26 अगस्त 2026
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अहमदाबाद ACB कोर्ट ने पूर्व चीफ फायर ऑफिसर डोंगरे और बिचौलिये झाला की जमानत याचिकाएं खारिज कीं

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अहमदाबाद ACB कोर्ट ने पूर्व चीफ फायर ऑफिसर डोंगरे और बिचौलिये झाला की जमानत याचिकाएं खारिज कीं

सारांश

अहमदाबाद ACB कोर्ट ने AMC के पूर्व चीफ फायर ऑफिसर अमित डोंगरे और बिचौलिये भावसिंह झाला की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं। छह इमारतों की फायर NOC के बदले ₹36,000 की कथित रिश्वत मामले में 7 अगस्त को गिरफ्तार दोनों आरोपी अब न्यायिक हिरासत में रहेंगे।

मुख्य बातें

ACB कोर्ट, अहमदाबाद ने पूर्व चीफ फायर ऑफिसर अमित कुमार डोंगरे और बिचौलिये भावसिंह झाला की नियमित जमानत याचिकाएं खारिज कीं।
दोनों को 7 अगस्त 2025 को गुजरात ACB ने ₹36,000 की कथित रिश्वत के मामले में गिरफ्तार किया था।
आरोप है कि छह इमारतों की फायर सेफ्टी NOC के लिए प्रति NOC ₹6,000 की मांग की गई।
ट्रैप ऑपरेशन मेमनगर, अहमदाबाद में बिछाया गया; झाला को रंगे हाथ पकड़ा गया।
गिरफ्तारी के बाद AMC ने डोंगरे की नियुक्ति तत्काल प्रभाव से रद्द की; ACB ने उनके पूरे कार्यकाल के NOC रिकॉर्ड तलब किए।

अहमदाबाद की स्पेशल एंटी-करप्शन ब्यूरो (ACB) कोर्ट ने 27 अगस्त 2025 को अहमदाबाद म्युनिसिपल कॉरपोरेशन (AMC) के पूर्व चीफ फायर ऑफिसर अमित कुमार डोंगरे और कथित बिचौलिये भावसिंह झाला की नियमित जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं। दोनों पर फायर सेफ्टी नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) जारी करने के बदले ₹36,000 की रिश्वत लेने का आरोप है।

मामले का घटनाक्रम

गुजरात ACB ने 7 अगस्त 2025 को दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया था। आरोप है कि अहमदाबाद में छह इमारतों के लिए फायर सेफ्टी NOC मंजूर कराने के एवज में प्रति NOC ₹6,000 की दर से कुल ₹36,000 की मांग की गई। उल्लेखनीय है कि ये आवेदन राज्य सरकार के आधिकारिक ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से जमा किए गए थे।

यह मामला तब सामने आया जब वडोदरा के एक फायर सेफ्टी अधिकारी ने ACB के समक्ष शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर ब्यूरो ने अहमदाबाद के मेमनगर इलाके में विजय क्रॉस रोड्स पर स्थित यश इक्वा कॉम्प्लेक्स के पास सरकारी गवाहों की उपस्थिति में जाल बिछाया।

गिरफ्तारी और साक्ष्य

जांचकर्ताओं के अनुसार, भावसिंह झाला को शिकायतकर्ता से ₹36,000 लेते हुए रंगे हाथ पकड़ा गया। ACB का कहना है कि झाला ने यह राशि डोंगरे के निर्देश पर मांगी और स्वीकार की। ट्रैप ऑपरेशन के दौरान दोनों के बीच हुई टेलीफोन बातचीत को जांचकर्ताओं ने डोंगरे की कथित संलिप्तता का प्रमाण बताया है।

47 वर्षीय डोंगरे को अक्टूबर 2024 में AMC का चीफ फायर ऑफिसर नियुक्त किया गया था और दिसंबर 2024 में उन्होंने शहर की फायर सर्विस का कार्यभार संभाला था। गिरफ्तारी के तुरंत बाद नगर निकाय ने तत्काल प्रभाव से उनकी नियुक्ति रद्द कर दी।

जांच का विस्तार

ACB ने डोंगरे के पूरे कार्यकाल के दौरान जारी फायर सेफ्टी क्लीयरेंस के रिकॉर्ड तलब किए हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कथित रिश्वतखोरी केवल इन्हीं छह NOC तक सीमित थी या इससे परे भी फैली हुई थी। जांचकर्ता दोनों आरोपियों के वित्तीय लेनदेन और संचार रिकॉर्ड की भी बारीकी से पड़ताल कर रहे हैं।

गौरतलब है कि यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब सरकारी सेवाओं के डिजिटलीकरण के बावजूद भ्रष्टाचार की शिकायतें थमती नहीं दिख रहीं। ऑनलाइन पोर्टल के जरिए आवेदन जमा होने के बाद भी कथित रूप से नकद मांग किए जाने से व्यवस्था की खामियों पर सवाल उठते हैं।

जमानत खारिज होने का असर

ACB कोर्ट द्वारा नियमित जमानत याचिकाएं खारिज किए जाने के बाद डोंगरे और झाला दोनों न्यायिक हिरासत में बने रहेंगे। जांच एजेंसी की जांच जारी है और आगामी सुनवाई में नए साक्ष्य सामने आने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो संकेत देता है कि यह व्यवस्था संस्थागत हो सकती है। ACB द्वारा पूरे कार्यकाल के NOC रिकॉर्ड मांगना इसी आशंका की पुष्टि करता है। असली सवाल यह है कि डिजिटल प्रणाली के होते हुए भी जवाबदेही का तंत्र इतना कमज़ोर क्यों रहा कि एक बाहरी शिकायत के बिना यह मामला सामने ही नहीं आता।
RashtraPress
26 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अमित कुमार डोंगरे पर क्या आरोप हैं?
अमित कुमार डोंगरे, जो AMC के पूर्व चीफ फायर ऑफिसर हैं, पर आरोप है कि उन्होंने अहमदाबाद में छह इमारतों की फायर सेफ्टी NOC जारी करने के बदले ₹36,000 की रिश्वत की मांग की। ACB के अनुसार, उन्होंने बिचौलिये भावसिंह झाला के माध्यम से यह राशि मंगवाई।
ACB ने दोनों आरोपियों को कैसे पकड़ा?
वडोदरा के एक फायर सेफ्टी अधिकारी की शिकायत पर ACB ने अहमदाबाद के मेमनगर इलाके में जाल बिछाया। सरकारी गवाहों की उपस्थिति में भावसिंह झाला को शिकायतकर्ता से ₹36,000 लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया, जिसके बाद डोंगरे को भी हिरासत में लिया गया।
जमानत याचिका खारिज होने का दोनों आरोपियों पर क्या असर होगा?
ACB कोर्ट द्वारा नियमित जमानत याचिकाएं खारिज होने के बाद डोंगरे और झाला दोनों न्यायिक हिरासत में बने रहेंगे। जांच जारी रहने के दौरान वे रिहा नहीं होंगे।
क्या इस मामले में जांच का दायरा और बढ़ सकता है?
हां, ACB ने डोंगरे के पूरे कार्यकाल में जारी फायर सेफ्टी क्लीयरेंस के रिकॉर्ड तलब किए हैं। जांचकर्ता यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि कथित रिश्वतखोरी केवल इन्हीं छह NOC तक सीमित थी या इससे अधिक मामलों में भी इसी तरह की व्यवस्था थी।
AMC ने डोंगरे की गिरफ्तारी के बाद क्या कदम उठाया?
अमित कुमार डोंगरे की गिरफ्तारी के तुरंत बाद अहमदाबाद म्युनिसिपल कॉरपोरेशन ने तत्काल प्रभाव से उनकी नियुक्ति रद्द कर दी। डोंगरे को अक्टूबर 2024 में इस पद पर नियुक्त किया गया था।
राष्ट्र प्रेस
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