सेंसेक्स 183 अंक फिसला, निफ्टी 24,207 पर बंद; IT और FMCG शेयरों में बिकवाली से बाजार लाल निशान में
सारांश
मुख्य बातें
बीएसई सेंसेक्स बुधवार, 26 अगस्त को 183.15 अंक (0.24 प्रतिशत) की गिरावट के साथ 77,472.94 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी50 126.80 अंक (0.52 प्रतिशत) लुढ़ककर 24,207.75 पर आ गया। वैश्विक बाजारों से कमजोर संकेत, क्रूड ऑयल की कीमतों में नरमी और आईटी सेक्टर पर बढ़ते दबाव ने घरेलू बाजार की चाल को पलट दिया।
कारोबारी सत्र का घटनाक्रम
सेंसेक्स ने सत्र की शुरुआत सकारात्मक रुख के साथ की और अपने पिछले बंद स्तर 77,656.09 से 236 अंक ऊपर 77,892.10 पर खुला। दिन के दौरान इसने 77,986.84 का इंट्रा-डे उच्च स्तर छुआ, लेकिन अंतिम सत्र में बिकवाली के दबाव ने इसे 77,472.94 के निम्न स्तर तक खींच लिया।
निफ्टी50 अपने पिछले बंद 24,334.55 से मामूली 7.40 अंक की बढ़त के साथ 24,341.95 पर फ्लैट खुला। दिन में इसने 24,378.60 का उच्च स्तर छुआ, लेकिन अंत में 0.52 प्रतिशत की गिरावट के साथ 24,207.75 पर बंद हुआ। गौरतलब है कि यह गिरावट मंगलवार की 0.48 प्रतिशत की तेजी के ठीक बाद आई है।
सेक्टरवार प्रदर्शन
निफ्टी आईटी इंडेक्स में सबसे अधिक गिरावट दर्ज की गई। निफ्टी एफएमसीजी, निफ्टी ऑटो और निफ्टी रियल्टी का प्रदर्शन भी कमजोर रहा। इसके विपरीत, निफ्टी मेटल, निफ्टी प्राइवेट बैंक और निफ्टी सीमेंट ने बेहतर प्रदर्शन किया।
व्यापक बाजार में मिला-जुला रुझान रहा — निफ्टी मिडकैप इंडेक्स 0.10 प्रतिशत नीचे रहा, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स 0.81 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुआ।
टॉप गेनर्स और लूज़र्स
निफ्टी50 में सबसे अधिक तेजी वाले शेयरों में कोटक महिंद्रा बैंक, एक्सिस बैंक, जेएसडब्ल्यू स्टील, अल्ट्राटेक सीमेंट, एचडीएफसी लाइफ और एसबीआई लाइफ शामिल रहे। वहीं, भारती एयरटेल, पावरग्रिड, इन्फोसिस, एलएंडटी, नेस्ले इंडिया और श्रीराम फाइनेंस सबसे अधिक दबाव में रहे।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
बाजार विश्लेषकों के अनुसार, सत्र के अंत में शुरुआती बढ़त समाप्त हो गई क्योंकि विभिन्न सेक्टरों में अलग-अलग रुझान के कारण बेंचमार्क पर दबाव बना रहा। विशेषज्ञों ने बताया कि ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंधों में ढील मिलने से महंगाई की चिंताएँ कम हुईं, जिससे घरेलू बॉन्ड यील्ड में नरमी आई और बैंकिंग शेयरों को सहारा मिला। बेहतर कमाई की उम्मीदों से मेटल शेयरों में भी बढ़त दर्ज हुई।
हालाँकि, आईटी शेयरों में आई तेज गिरावट ने इस बढ़त का अधिकांश असर निष्प्रभावी कर दिया। अमेरिका में आव्रजन नीति पर सख्ती के चलते वीज़ा अपॉइंटमेंट रोके जाने से आईटी कंपनियों के मार्जिन पर दबाव की आशंका फिर उभर आई है।
आगे क्या
विशेषज्ञों के अनुसार, निवेशक अब अमेरिकी 'कोर पीसीई' आँकड़ों का इंतजार कर रहे हैं, जो ब्याज दरों की दिशा पर अधिक स्पष्टता देंगे। यदि कोर रीडिंग सीमित रहती है, तो यह संकेत होगा कि हालिया ऊर्जा-मूल्य वृद्धि अस्थायी थी — जिससे उभरते बाजारों में निवेश प्रवाह बढ़ने की उम्मीद है और भारतीय बाजारों को राहत मिल सकती है।