सीबीआई ने घर खरीद धोखाधड़ी मामले में एवीजे डेवलपर्स, बैंक अधिकारियों और सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया

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सीबीआई ने घर खरीद धोखाधड़ी मामले में एवीजे डेवलपर्स, बैंक अधिकारियों और सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया

सारांश

सीबीआई ने एवीजे डेवलपर्स और केसर बिल्डर्स के निदेशकों, तीन बैंकों के अधिकारियों और फर्जी घर खरीदारों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया है। सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर चल रही इस जांच में बड़े पैमाने पर आधिकारिक पद के दुरुपयोग और धन गबन के साक्ष्य मिले हैं।

मुख्य बातें

सीबीआई ने 6 मई 2026 को मेसर्स एवीजे डेवलपर्स और मेसर्स केसर बिल्डर्स के निदेशकों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया।
बैंक ऑफ इंडिया , आईसीआईसीआई बैंक और यूको बैंक के अधिकारियों को भी आरोपी बनाया गया है।
फर्जी घर खरीदारों ने बिल्डर के साथ मिलकर वित्तीय संस्थानों से होम लोन हासिल किए — इन पर भी आरोप पत्र दाखिल।
सरकारी कर्मचारियों ने कथित तौर पर आधिकारिक पद का दुरुपयोग कर बिल्डर के अवैध कृत्यों को सुगम बनाया।
सीबीआई सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर देश भर में 50 ऐसे मामलों की जांच कर रही है।
इससे पहले रुद्र बिल्डवेल , ड्रीम प्रोकॉन और जयपी इंफ्राटेक के खिलाफ 3 मामलों में आरोप पत्र दाखिल हो चुके हैं।

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने 6 मई 2026 को घर खरीदारों के साथ बड़े पैमाने पर की गई धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश के एक गंभीर मामले में नई दिल्ली की एक न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया है। इस आरोप पत्र में मेसर्स एवीजे डेवलपर्स (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड, मेसर्स एवीजे डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड, मेसर्स केसर बिल्डर्स प्राइवेट लिमिटेड के निदेशकों के साथ-साथ बैंक ऑफ इंडिया, आईसीआईसीआई बैंक और यूको बैंक के अधिकारियों तथा फर्जी घर खरीदारों (प्रॉक्सी बायर्स) को भी आरोपी बनाया गया है। जांच एजेंसी के अनुसार इस साजिश से वित्तीय संस्थानों और निर्दोष घर खरीदारों को भारी नुकसान पहुँचा है।

मुख्य घटनाक्रम

सीबीआई की जांच में सामने आया कि आरोपी बिल्डर कंपनियों के निदेशकों ने सरकारी कर्मचारियों और अन्य व्यक्तियों के साथ मिलकर एक सुनियोजित षड्यंत्र रचा। कथित तौर पर झूठे आश्वासनों और भ्रामक प्रस्तुतियों के ज़रिये घर खरीदारों और निवेशकों को गुमराह किया गया और अवैध साधनों से वित्तीय लाभ अर्जित किया गया।

जांच के दौरान यह भी उजागर हुआ कि कुछ व्यक्तियों ने फर्जी घर खरीदारों के रूप में काम करते हुए बिल्डर के साथ मिलीभगत की और वित्तीय संस्थानों के समक्ष तथ्यों को गलत तरीके से प्रस्तुत करके होम लोन हासिल किए। इससे बिल्डर कंपनी को अनुचित आर्थिक लाभ हुआ, जबकि संबंधित बैंकों को नुकसान उठाना पड़ा।

सरकारी कर्मचारियों की भूमिका

सीबीआई के अनुसार आरोपी सरकारी कर्मचारियों ने नियमों और प्रक्रियाओं का खुला उल्लंघन करते हुए अपने आधिकारिक पद का दुरुपयोग किया। इन कर्मचारियों ने बिल्डर के अवैध कृत्यों को सुगम बनाने में सहायता की, जिससे बिल्डर कंपनी को अनुचित लाभ मिला और वित्तीय संस्थानों एवं घर खरीदारों को नुकसान हुआ।

मेसर्स केसर बिल्डर्स प्राइवेट लिमिटेड को मुख्य बिल्डर की सहयोगी कंपनी बताया गया है, जिसका उपयोग कथित तौर पर धन के हस्तांतरण के लिए किया जाता था।

साक्ष्य और जांच का दायरा

सीबीआई की जांच में पर्याप्त दस्तावेजी और मौखिक साक्ष्य प्राप्त हुए हैं, जो एक बड़ी आपराधिक साजिश के अस्तित्व की ओर संकेत करते हैं। इस साजिश में आधिकारिक पद का दुरुपयोग, धन का गबन-दुरुपयोग और घर खरीदारों के साथ धोखाधड़ीपूर्ण आचरण शामिल है।

गौरतलब है कि सीबीआई वर्तमान में सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में देश भर के विभिन्न बिल्डरों और वित्तीय संस्थानों के अज्ञात अधिकारियों के खिलाफ दर्ज 50 मामलों की जांच कर रही है।

पहले भी दाखिल हो चुके हैं आरोप पत्र

यह ऐसा पहला मामला नहीं है। सीबीआई इससे पहले मेसर्स रुद्र बिल्डवेल कंस्ट्रक्शंस प्राइवेट लिमिटेड, मेसर्स ड्रीम प्रोकॉन प्राइवेट लिमिटेड और मेसर्स जयपी इंफ्राटेक लिमिटेड तथा उनके निदेशकों के खिलाफ आपराधिक साजिश और धोखाधड़ी के 3 मामलों में आरोप पत्र दाखिल कर चुकी है। यह व्यापक जांच अभियान रियल एस्टेट क्षेत्र में बैंकिंग धोखाधड़ी और घर खरीदारों के शोषण पर सर्वोच्च न्यायालय की सक्रिय निगरानी का परिणाम है।

आगे क्या होगा

आरोप पत्र दाखिल होने के बाद अब न्यायालय में आरोपों पर सुनवाई की प्रक्रिया शुरू होगी। सीबीआई के अनुसार जांच अभी भी जारी है और अन्य अज्ञात आरोपियों की पहचान की कोशिश की जा रही है। यह मामला रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही की बड़ी लड़ाई का हिस्सा बनता जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बैंक अधिकारी और सरकारी कर्मचारी मिलकर आम घर खरीदारों को ठगते रहे। असली सवाल यह है कि जब इतने व्यापक दस्तावेजी साक्ष्य मौजूद थे, तो नियामक तंत्र इतने वर्षों तक मूकदर्शक क्यों बना रहा। आरोप पत्र दाखिल होना न्याय की दिशा में एक कदम है, लेकिन पीड़ित घर खरीदारों को वास्तविक राहत तभी मिलेगी जब मुकदमे तेज़ गति से चलें और दोषियों की संपत्तियाँ ज़ब्त होकर मुआवज़े में बदलें।
RashtraPress
14 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीबीआई ने इस घर खरीद धोखाधड़ी मामले में किन पर आरोप पत्र दाखिल किया है?
सीबीआई ने मेसर्स एवीजे डेवलपर्स (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड, मेसर्स एवीजे डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड और मेसर्स केसर बिल्डर्स प्राइवेट लिमिटेड के निदेशकों, बैंक ऑफ इंडिया, आईसीआईसीआई बैंक और यूको बैंक के अधिकारियों, सरकारी कर्मचारियों तथा फर्जी घर खरीदारों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया है। इन सभी पर आपराधिक साजिश और धोखाधड़ी के आरोप हैं।
मेसर्स केसर बिल्डर्स की इस मामले में क्या भूमिका है?
मेसर्स केसर बिल्डर्स प्राइवेट लिमिटेड मुख्य बिल्डर की सहयोगी कंपनी है। सीबीआई के अनुसार इस कंपनी का उपयोग कथित तौर पर धन के हस्तांतरण के लिए किया जाता था, जिससे साजिश को अंजाम देने में मदद मिली।
फर्जी घर खरीदारों ने क्या किया?
कुछ व्यक्तियों ने फर्जी घर खरीदारों के रूप में काम करते हुए बिल्डर के साथ मिलीभगत की और वित्तीय संस्थानों के समक्ष तथ्यों को गलत तरीके से प्रस्तुत करके होम लोन हासिल किए। इससे बिल्डर को आर्थिक लाभ हुआ और बैंकों को नुकसान पहुँचा।
सीबीआई इस मामले की जांच क्यों कर रही है?
सीबीआई सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में देश भर के विभिन्न बिल्डरों और वित्तीय संस्थानों के अधिकारियों के खिलाफ दर्ज 50 मामलों की जांच कर रही है। यह जांच रियल एस्टेट क्षेत्र में घर खरीदारों के शोषण और बैंकिंग धोखाधड़ी पर न्यायालय की सक्रिय निगरानी का हिस्सा है।
इससे पहले सीबीआई ने किन बिल्डरों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किए हैं?
सीबीआई इससे पहले मेसर्स रुद्र बिल्डवेल कंस्ट्रक्शंस प्राइवेट लिमिटेड, मेसर्स ड्रीम प्रोकॉन प्राइवेट लिमिटेड और मेसर्स जयपी इंफ्राटेक लिमिटेड तथा उनके निदेशकों के खिलाफ आपराधिक साजिश और धोखाधड़ी के 3 मामलों में आरोप पत्र दाखिल कर चुकी है।
राष्ट्र प्रेस
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