8 अगस्त 2026
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अहमदाबाद फायर एनओसी रिश्वत कांड: एसीबी ने बिचौलिए को ₹36,000 लेते पकड़ा, मुख्य अग्निशमन अधिकारी भी जाँच के घेरे में

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अहमदाबाद फायर एनओसी रिश्वत कांड: एसीबी ने बिचौलिए को ₹36,000 लेते पकड़ा, मुख्य अग्निशमन अधिकारी भी जाँच के घेरे में

सारांश

गुजरात एसीबी ने अहमदाबाद में छह इमारतों की फायर एनओसी के लिए ₹36,000 की रिश्वत लेते बिचौलिए भावसिंह झाला को रंगे हाथों दबोचा। जाँच में मुख्य अग्निशमन अधिकारी अमित कुमार डोंगरे की कथित संलिप्तता सामने आई — यह मामला अनिवार्य अग्नि सुरक्षा अनुमतियों में भ्रष्टाचार की गंभीर तस्वीर पेश करता है।

मुख्य बातें

गुजरात एसीबी ने 8 अगस्त 2025 को बिचौलिए भावसिंह झाला (31) को ₹36,000 की कथित रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया।
रिश्वत अहमदाबाद की छह इमारतों के लिए फायर एनओसी मंजूर कराने के बदले माँगी गई — प्रत्येक एनओसी के लिए ₹6,000 ।
जाँच में मुख्य अग्निशमन अधिकारी अमित कुमार डोंगरे (47) की कथित संलिप्तता के प्रारंभिक साक्ष्य मिले; उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई शुरू।
ट्रैप ऑपरेशन मेमनगर, विजय क्रॉस रोड स्थित यश एक्वा कॉम्प्लेक्स के पास चलाया गया।
दोनों आरोपियों पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज; जाँच जारी है।

गुजरात भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने 8 अगस्त 2025 को अहमदाबाद में एक निजी बिचौलिए को ₹36,000 की कथित रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया। यह रकम छह इमारतों के लिए फायर एनओसी (अनापत्ति प्रमाण पत्र) मंजूर कराने के एवज में माँगी गई थी। प्रारंभिक जाँच में अहमदाबाद के मुख्य अग्निशमन अधिकारी की कथित संलिप्तता के संकेत मिलने के बाद उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

मामले का पूरा घटनाक्रम

शिकायतकर्ता एक फायर सेफ्टी ऑफिसर (एफएसओ) है, जो अहमदाबाद की विभिन्न इमारतों को अग्नि सुरक्षा सेवाएँ प्रदान करता है। उसने राज्य सरकार के ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से छह इमारतों के लिए फायर एनओसी हेतु आवेदन जमा किए थे। एसीबी के अनुसार, आरोपी बिचौलिए भावसिंह झाला (31 वर्ष) ने प्रत्येक एनओसी के लिए ₹6,000 के हिसाब से कुल ₹36,000 की माँग की और आवेदन मंजूर कराने का आश्वासन दिया।

एसीबी का जाल और गिरफ्तारी

रिश्वत देने के बजाय शिकायतकर्ता ने वडोदरा सिटी एसीबी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद एसीबी ने दो स्वतंत्र सरकारी पंच गवाहों की मौजूदगी में ट्रैप ऑपरेशन चलाया। यह कार्रवाई अहमदाबाद के मेमनगर क्षेत्र में विजय क्रॉस रोड स्थित यश एक्वा कॉम्प्लेक्स के पास की गई। ट्रैप के दौरान झाला ने कथित तौर पर शिकायतकर्ता से रिश्वत संबंधी बातचीत की और ₹36,000 स्वीकार किए, जिसके बाद एसीबी की टीम ने उसे रंगे हाथों पकड़ लिया।

मुख्य अग्निशमन अधिकारी की कथित संलिप्तता

एसीबी ने बताया कि प्रारंभिक जाँच में अमित कुमार डोंगरे (47 वर्ष) का नाम सामने आया है, जो अहमदाबाद के मुख्य अग्निशमन अधिकारी और प्रथम श्रेणी के अधिकारी हैं। ब्यूरो के अनुसार, ट्रैप के दौरान झाला ने डोंगरे से फोन पर बात की थी और इस बातचीत से कथित तौर पर रिश्वत की रकम को लेकर अधिकारी की सहमति का संकेत मिला। जाँच में यह भी सामने आया है कि झाला ने कथित तौर पर डोंगरे के निर्देश पर ही रिश्वत की माँग की और उसे स्वीकार किया।

ऑपरेशन की निगरानी किसने की

एसीबी के बयान के अनुसार, इस ट्रैप कार्रवाई का नेतृत्व वडोदरा सिटी एसीबी पुलिस स्टेशन के पुलिस निरीक्षक ए.एन. प्रजापति ने किया। कार्रवाई वडोदरा एसीबी इकाई के सहायक निदेशक बी.एम. पटेल की निगरानी में हुई, जबकि वडोदरा रेंज के उप निदेशक बलदेव देसाई पूरे अभियान के प्रभारी अधिकारी थे। दोनों आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कानूनी कार्रवाई जारी है।

आगे क्या होगा

यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब गुजरात में अग्नि सुरक्षा मानकों और एनओसी प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर पहले से सवाल उठते रहे हैं। गौरतलब है कि फायर एनओसी जैसी अनिवार्य सरकारी अनुमतियों में भ्रष्टाचार सीधे तौर पर नागरिक सुरक्षा को प्रभावित करता है। दोनों आरोपियों के खिलाफ आगे की जाँच जारी है और अदालत में आरोप-पत्र दाखिल होने की प्रक्रिया चल रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

वे आग लगने पर जानलेवा साबित हो सकती हैं। गौरतलब है कि गुजरात में पिछले कुछ वर्षों में अग्नि दुर्घटनाओं के बाद एनओसी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठते रहे हैं। एसीबी की इस कार्रवाई से यह भी उजागर होता है कि ऑनलाइन पोर्टल के बावजूद बिचौलियों का तंत्र कायम है — जो डिजिटल सुधारों की सीमाओं को रेखांकित करता है।
RashtraPress
8 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अहमदाबाद फायर एनओसी रिश्वत मामला क्या है?
गुजरात एसीबी ने 8 अगस्त 2025 को बिचौलिए भावसिंह झाला को अहमदाबाद की छह इमारतों के लिए फायर एनओसी मंजूर कराने के बदले ₹36,000 की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया। जाँच में मुख्य अग्निशमन अधिकारी अमित कुमार डोंगरे की कथित संलिप्तता भी सामने आई है।
मुख्य अग्निशमन अधिकारी अमित कुमार डोंगरे पर क्या आरोप हैं?
एसीबी के अनुसार, ट्रैप के दौरान बिचौलिए झाला ने डोंगरे से फोन पर बात की, जिससे कथित तौर पर रिश्वत की रकम में अधिकारी की सहमति का संकेत मिला। जाँच में यह भी सामने आया है कि झाला ने कथित तौर पर डोंगरे के निर्देश पर ही रिश्वत माँगी और स्वीकार की। उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई शुरू हो चुकी है।
शिकायतकर्ता ने एसीबी से संपर्क क्यों किया?
शिकायतकर्ता एक फायर सेफ्टी ऑफिसर है, जिसने राज्य के ऑनलाइन पोर्टल पर छह इमारतों की फायर एनओसी के लिए आवेदन किया था। रिश्वत देने के बजाय उसने वडोदरा सिटी एसीबी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद ट्रैप ऑपरेशन चलाया गया।
यह ट्रैप ऑपरेशन कहाँ और कैसे चलाया गया?
यह कार्रवाई अहमदाबाद के मेमनगर क्षेत्र में विजय क्रॉस रोड स्थित यश एक्वा कॉम्प्लेक्स के पास की गई। दो स्वतंत्र सरकारी पंच गवाहों की मौजूदगी में एसीबी की टीम ने जाल बिछाया और झाला के ₹36,000 स्वीकार करते ही उसे पकड़ लिया।
इस मामले में आगे क्या कार्रवाई होगी?
दोनों आरोपियों — भावसिंह झाला और अमित कुमार डोंगरे — के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कानूनी कार्रवाई जारी है। जाँच वडोदरा एसीबी इकाई द्वारा की जा रही है और आगे अदालत में आरोप-पत्र दाखिल होने की प्रक्रिया चलेगी।
राष्ट्र प्रेस
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