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केरल सरकार ने अच्युतानंदन के बेटे वीए अरुण कुमार को आईएचआरडी निदेशक पद से हटाया, प्रो. एमवी राजेश नए निदेशक

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केरल सरकार ने अच्युतानंदन के बेटे वीए अरुण कुमार को आईएचआरडी निदेशक पद से हटाया, प्रो. एमवी राजेश नए निदेशक

सारांश

केरल सरकार ने पूर्व मुख्यमंत्री वीएस अच्युतानंदन के बेटे वीए अरुण कुमार को आईएचआरडी निदेशक पद से हटा दिया — यूजीसी पात्रता मानकों और राजनीतिक प्रभाव को लेकर हाईकोर्ट की जांच के बाद। प्रो. एमवी राजेश नए निदेशक होंगे।

मुख्य बातें

केरल सरकार ने 7 जुलाई 2026 को वीए अरुण कुमार को आईएचआरडी के निदेशक पद से हटाया।
अरुण कुमार पूर्व मुख्यमंत्री वीएस अच्युतानंदन के पुत्र हैं और पिछले तीन वर्षों से निदेशक-प्रभारी थे।
आईएचआरडी कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, पूंजार के प्राचार्य प्रो.
एमवी राजेश नए निदेशक नियुक्त किए गए।
केरल उच्च न्यायालय ने पात्रता जांच के आदेश दिए थे; 2018 के यूजीसी नियमों के तहत इस पद के लिए सात वर्ष का शिक्षण अनुभव अनिवार्य है।
हाईकोर्ट ने राजनीतिक प्रभाव की भूमिका की जांच का भी निर्देश दिया था।
पूर्व में विजिलेंस जांच और अदालत ने अरुण कुमार को क्लीन चिट दी थी।

केरल सरकार ने 7 जुलाई 2026 को पूर्व मुख्यमंत्री वीएस अच्युतानंदन के पुत्र वीए अरुण कुमार को इंस्टीट्यूट ऑफ ह्यूमन रिसोर्सेज डेवलपमेंट (आईएचआरडी) के निदेशक पद से हटा दिया। अरुण कुमार की पात्रता को लेकर लंबे समय से चली आ रही कानूनी और प्रशासनिक जांच के बाद यह निर्णय लिया गया है।

नई नियुक्ति

सरकार ने आईएचआरडी कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, पूंजार के प्राचार्य प्रो. एमवी राजेश को संस्थान का नया निदेशक नियुक्त किया है। प्रो. राजेश स्वयं आईएचआरडी के पूर्व छात्र हैं। अरुण कुमार पिछले तीन वर्षों से निदेशक-प्रभारी के रूप में कार्यरत थे।

पात्रता विवाद और हाईकोर्ट की भूमिका

अरुण कुमार की नियुक्ति के समय से ही उनकी शैक्षणिक योग्यता और पात्रता को लेकर व्यापक आलोचना होती रही थी। इस संदर्भ में केरल उच्च न्यायालय में कई याचिकाएं दाखिल की गई थीं। स्वतः संज्ञान लेते हुए अदालत ने पिछले वर्ष जून में उनकी पात्रता की जांच के आदेश दिए थे।

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया था कि आईएचआरडी निदेशक का पद विश्वविद्यालय के कुलपति (वाइस चांसलर) के समकक्ष माना जाता है। अदालत ने यह भी रेखांकित किया था कि 2018 के विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) नियमों के तहत इस पद के लिए कम से कम सात वर्ष का शिक्षण अनुभव अनिवार्य है। अदालत ने संदेह व्यक्त किया था कि अरुण कुमार इन मानकों को पूरा करते हैं या नहीं।

यह टिप्पणियां डॉ. विनु थॉमस की याचिका पर सुनवाई के दौरान की गई थीं। डॉ. थॉमस पूर्व में त्रिक्काकरा स्थित मॉडल इंजीनियरिंग कॉलेज के प्राचार्य रह चुके हैं और वर्तमान में केरल तकनीकी विश्वविद्यालय में डीन के पद पर हैं।

राजनीतिक प्रभाव की जांच

हाईकोर्ट ने यह भी निर्देश दिया था कि जांच में इस पहलू को शामिल किया जाए कि क्या नियुक्ति में राजनीतिक प्रभाव की कोई भूमिका रही। अदालत ने टिप्पणी की थी कि किसी ऐसे व्यक्ति को — जो पहले लिपिकीय (क्लेरिकल) पद पर कार्य कर चुका हो — कुलपति के समकक्ष पद पर नियुक्त करना असामान्य प्रतीत होता है।

पुरानी जांच और क्लीन चिट

यह पहली बार नहीं था जब अरुण कुमार की नियुक्ति कानूनी जांच के दायरे में आई। आईएचआरडी में सहायक निदेशक के रूप में उनकी नियुक्ति और बाद की पदोन्नति को भी पहले चुनौती दी गई थी। ये नियुक्तियां ईके नयनार के नेतृत्व वाली वामपंथी सरकार के कार्यकाल में हुई थीं।

उस मामले में सतर्कता (विजिलेंस) जांच में निष्कर्ष निकाला गया था कि नियुक्ति और पदोन्नति निर्धारित नियमों के अनुरूप थी। विजिलेंस अदालत ने मामला बंद करने की रिपोर्ट स्वीकार कर अरुण कुमार को क्लीन चिट दी थी, और बाद में तिरुवनंतपुरम की एक विशेष अदालत ने भी उन्हें संबंधित मामले में बरी कर दिया था।

आगे क्या

सरकार के इस ताजा फैसले के साथ आईएचआरडी के नेतृत्व को लेकर वर्षों से चला आ रहा विवाद औपचारिक रूप से समाप्त हो गया है। प्रो. राजेश की नियुक्ति से संस्थान में एक नए अध्याय की शुरुआत होगी, हालांकि यूजीसी मानकों के अनुपालन और पारदर्शी चयन प्रक्रिया को लेकर नज़रें बनी रहेंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि पूरी नियुक्ति प्रणाली की जवाबदेही का सवाल है। विजिलेंस क्लीन चिट के बावजूद अदालत का हस्तक्षेप यह दर्शाता है कि संस्थागत जांच तंत्र हमेशा पर्याप्त नहीं होता। प्रो. राजेश की नियुक्ति एक सुधारात्मक कदम है, लेकिन असली परीक्षा यह होगी कि भविष्य में इस तरह के पदों पर चयन पारदर्शी और मेरिट-आधारित प्रक्रिया से हो।
RashtraPress
8 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वीए अरुण कुमार को आईएचआरडी निदेशक पद से क्यों हटाया गया?
केरल सरकार ने वीए अरुण कुमार को आईएचआरडी निदेशक पद से हटाया, क्योंकि उनकी पात्रता को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था और केरल उच्च न्यायालय ने उनकी योग्यता तथा नियुक्ति में राजनीतिक प्रभाव की जांच के आदेश दिए थे। 2018 के यूजीसी नियमों के अनुसार इस पद के लिए सात वर्ष का शिक्षण अनुभव अनिवार्य है, जिस पर अदालत ने संदेह व्यक्त किया था।
आईएचआरडी का नया निदेशक कौन है?
प्रो. एमवी राजेश को आईएचआरडी का नया निदेशक नियुक्त किया गया है। वे आईएचआरडी कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, पूंजार के प्राचार्य थे और स्वयं आईएचआरडी के पूर्व छात्र हैं।
केरल हाईकोर्ट ने इस मामले में क्या कहा था?
केरल उच्च न्यायालय ने पिछले वर्ष जून में स्वतः संज्ञान लेते हुए अरुण कुमार की पात्रता की जांच के आदेश दिए थे। अदालत ने कहा था कि आईएचआरडी निदेशक का पद कुलपति के समकक्ष है और किसी पूर्व क्लेरिकल कर्मचारी को इस पद पर नियुक्त करना असामान्य प्रतीत होता है। अदालत ने राजनीतिक प्रभाव की भूमिका की जांच का भी निर्देश दिया था।
वीए अरुण कुमार कौन हैं और उनका आईएचआरडी से क्या संबंध है?
वीए अरुण कुमार केरल के पूर्व मुख्यमंत्री वीएस अच्युतानंदन के पुत्र हैं। वे पिछले तीन वर्षों से आईएचआरडी के निदेशक-प्रभारी के रूप में कार्यरत थे। इससे पहले वे आईएचआरडी में सहायक निदेशक भी रह चुके थे, जिनकी नियुक्ति ईके नयनार सरकार के कार्यकाल में हुई थी।
क्या अरुण कुमार को पहले भी कानूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ा था?
हाँ, आईएचआरडी में उनकी सहायक निदेशक नियुक्ति और बाद की पदोन्नति को भी पहले चुनौती दी गई थी। उस मामले में विजिलेंस जांच ने नियुक्ति को नियमानुसार पाया था और विजिलेंस अदालत तथा तिरुवनंतपुरम की एक विशेष अदालत ने उन्हें क्लीन चिट दी थी।
राष्ट्र प्रेस
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