'ऑपरेशन रिजीम चेंज' पर सियासत तेज, CM धामी बोले — देश को अस्थिर करने की साजिश बर्दाश्त नहीं
सारांश
मुख्य बातें
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 3 नवंबर 2026 को भारतीय जनता पार्टी (BJP) के 'ऑपरेशन रिजीम चेंज' स्टिंग ऑपरेशन विवाद पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की आड़ में देश की संवैधानिक संस्थाओं को अस्थिर करने की किसी भी कोशिश को सहन नहीं किया जाएगा। धामी ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर BJP के आधिकारिक हैंडल की पोस्ट को रिपोस्ट करते हुए साजिशकर्ताओं पर सीधा निशाना साधा। इस स्टिंग को लेकर देहरादून से लेकर नई दिल्ली तक सियासी तापमान तेज़ी से बढ़ा है।
धामी का बयान — क्या कहा मुख्यमंत्री ने
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपनी रिपोस्ट में लिखा, 'लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर देश की शांति, सामाजिक सौहार्द और संवैधानिक संस्थाओं को अस्थिर करने की किसी भी साजिश को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।' उन्होंने आगे कहा कि 'ऑपरेशन रिजीम चेंज' स्टिंग में राष्ट्र में अशांति फैलाने के कई गंभीर पहलुओं को उजागर किया गया है।
धामी ने यह भी जोड़ा कि विरोध के नाम पर अराजकता फैलाने, पुलिस की छवि धूमिल करने और लोकतांत्रिक व्यवस्था को बदनाम करने की कोशिशों का पर्दाफाश होना ज़रूरी है। उनके अनुसार, देश की एकता, अखंडता और लोकतांत्रिक मर्यादाओं से खिलवाड़ करने वालों को कानून के दायरे में जवाबदेह बनाया जाना चाहिए।
BJP का आरोप — स्टिंग में क्या उजागर हुआ
इससे पहले भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर एक वीडियो पोस्ट साझा किया था, जिसमें 'ऑपरेशन रिजीम चेंज' को 'देश को सुलगाने वाली साजिश का सबसे बड़ा बेनकाब' बताया गया। पार्टी ने कथित तौर पर दावा किया कि स्टिंग में शाफवान कुड्डकन नामक व्यक्ति की संलिप्तता सामने आई है।
BJP के आरोपों के अनुसार, स्टिंग में स्पष्ट सुना जा सकता है कि किस प्रकार महिलाओं को ढाल बनाकर दिल्ली पुलिस की छवि खराब करने, निर्वाचित सरकार को बदनाम करने और देश में अराजकता फैलाने के लिए 'टूल किट' तैयार किया गया। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब विपक्षी दलों और नागरिक समाज के बीच राजनीतिक तनाव पहले से ऊँचाई पर है।
राजनीतिक संदर्भ — क्यों अहम है यह विवाद
यह पहली बार नहीं है जब 'टूल किट' और 'स्टिंग ऑपरेशन' जैसे शब्द भारतीय राजनीति में तीखी बहस का केंद्र बने हों। इससे पहले भी ऐसे कई विवाद सामने आ चुके हैं जिनमें सत्तारूढ़ दल और विपक्ष एक-दूसरे पर देशविरोधी गतिविधियों के आरोप लगाते रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि इस तरह की बयानबाज़ी अक्सर राजनीतिक लाभ के लिए की जाती है और इसके तथ्यात्मक आधार की स्वतंत्र पड़ताल ज़रूरी है।
यह भी उल्लेखनीय है कि स्टिंग ऑपरेशन की विश्वसनीयता और उसमें सामने आए कथित तथ्यों की न्यायिक या स्वतंत्र जाँच एजेंसी द्वारा अभी तक पुष्टि नहीं की गई है। ऐसे में स्रोत और संदर्भ को लेकर सतर्क दृष्टिकोण आवश्यक है।
आगे क्या होगा
BJP ने संकेत दिया है कि वह इस मामले को और व्यापक रूप से उठाएगी। इस विवाद पर विपक्षी दलों की आधिकारिक प्रतिक्रिया का अभी इंतज़ार है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 'ऑपरेशन रिजीम चेंज' का यह विवाद आने वाले दिनों में संसद और राज्य विधानसभाओं में भी गूँज सकता है।