ईडी ने आर-कॉम की ₹3,034 करोड़ की संपत्तियां कुर्क कीं, अनिल अंबानी समूह पर कुल जब्ती ₹19,344 करोड़ पार

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ईडी ने आर-कॉम की ₹3,034 करोड़ की संपत्तियां कुर्क कीं, अनिल अंबानी समूह पर कुल जब्ती ₹19,344 करोड़ पार

सारांश

ईडी ने आर-कॉम की ₹3,034.90 करोड़ की संपत्तियां कुर्क कर अनिल अंबानी समूह पर कुल जब्ती का आंकड़ा ₹19,344 करोड़ पार करा दिया। सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में चल रही एसआईटी जांच में राइजी ट्रस्ट के जरिये संपत्तियां छुपाने के आरोप सामने आए हैं, जबकि ₹40,185 करोड़ का कर्ज अब भी बकाया है।

Key Takeaways

  • ईडी ने 28 अप्रैल 2026 को रिलायंस कम्युनिकेशंस (आर-कॉम) की ₹3,034.90 करोड़ की संपत्तियां पीएमएलए, 2002 की धारा 5 के तहत अस्थायी रूप से कुर्क कीं।
  • रिलायंस अनिल अंबानी समूह (आरएएजी) से जुड़े मामलों में कुल जब्त संपत्तियां ₹19,344 करोड़ से अधिक हो गई हैं।
  • आर-कॉम और सहयोगी कंपनियों पर घरेलू व विदेशी ऋणदाताओं का करीब ₹40,185 करोड़ बकाया है।
  • जब्त संपत्तियों में मुंबई का फ्लैट, खंडाला फार्महाउस, सानंद भूमि और रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर के 7.71 करोड़ शेयर शामिल हैं।
  • आरोप है कि राइजी ट्रस्ट के जरिये संपत्तियां अनिल अंबानी की व्यक्तिगत गारंटी देनदारियों से अलग रखी गईं।
  • जांच सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर गठित एसआईटी द्वारा की जा रही है; SBI, PNB, बैंक ऑफ बड़ौदा और LIC की शिकायतों पर सीबीआई एफआईआर दर्ज हैं।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 28 अप्रैल 2026 को बैंक धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड (आर-कॉम) की ₹3,034.90 करोड़ की संपत्तियां अस्थायी रूप से कुर्क कर लीं। इस कार्रवाई के बाद रिलायंस अनिल अंबानी समूह (आरएएजी) से जुड़े मामलों में कुल जब्त संपत्तियों का आंकड़ा ₹19,344 करोड़ से अधिक हो गया है।

कानूनी आधार और जांच का दायरा

यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए), 2002 की धारा 5 के तहत की गई है। इसका मुख्य उद्देश्य संपत्तियों को नष्ट या स्थानांतरित होने से रोकना और बैंकों तथा आम जनता के हितों की रक्षा करना है। पूरे मामले की जांच सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों पर गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) द्वारा की जा रही है।

ईडी की कार्रवाई कई केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) एफआईआर के आधार पर शुरू हुई, जो भारतीय स्टेट बैंक (SBI), पंजाब नेशनल बैंक (PNB), बैंक ऑफ बड़ौदा और भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) की शिकायतों पर दर्ज की गई थीं। इन शिकायतों में अनिल डी. अंबानी और अन्य के विरुद्ध गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगाए गए हैं।

बकाया कर्ज और जब्त संपत्तियों का ब्योरा

जांच में सामने आया है कि आर-कॉम और उसकी सहयोगी कंपनियों ने घरेलू और विदेशी ऋणदाताओं से भारी मात्रा में कर्ज लिया था, जिसमें से करीब ₹40,185 करोड़ अब भी बकाया हैं। ईडी ने जांच के दौरान प्रमोटर समूह से जुड़ी कई महत्वपूर्ण संपत्तियों का पता लगाया, जिनमें शामिल हैं:

मुंबई स्थित उषा किरण बिल्डिंग का एक फ्लैट, पुणे के खंडाला में एक फार्महाउस और अहमदाबाद के सानंद क्षेत्र में भूमि का एक टुकड़ा। इसके अलावा रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के 7.71 करोड़ शेयर भी कुर्क किए गए हैं, जो राइजी इंफिनिटी प्राइवेट लिमिटेड के पास थे — यह कंपनी राइजी ट्रस्ट के अंतर्गत आती है, जो अनिल अंबानी परिवार का निजी ट्रस्ट है।

राइजी ट्रस्ट की भूमिका पर आरोप

जांच एजेंसी के अनुसार, राइजी ट्रस्ट का गठन कथित तौर पर संपत्तियों के संरक्षण और संसाधनों के सृजन के उद्देश्य से किया गया था। आरोप है कि इस ट्रस्ट के माध्यम से संपत्तियों को इस प्रकार सुरक्षित रखा गया, जिससे उन्हें अनिल अंबानी की उन व्यक्तिगत देनदारियों से अलग रखा जा सके जो आर-कॉम को दिए गए कर्ज के बदले बैंकों को दी गई व्यक्तिगत गारंटियों से जुड़ी थीं।

ईडी का कहना है कि इन संपत्तियों का उपयोग मुख्यतः परिवार के लाभ के लिए हो रहा था, जबकि जिन सार्वजनिक बैंकों के ऋण एनपीए में बदल गए, उन्हें कोई लाभ नहीं मिला। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब बड़े कॉर्पोरेट डिफॉल्ट के मामलों में जवाबदेही को लेकर देशव्यापी बहस तेज हो रही है।

संपत्तियां वापस होंगी वास्तविक दावेदारों को

ईडी ने स्पष्ट किया है कि पीएमएलए की धारा-8 के तहत जब्त संपत्तियां अंततः उन वास्तविक दावेदारों को लौटाई जाएंगी जिन्हें इस धोखाधड़ी से नुकसान हुआ है — जिनमें संबंधित बैंक प्रमुख रूप से शामिल हैं। एजेंसी का तर्क है कि ऐसी कार्रवाई से संपत्तियों का मूल्य सुरक्षित रहता है और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद सार्वजनिक धन को आम जनता तक वापस पहुंचाया जा सकता है।

आगे क्या होगा

एसआईटी की जांच अभी जारी है और ईडी ने संकेत दिया है कि आरएएजी समूह से जुड़े अन्य मामलों में भी कार्रवाई हो सकती है। एजेंसी ने दोहराया है कि वह मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ी संपत्तियों की पहचान कर उन्हें जब्त करने और देश की वित्तीय प्रणाली की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।

Point of View

185 करोड़ का बकाया कर्ज और ₹19,344 करोड़ की कुल जब्ती के बीच का अंतर बताता है कि वसूली की राह अभी लंबी है। राइजी ट्रस्ट के जरिये संपत्तियां सुरक्षित रखने के आरोप एक बड़े सवाल की ओर इशारा करते हैं — क्या मौजूदा कानूनी ढांचा प्रमोटरों को पारिवारिक ट्रस्टों की आड़ में देनदारियां छुपाने से रोकने में सक्षम है? सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी इस मामले को असाधारण बनाती है, लेकिन अंतिम परीक्षा यह होगी कि जब्त संपत्तियां वास्तव में सार्वजनिक बैंकों तक कितनी और कब पहुंचती हैं।
NationPress
28/04/2026

Frequently Asked Questions

ईडी ने आर-कॉम की संपत्तियां क्यों कुर्क कीं?
ईडी ने बैंक धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों के तहत पीएमएलए, 2002 की धारा 5 के अंतर्गत यह कार्रवाई की है। SBI, PNB, बैंक ऑफ बड़ौदा और LIC की शिकायतों पर दर्ज सीबीआई एफआईआर के आधार पर जांच शुरू हुई थी।
राइजी ट्रस्ट क्या है और इसका इस मामले से क्या संबंध है?
राइजी ट्रस्ट अनिल अंबानी परिवार का निजी ट्रस्ट है, जिसके अंतर्गत राइजी इंफिनिटी प्राइवेट लिमिटेड आती है। ईडी का आरोप है कि इस ट्रस्ट के जरिये संपत्तियों को अनिल अंबानी की व्यक्तिगत गारंटी देनदारियों से अलग रखा गया, जबकि सार्वजनिक बैंकों के ऋण एनपीए में बदल चुके थे।
अनिल अंबानी समूह पर अब तक कुल कितनी संपत्तियां जब्त हो चुकी हैं?
28 अप्रैल 2026 की कार्रवाई के बाद रिलायंस अनिल अंबानी समूह (आरएएजी) से जुड़े मामलों में कुल जब्त संपत्तियां ₹19,344 करोड़ से अधिक हो गई हैं। ताजा कुर्की में ₹3,034.90 करोड़ की संपत्तियां शामिल हैं।
जब्त संपत्तियां किसे वापस मिलेंगी?
ईडी के अनुसार पीएमएलए की धारा-8 के तहत जब्त संपत्तियां कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद वास्तविक दावेदारों — मुख्यतः संबंधित बैंकों — को लौटाई जाएंगी। इसका उद्देश्य सार्वजनिक धन को अंततः आम जनता तक वापस पहुंचाना है।
इस मामले की जांच कौन कर रहा है?
जांच सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों पर गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) द्वारा की जा रही है। ईडी इसी एसआईटी जांच के समानांतर पीएमएलए के तहत मनी लॉन्ड्रिंग की जांच कर रही है।
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