कोलकाता के सॉल्ट लेक में राहुल गांधी के 'संसद में सोते' पोस्टर, किसी ने नहीं ली जिम्मेदारी
सारांश
मुख्य बातें
कोलकाता के उत्तरी बाहरी इलाके सॉल्ट लेक में मंगलवार, 3 नवंबर 2026 को कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की तस्वीरों वाले पोस्टर लगे पाए गए, जिनमें उन्हें संसद सत्र के दौरान झपकी लेते हुए दर्शाया गया है। अब तक किसी भी व्यक्ति या संगठन ने इन पोस्टरों को लगाने की जिम्मेदारी नहीं ली है।
पोस्टरों का स्वरूप और संदेश
इन पोस्टरों में राहुल गांधी की दो अलग-अलग तस्वीरें थीं। पहली तस्वीर में वे संसद सत्र के दौरान अपने गालों पर हाथ रखे और आंखें बंद किए बैठे दिखाई दे रहे हैं। दूसरी तस्वीर में वे सदन के भीतर सीट पर हाथ रखे लेटे हुए नज़र आ रहे हैं।
पोस्टरों पर 'देश का नेता ऐसा हो?' का नारा लिखा गया था। इन तस्वीरों के ज़रिए यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि विपक्ष के नेता सदन की कार्यवाही के दौरान सो रहे थे। हालाँकि, इन छायाचित्रों का मूल संदर्भ और सत्यापन स्वतंत्र रूप से नहीं किया जा सका है।
राजनीतिक पृष्ठभूमि
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब राहुल गांधी नई दिल्ली में एक बड़े आंदोलन का नेतृत्व कर रहे हैं। इस आंदोलन में देश भर के विपक्षी दलों को एकजुट कर मतदाता सूचियों के विशेष गहन संशोधन (SIR) के खिलाफ प्रदर्शन किया जा रहा है, साथ ही मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग भी उठाई गई है।
दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता मिटाओ' नारे के साथ देश भर में एक जवाबी अभियान छेड़ा है। यह पोस्टर अभियान उसी व्यापक राजनीतिक टकराव का हिस्सा माना जा रहा है।
कोलकाता और सिलीगुड़ी में BJP की रैलियाँ
सोमवार को कोलकाता में BJP ने एक बड़ी रैली का आयोजन किया, जिसका नेतृत्व BJP अध्यक्ष नितिन नवीन ने किया। रैली को संबोधित करते हुए नवीन ने कहा कि जिस प्रकार पश्चिम बंगाल ने इस वर्ष की शुरुआत में विधानसभा चुनावों में तृणमूल कांग्रेस (TMC) और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के शासन से मुक्ति पाई, उसी तरह दिल्ली को भी राहुल गांधी से शीघ्र मुक्त करने की ज़रूरत है।
मंगलवार को दार्जिलिंग जिले के सिलीगुड़ी में भी इसी तर्ज पर एक रैली आयोजित की गई, जिसका नेतृत्व पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने किया।
जिम्मेदारी अस्पष्ट, जाँच जारी
स्थानीय प्रशासन के अनुसार, अभी तक यह निर्धारित नहीं हो पाया है कि ये पोस्टर किस संगठन या व्यक्ति ने लगाए। न तो BJP ने और न किसी अन्य दल ने इन्हें लगाने की आधिकारिक जिम्मेदारी स्वीकार की है। गौरतलब है कि देश में राजनीतिक तनाव बढ़ने के बीच इस प्रकार के अनाम पोस्टर अभियान नई परिघटना नहीं हैं।
आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या स्थानीय पुलिस पोस्टर लगाने वालों की पहचान करती है और क्या कांग्रेस की ओर से कोई औपचारिक शिकायत दर्ज कराई जाती है।