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गुजरात: आनंद में एसीबी ने पुलिस निरीक्षक को ₹40,000 की रिश्वत लेते रंगे हाथों दबोचा

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गुजरात: आनंद में एसीबी ने पुलिस निरीक्षक को ₹40,000 की रिश्वत लेते रंगे हाथों दबोचा

सारांश

गुजरात के आनंद में एसीबी ने एक पुलिस निरीक्षक को फैक्ट्री मालिक से ₹40,000 रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा। आरोपी ने प्रदूषण का हवाला देकर पहले एसी माँगा, फिर नकद — सतर्क नागरिक की शिकायत पर एसीबी ने जाल बिछाकर इंस्पेक्टर राजदीपसिंह वानर को उनके अपने चैंबर से दबोचा।

मुख्य बातें

आनंद एसीबी ने 22 अक्टूबर 2026 को अंकलाव पुलिस स्टेशन के पुलिस निरीक्षक राजदीपसिंह वानर को रंगे हाथों गिरफ्तार किया।
आरोपी ने फैक्ट्री मालिक से पहले 1.5 टन एयर कंडीशनर माँगा, फिर ₹40,000 नकद की माँग की।
रिश्वत देने से इनकार करने वाले शिकायतकर्ता ने एसीबी से संपर्क किया; ब्यूरो ने जाल बिछाकर कार्रवाई की।
गिरफ्तारी के समय ₹40,000 की पूरी रिश्वत राशि मौके पर बरामद की गई।
एसीबी के अनुसार, निरीक्षक का आचरण आपराधिक कदाचार की श्रेणी में आता है।

गुजरात के आनंद जिले में भ्रष्टाचार विरोधी ब्यूरो (एसीबी) ने 22 अक्टूबर 2026 को अंकलाव पुलिस स्टेशन में तैनात पुलिस निरीक्षक को ₹40,000 की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया। आरोपी ने एक फैक्ट्री मालिक को प्रदूषण के आरोप में उसकी फैक्ट्री बंद कराने की धमकी देकर यह अवैध राशि वसूली थी।

मामले का घटनाक्रम

एसीबी की शिकायत के अनुसार, अंकलाव पुलिस स्टेशन में द्वितीय श्रेणी के पुलिस निरीक्षक राजदीपसिंह वानर ने शिकायतकर्ता को पुलिस स्टेशन बुलाया और प्रदूषण फैलाने का आरोप लगाते हुए फैक्ट्री सील करने की धमकी दी। इंस्पेक्टर ने पहले 1.5 टन का एयर कंडीशनर माँगा, और जब शिकायतकर्ता ने इनकार किया तो उसके बदले ₹40,000 नकद की माँग रख दी।

शिकायतकर्ता ने रिश्वत देने से इनकार करते हुए आनंद एसीबी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। एसीबी ने शिकायतकर्ता की पहचान एक 'सतर्क नागरिक' के रूप में की है।

एसीबी का जाल और गिरफ्तारी

शिकायत के आधार पर आनंद एसीबी पुलिस स्टेशन के निरीक्षक आर. एन. विरानी और उनकी टीम ने सुनियोजित जाल बिछाया। 22 अक्टूबर को निरीक्षक वानर ने अंकलाव पुलिस स्टेशन स्थित अपने चैंबर में शिकायतकर्ता से ₹40,000 नकद स्वीकार किए — उसी क्षण एसीबी की टीम ने उन्हें दबोच लिया। अधिकारियों के अनुसार, रिश्वत की पूरी राशि ₹40,000 मौके पर ही बरामद कर ली गई।

आरोप और कानूनी पहलू

एसीबी के बयान के अनुसार, निरीक्षक वानर का यह आचरण आपराधिक कदाचार की श्रेणी में आता है। मामला एक लोक सेवक द्वारा अपने आधिकारिक पद का दुरुपयोग कर फैक्ट्री के विरुद्ध कार्रवाई की धमकी देकर अनुचित लाभ प्राप्त करने से संबंधित है।

गौरतलब है कि एसीबी समय-समय पर रिश्वत माँगने वाले सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ ऐसे ट्रैप ऑपरेशन चलाती रहती है, और यह कार्रवाई उसी श्रृंखला का हिस्सा है।

आम जनता पर असर

यह मामला उस व्यापक समस्या की ओर ध्यान दिलाता है जिसमें कारोबारियों को कथित तौर पर पुलिस या प्रशासनिक अधिकारियों के दबाव का सामना करना पड़ता है। विशेषज्ञों का कहना है कि सतर्क नागरिकों की सक्रिय भूमिका और एसीबी जैसे स्वतंत्र निगरानी तंत्र ऐसे मामलों में निर्णायक साबित होते हैं।

यह ऐसे समय में आया है जब गुजरात में भ्रष्टाचार-विरोधी अभियानों को लेकर सार्वजनिक जागरूकता बढ़ रही है। आगे की जाँच और अभियोजन प्रक्रिया एसीबी के अधिकार-क्षेत्र में है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन वे तब तक ही कारगर हैं जब तक नागरिक शिकायत दर्ज कराने की हिम्मत रखते हों।
RashtraPress
23 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आनंद एसीबी ने किस पुलिस अधिकारी को गिरफ्तार किया?
एसीबी ने अंकलाव पुलिस स्टेशन में तैनात द्वितीय श्रेणी के पुलिस निरीक्षक राजदीपसिंह वानर को गिरफ्तार किया। उन्हें 22 अक्टूबर 2026 को उनके अपने चैंबर में ₹40,000 रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया।
पुलिस निरीक्षक ने रिश्वत क्यों माँगी थी?
एसीबी की शिकायत के अनुसार, निरीक्षक ने फैक्ट्री मालिक पर प्रदूषण फैलाने का आरोप लगाते हुए उसकी फैक्ट्री बंद कराने की धमकी दी। पहले उसने 1.5 टन का एयर कंडीशनर माँगा और इनकार के बाद ₹40,000 नकद की माँग की।
एसीबी ने इस मामले में कार्रवाई कैसे की?
शिकायतकर्ता ने रिश्वत देने से इनकार कर आनंद एसीबी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। एसीबी निरीक्षक आर. एन. विरानी और उनकी टीम ने जाल बिछाया और 22 अक्टूबर को रिश्वत स्वीकार करते ही आरोपी को मौके पर दबोच लिया।
क्या रिश्वत की राशि बरामद हुई?
हाँ, एसीबी अधिकारियों के अनुसार गिरफ्तारी के समय ₹40,000 की पूरी रिश्वत राशि मौके से बरामद कर ली गई। यह राशि ट्रैप ऑपरेशन के दौरान साक्ष्य के रूप में जब्त की गई।
निरीक्षक पर क्या कानूनी आरोप लगाए गए हैं?
एसीबी के बयान के अनुसार, निरीक्षक राजदीपसिंह वानर का आचरण आपराधिक कदाचार की श्रेणी में आता है। मामला एक लोक सेवक द्वारा अपने आधिकारिक पद का दुरुपयोग कर अनुचित लाभ प्राप्त करने से संबंधित है और आगे की कार्यवाही जारी है।
राष्ट्र प्रेस
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