केरल: सतीशन सरकार ने IAS अधिकारी बी. अशोक और एन. प्रशांत का निलंबन रद्द किया, जल्द होगी नई तैनाती
सारांश
मुख्य बातें
केरल की वी.डी. सतीशन सरकार ने वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों डॉ. बी. अशोक और एन. प्रशांत के निलंबन को आधिकारिक रूप से रद्द कर दिया है। पिछली पिनराई विजयन सरकार के कार्यकाल में शुरू की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई को पलटते हुए यह निर्णय 6 जून 2026 को लिया गया। दोनों अधिकारी अब शीघ्र ही सेवा में वापस लौटेंगे और सरकार उनकी नई तैनाती पर जल्द फैसला करेगी।
निलंबन रद्द करने का कारण
सूत्रों के अनुसार, राज्य में वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों की कमी और पिछली सरकार द्वारा शुरू की गई कई अनुशासनात्मक कार्रवाइयों को अत्यधिक कठोर माने जाने के बाद यह कदम उठाया गया है। इस निर्णय को नई सरकार की नौकरशाहों के प्रति बदली हुई कार्यशैली का स्पष्ट संकेत माना जा रहा है।
गौरतलब है कि दोनों अधिकारी समय-समय पर सरकार की नीतियों और वरिष्ठ अधिकारियों के कामकाज को लेकर आलोचनात्मक रुख अपनाते रहे थे, जो उनके निलंबन का आधार बना था।
डॉ. बी. अशोक का मामला
डॉ. बी. अशोक, जो सैनिक कल्याण विभाग के प्रधान सचिव के रूप में कार्यरत थे, उन्हें विधानसभा चुनाव परिणाम घोषित होने से ठीक पहले निलंबित किया गया था। उन पर तत्कालीन मुख्यमंत्री पिनराई विजयन, सरकार की नीतियों और कार्यशैली की मीडिया में आलोचना करने का आरोप लगाया गया था।
निलंबन आदेश में कहा गया था कि उन्होंने सरकार की पूर्व अनुमति के बिना मीडिया और सोशल मीडिया पर बयान देकर अखिल भारतीय सेवा आचरण नियमों का उल्लंघन किया। डॉ. अशोक ने इस कार्रवाई का विरोध करते हुए कहा था कि कार्यवाहक सरकार के पास ऐसा फैसला लेने का अधिकार नहीं था और यह कानूनी रूप से टिकाऊ नहीं है।
इससे पहले भी केईआरए परियोजना से जुड़ी कथित अनियमितताओं की रिपोर्ट सामने आने के बाद उनका कई बार तबादला किया गया था। उन्हें कृषि विभाग सहित कई महत्वपूर्ण पदों से हटाकर केटीडीएफएफसी के प्रबंध निदेशक, स्थानीय स्वशासन आयुक्त और कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग के प्रधान सचिव जैसे पदों पर नियुक्त किया गया था। इनमें से कुछ तबादलों को उन्होंने न्यायाधिकरण में चुनौती भी दी थी।
एन. प्रशांत का मामला
एन. प्रशांत लगभग दो वर्षों से सेवा से बाहर थे। उनके खिलाफ सरकार ने नौ बार अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की थी। उन्हें पहली बार 11 नवंबर 2024 को निलंबित किया गया था, जब उन्होंने सोशल मीडिया पर तत्कालीन मुख्य सचिव डॉ. ए. जयतिलक के खिलाफ आलोचनात्मक टिप्पणियाँ और आरोप लगाए थे।
सोशल मीडिया पर सक्रिय रहने वाले प्रशांत अनुशासनात्मक कार्रवाइयों का जवाब भी अक्सर व्यंग्यात्मक पोस्ट के ज़रिए देते रहे हैं। उनके खिलाफ अंतिम कार्रवाई राज्य की लॉटरी प्रणाली पर बिना सरकारी अनुमति के एक अंग्रेजी अखबार में लेख लिखने के आरोप में की गई थी।
आगे क्या होगा
दोनों अधिकारियों की बहाली के बाद राज्य सचिवालय और कई प्रमुख विभागों में बड़े प्रशासनिक फेरबदल की संभावना जताई जा रही है। यह ऐसे समय में आया है जब सतीशन सरकार नौकरशाही में अपनी पकड़ मजबूत कर रही है और पिछली सरकार की विवादास्पद कार्रवाइयों की समीक्षा कर रही है। दोनों अनुभवी अधिकारियों की वापसी से राज्य प्रशासन को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।