अहमदाबाद ACB कोर्ट ने पूर्व चीफ फायर ऑफिसर डोंगरे और बिचौलिये झाला की जमानत याचिकाएं खारिज कीं
सारांश
मुख्य बातें
अहमदाबाद की स्पेशल एंटी-करप्शन ब्यूरो (ACB) कोर्ट ने 27 अगस्त 2025 को अहमदाबाद म्युनिसिपल कॉरपोरेशन (AMC) के पूर्व चीफ फायर ऑफिसर अमित कुमार डोंगरे और कथित बिचौलिये भावसिंह झाला की नियमित जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं। दोनों पर फायर सेफ्टी नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) जारी करने के बदले ₹36,000 की रिश्वत लेने का आरोप है।
मामले का घटनाक्रम
गुजरात ACB ने 7 अगस्त 2025 को दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया था। आरोप है कि अहमदाबाद में छह इमारतों के लिए फायर सेफ्टी NOC मंजूर कराने के एवज में प्रति NOC ₹6,000 की दर से कुल ₹36,000 की मांग की गई। उल्लेखनीय है कि ये आवेदन राज्य सरकार के आधिकारिक ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से जमा किए गए थे।
यह मामला तब सामने आया जब वडोदरा के एक फायर सेफ्टी अधिकारी ने ACB के समक्ष शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर ब्यूरो ने अहमदाबाद के मेमनगर इलाके में विजय क्रॉस रोड्स पर स्थित यश इक्वा कॉम्प्लेक्स के पास सरकारी गवाहों की उपस्थिति में जाल बिछाया।
गिरफ्तारी और साक्ष्य
जांचकर्ताओं के अनुसार, भावसिंह झाला को शिकायतकर्ता से ₹36,000 लेते हुए रंगे हाथ पकड़ा गया। ACB का कहना है कि झाला ने यह राशि डोंगरे के निर्देश पर मांगी और स्वीकार की। ट्रैप ऑपरेशन के दौरान दोनों के बीच हुई टेलीफोन बातचीत को जांचकर्ताओं ने डोंगरे की कथित संलिप्तता का प्रमाण बताया है।
47 वर्षीय डोंगरे को अक्टूबर 2024 में AMC का चीफ फायर ऑफिसर नियुक्त किया गया था और दिसंबर 2024 में उन्होंने शहर की फायर सर्विस का कार्यभार संभाला था। गिरफ्तारी के तुरंत बाद नगर निकाय ने तत्काल प्रभाव से उनकी नियुक्ति रद्द कर दी।
जांच का विस्तार
ACB ने डोंगरे के पूरे कार्यकाल के दौरान जारी फायर सेफ्टी क्लीयरेंस के रिकॉर्ड तलब किए हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कथित रिश्वतखोरी केवल इन्हीं छह NOC तक सीमित थी या इससे परे भी फैली हुई थी। जांचकर्ता दोनों आरोपियों के वित्तीय लेनदेन और संचार रिकॉर्ड की भी बारीकी से पड़ताल कर रहे हैं।
गौरतलब है कि यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब सरकारी सेवाओं के डिजिटलीकरण के बावजूद भ्रष्टाचार की शिकायतें थमती नहीं दिख रहीं। ऑनलाइन पोर्टल के जरिए आवेदन जमा होने के बाद भी कथित रूप से नकद मांग किए जाने से व्यवस्था की खामियों पर सवाल उठते हैं।
जमानत खारिज होने का असर
ACB कोर्ट द्वारा नियमित जमानत याचिकाएं खारिज किए जाने के बाद डोंगरे और झाला दोनों न्यायिक हिरासत में बने रहेंगे। जांच एजेंसी की जांच जारी है और आगामी सुनवाई में नए साक्ष्य सामने आने की संभावना है।