और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत दाखिल की है। इसमें शामिल प्रमुख आरोप हैं:

आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात और भ्रष्टाचार। जांच एजेंसी ने बताया कि मामले में बड़े पैमाने पर दस्तावेजी और मौखिक साक्ष्य एकत्र किए गए हैं, जो एक व्यापक साजिश, धन के दुरुपयोग और घर खरीदारों के साथ ठगी की ओर स्पष्ट रूप से इशारा करते हैं।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर चल रही व्यापक जांच

गौरतलब है कि सीबीआई इस समय देशभर में लगभग 50 मामलों की जांच कर रही है, जो सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के तहत दर्ज किए गए हैं। ये मामले विभिन्न बिल्डरों और वित्तीय संस्थानों के अधिकारियों से जुड़े हैं, जिन पर होमबायर्स के साथ धोखाधड़ी और फंड डायवर्जन के आरोप हैं। यह ऐसे समय में आया है जब रियल एस्टेट क्षेत्र में घर खरीदारों की सुरक्षा को लेकर न्यायपालिका पहले से ही सख्त रुख अपनाए हुए है।

आम घर खरीदारों पर असर

इस मामले में सबसे अधिक प्रभावित वे मध्यमवर्गीय परिवार हैं जिन्होंने अपनी जीवनभर की बचत इस हाउसिंग प्रोजेक्ट में लगाई थी। कथित तौर पर उन्हें न तो समय पर मकान मिले और न ही उनका निवेश सुरक्षित रहा। इससे पहले भी सीबीआई ने इसी तरह के मामलों में कई बिल्डरों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की हैं, लेकिन यह 8वीं चार्जशीट बिल्डर-बैंक गठजोड़ की गहराई को उजागर करने के लिहाज़ से विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

आने वाले दिनों में इस मामले में अदालती सुनवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ने की संभावना है, और सीबीआई की जांच अभी भी जारी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि भारत के रियल एस्टेट क्षेत्र की उस प्रणालीगत बीमारी का प्रमाण है जहाँ बैंक, बिल्डर और कभी-कभी सरकारी अधिकारी मिलकर आम घर खरीदार को निशाना बनाते हैं। सवाल यह है कि जब सर्वोच्च न्यायालय को स्वयं 50 मामलों की निगरानी करनी पड़ रही है, तो नियामक तंत्र — चाहे वह रेरा हो या बैंकिंग नियामक — कहाँ विफल रहा? बैंक अधिकारियों का इस षड्यंत्र में शामिल होना विशेष रूप से चिंताजनक है, क्योंकि इससे उस विश्वास की नींव हिलती है जो आम नागरिक वित्तीय संस्थानों में रखता है। जब तक दोषसिद्धि की दर नहीं बढ़ती और पीड़ितों को वास्तविक मुआवज़ा नहीं मिलता, तब तक चार्जशीट की संख्या बढ़ती रहेगी — न्याय नहीं।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीबीआई ने लॉजिक्स सिटी डेवलपर्स के खिलाफ 8वीं चार्जशीट में क्या आरोप लगाए हैं?
सीबीआई ने भारतीय दंड संहिता और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं। इसमें बिल्डर के निदेशकों के साथ-साथ ICICI और HDFC बैंक के अधिकारियों को भी आरोपी बनाया गया है।
इस मामले में ICICI और HDFC बैंक के अधिकारियों की क्या भूमिका बताई गई है?
जांच के अनुसार, इन बैंकों के कुछ अधिकारियों ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए बिल्डर की अवैध गतिविधियों को नियमों के विरुद्ध जाकर बढ़ावा दिया। इससे बिल्डर को अनुचित लाभ मिला और बैंकों तथा घर खरीदारों को वित्तीय नुकसान उठाना पड़ा।
सीबीआई होमबायर्स फ्रॉड के कितने मामलों की जांच कर रही है?
सीबीआई इस समय देशभर में सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के तहत दर्ज लगभग 50 मामलों की जांच कर रही है। ये मामले विभिन्न बिल्डरों और वित्तीय संस्थानों के अधिकारियों से जुड़े हैं।
नोएडा हाउसिंग फ्रॉड में घर खरीदारों को किस तरह का नुकसान हुआ?
कथित तौर पर घर खरीदारों और निवेशकों को झूठे वादों और भ्रामक जानकारी के आधार पर निवेश के लिए प्रेरित किया गया। उन्हें न समय पर मकान मिले और न ही उनका निवेश सुरक्षित रहा, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान हुआ।
इस मामले में आगे क्या होगा?
आने वाले दिनों में अदालती सुनवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ने की संभावना है। सीबीआई की जांच अभी जारी है और मामले में दस्तावेजी व मौखिक दोनों तरह के साक्ष्य एकत्र किए जा चुके हैं।
राष्ट्र प्रेस