ईडी ने लील इलेक्ट्रिकल्स और प्रमोटर भारत राज पुंज की ₹112.90 करोड़ की 22 संपत्तियाँ कुर्क कीं
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के जयपुर जोनल कार्यालय ने 7 जुलाई 2026 को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए एम/एस लील इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (पूर्व में लॉयड इलेक्ट्रिक एंड इंजीनियरिंग लिमिटेड), उसके प्रमुख प्रमोटर भारत राज पुंज और अन्य संबंधित व्यक्तियों की ₹112.90 करोड़ मूल्य की 22 चल और अचल संपत्तियाँ अस्थायी रूप से कुर्क की हैं। यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत की गई है।
कुर्क संपत्तियों का विवरण
कुर्क की गई संपत्तियों में दिल्ली, उत्तराखंड, गुजरात, मध्य प्रदेश, तेलंगाना, गोवा, महाराष्ट्र और तमिलनाडु में स्थित भूमि, औद्योगिक भूखंड और आवासीय संपत्तियाँ शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, अमेरिका के टेक्सास राज्य के ह्यूस्टन शहर में स्थित एक आवासीय संपत्ति भी अटैच की गई है, जो कथित तौर पर भारत राज पुंज और उनकी पत्नी पूजा पुंज के संयुक्त स्वामित्व में है।
ईडी ने बैंक खातों में जमा राशि, फिक्स्ड डिपॉजिट और म्यूचुअल फंड निवेशों को भी कुर्क किया है। जाँच एजेंसी के अनुसार, ये संपत्तियाँ प्रमोटर परिवार के स्वामित्व और नियंत्रण में थीं तथा अपराध से अर्जित धन को छिपाने के लिए संबंधित कंपनियों और शेल संस्थाओं के माध्यम से रखी गई थीं।
मामले की पृष्ठभूमि
ईडी ने यह जाँच केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की थी। सीबीआई ने कंपनी, उसके प्रमोटरों और वरिष्ठ अधिकारियों के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया था।
सीबीआई की एफआईआर और बाद में दाखिल आरोपपत्र के अनुसार, कंपनी के प्रमोटरों और शीर्ष प्रबंधन ने मिलकर भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के नेतृत्व वाले बैंकों के एक समूह को धोखा देने की साजिश रची। इसके लिए कथित तौर पर फर्जी और हेरफेर किए गए वित्तीय दस्तावेज प्रस्तुत किए गए, जिससे SBI और IDBI बैंक को करीब ₹376 करोड़ का नुकसान हुआ।
कथित वित्तीय हेरफेर
ईडी की जाँच में सामने आया कि आरोपियों ने कंपनी के वित्तीय रिकॉर्ड में हेरफेर कर बैंक फंड की कथित हेराफेरी की। कंपनी की बैलेंस शीट में संपत्तियों, स्टॉक और प्राप्तियों का मूल्य बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया गया, ताकि कंपनी की वित्तीय स्थिति मज़बूत दिखे और बैंकों से लगातार ऋण सुविधाएँ मिलती रहें।
जाँच में यह भी पता चला कि बैंकों से प्राप्त धनराशि को प्रमोटरों के नियंत्रण वाली कंपनियों और संबंधित संस्थाओं के जरिए इधर-उधर भेजा गया। निवेश और ऋण के नाम पर रकम विदेशों में स्थित सहायक कंपनियों को भी ट्रांसफर की गई।
विदेशी संपत्तियाँ और परिवार की भूमिका
ईडी के अनुसार, विदेशों में मौजूद कई सहायक कंपनियों का पूरा नियंत्रण भारत राज पुंज के पास था। बड़ी मात्रा में धनराशि इन विदेशी कंपनियों के माध्यम से भारत से बाहर भेजी गई और उसका बड़ा हिस्सा वापस नहीं आया। यह भी दावा किया गया है कि कुछ संपत्तियाँ बाद में बेच दी गईं और उससे प्राप्त धन का उपयोग प्रमोटर परिवार के निजी एवं व्यावसायिक खर्चों के लिए किया गया — जिसमें भारत राज पुंज की माँ रेणु पुंज को किए गए भुगतान भी शामिल हैं।
आगे क्या होगा
यह कुर्की अस्थायी है और PMLA के तहत न्यायनिर्णायक प्राधिकरण द्वारा इसकी पुष्टि अपेक्षित है। गौरतलब है कि ईडी की यह कार्रवाई उस समय आई है जब बैंक धोखाधड़ी मामलों में केंद्रीय एजेंसियों की सक्रियता लगातार बढ़ रही है। इस मामले में आगे की जाँच जारी है।