26 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

आईआईटी दिल्ली में 160 छात्रों की आत्महत्या: ऋषिकेश कुमार की मौत के बाद सुधार की माँग तेज़

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
आईआईटी दिल्ली में 160 छात्रों की आत्महत्या: ऋषिकेश कुमार की मौत के बाद सुधार की माँग तेज़

सारांश

आईआईटी दिल्ली में एमएससी छात्र ऋषिकेश कुमार की आत्महत्या ने एक गहरे संकट को उजागर किया है — संस्थान में अब तक 160 छात्र जान गँवा चुके हैं। छात्र अब केवल शोक नहीं मना रहे, वे व्यवस्था से लड़ रहे हैं और एक स्वतंत्र मानसिक स्वास्थ्य सेल की माँग कर रहे हैं।

मुख्य बातें

आईआईटी दिल्ली में अब तक कुल 160 छात्र आत्महत्या कर चुके हैं; पिछले 30 महीनों में 8 मामले सामने आए।
एमएससी छात्र ऋषिकेश कुमार की आत्महत्या के बाद 26 अगस्त को परिसर में विरोध प्रदर्शन शुरू हुआ।
बीटेक छात्र सक्षम सहित प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन से स्वतंत्र मानसिक स्वास्थ्य सेल की माँग की।
छात्रों ने स्पष्ट किया कि किसी का इस्तीफा समाधान नहीं — शिक्षा व्यवस्था में संरचनात्मक सुधार चाहिए।
अकादमिक दबाव, इंटर्नशिप और प्लेसमेंट की चिंता को छात्रों की मानसिक पीड़ा का प्रमुख कारण बताया गया।

आईआईटी दिल्ली में एमएससी छात्र ऋषिकेश कुमार की आत्महत्या के बाद परिसर में छात्रों का आक्रोश सड़कों पर उतर आया है। 26 अगस्त 2026 को छात्रों ने शिक्षा व्यवस्था में आमूल-चूल सुधार और एक स्वतंत्र मानसिक स्वास्थ्य सेल की स्थापना की माँग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। बीटेक द्वितीय वर्ष के छात्र सक्षम के अनुसार, संस्थान में अब तक 160 छात्र आत्महत्या कर चुके हैं, और अकेले पिछले 30 महीनों में यह संख्या 8 रही है।

ऋषिकेश कुमार: एक साथी, एक कड़ी

सक्षम ने बताया कि ऋषिकेश कुमार भौतिकी विभाग के छात्र थे और पूर्वांचल कम्युनिटी से जुड़े थे। दोनों की पहली मुलाकात आईआईटी दिल्ली में आयोजित सरस्वती पूजा के दौरान हुई थी, जहाँ ऋषिकेश ने स्टेज होस्ट की भूमिका निभाई थी। सक्षम ने कहा कि वे बिहार से थे और पूर्वांचल कम्युनिटी के सक्रिय कार्यकर्ता थे।

सक्षम के अनुसार, दोनों के बीच संबंध मुख्यतः अकादमिक था — जब भी उन्हें भौतिकी के प्रोजेक्ट में सहायता चाहिए होती, वे ऋषिकेश से मार्गदर्शन लेते थे। उन्होंने कहा, 'उनकी आत्महत्या की खबर मिलने के बाद छात्रों में आक्रोश काफी बढ़ गया है।'

छात्रों की प्रमुख माँगें

प्रदर्शनकारी छात्रों ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन केवल एक व्यक्ति के लिए नहीं, बल्कि उस पूरी व्यवस्था के विरुद्ध है जो छात्रों को असहाय महसूस कराती है। उनकी प्रमुख माँगें इस प्रकार हैं:

पहली, एक स्वतंत्र मानसिक स्वास्थ्य सेल की स्थापना — जो प्रशासन से पूरी तरह अलग हो और जहाँ छात्र बिना किसी डर के अपनी बात रख सकें। दूसरी, शिक्षा व्यवस्था में संरचनात्मक सुधार ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। सक्षम ने साफ कहा कि 'दिखावे के लिए किसी का इस्तीफा समाधान नहीं है — हम व्यवस्था में गहरी सफाई चाहते हैं।'

आम जनता पर असर: दबाव का दुष्चक्र

सक्षम ने उस मनोवैज्ञानिक दबाव का विस्तृत विवरण दिया जो आईआईटी छात्रों पर हावी रहता है। देश के सर्वश्रेष्ठ मेधावी छात्र जब यहाँ आते हैं, तो परिवार और समाज की अपेक्षाएँ पहले से ही उन पर भारी होती हैं। इसके ऊपर अकादमिक दबाव, इंटर्नशिप, प्लेसमेंट और प्रोजेक्ट्स का बोझ उन्हें कोने में धकेल देता है।

उन्होंने कहा कि जब एक छात्र को लगता है कि 'न प्रशासन सुन रहा, न दोस्त समझ रहे, न अकादमिक ठीक हो रहा, न इंटर्नशिप मिल रही' — तो यह निराशा आत्महत्या जैसे विचारों को जन्म देती है। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर के उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्र मानसिक स्वास्थ्य एक गंभीर नीतिगत प्रश्न बन चुका है।

सरकार और प्रशासन से सवाल

सक्षम ने सरकार से सीधा सवाल पूछा — 'क्या एक और छात्र की आत्महत्या का इंतजार किया जाएगा?' उन्होंने कहा कि इस्तीफा माँगना न्यूनतम कदम है, असली बदलाव तंत्र में होना चाहिए। गौरतलब है कि 30 महीनों में 8 आत्महत्याएँ यह दर्शाती हैं कि मौजूदा व्यवस्था में छात्रों की पीड़ा को समय पर पहचानने का कोई प्रभावी तंत्र नहीं है।

छात्रों ने यह भी स्पष्ट किया कि जब तक संस्थान प्रशासन ठोस और सत्यापन-योग्य सुधारों की घोषणा नहीं करता, तब तक यह प्रदर्शन जारी रहेगा। आने वाले दिनों में यह आंदोलन देश के अन्य आईआईटी परिसरों तक फैल सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि देश की उच्च-प्रतिस्पर्धी शिक्षा प्रणाली की संरचनात्मक खामी का प्रमाण है। हर बार एक छात्र की मौत के बाद संवेदना जताई जाती है, समितियाँ बनती हैं — और फिर चुप्पी छा जाती है। असली सवाल यह है कि क्या आईआईटी प्रशासन और शिक्षा मंत्रालय के पास मानसिक स्वास्थ्य के लिए कोई सत्यापन-योग्य नीति है, या यह केवल कागज़ी घोषणाओं तक सीमित है। जब तक मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को प्रशासनिक नियंत्रण से मुक्त नहीं किया जाता और छात्रों को निर्भय होकर मदद माँगने का माहौल नहीं दिया जाता, यह संकट थमने वाला नहीं।
RashtraPress
26 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आईआईटी दिल्ली में अब तक कितने छात्रों ने आत्महत्या की है?
छात्र सक्षम के बयान के अनुसार आईआईटी दिल्ली में अब तक कुल 160 छात्र आत्महत्या कर चुके हैं। इनमें से 8 मामले अकेले पिछले 30 महीनों में सामने आए हैं।
ऋषिकेश कुमार कौन थे और उनकी मृत्यु क्यों चर्चा में है?
ऋषिकेश कुमार आईआईटी दिल्ली के भौतिकी विभाग के एमएससी छात्र थे और पूर्वांचल कम्युनिटी से जुड़े थे। उनकी आत्महत्या के बाद परिसर में बड़े पैमाने पर छात्र आंदोलन शुरू हो गया, जो शिक्षा व्यवस्था में सुधार की माँग कर रहा है।
छात्र प्रदर्शनकारी क्या माँग कर रहे हैं?
छात्र मुख्य रूप से एक स्वतंत्र मानसिक स्वास्थ्य सेल की माँग कर रहे हैं जो प्रशासन से पूरी तरह अलग हो। इसके साथ ही वे शिक्षा व्यवस्था में संरचनात्मक सुधार चाहते हैं और किसी के इस्तीफे को पर्याप्त समाधान नहीं मानते।
आईआईटी छात्रों में आत्महत्या के विचार क्यों आते हैं?
छात्र सक्षम के अनुसार अकादमिक दबाव, इंटर्नशिप न मिलना, प्लेसमेंट की चिंता, परिवार की अपेक्षाएँ और प्रशासन की अनसुनी मिलकर छात्रों को मानसिक रूप से असहाय बना देती हैं। जब हर तरफ से रास्ता बंद लगता है, तो आत्महत्या जैसे विचार उभरते हैं।
क्या यह प्रदर्शन जारी रहेगा?
छात्रों ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक संस्थान प्रशासन ठोस और सत्यापन-योग्य सुधारों की घोषणा नहीं करता, प्रदर्शन जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि 'व्यवस्था में गहरी सफाई' के बिना आंदोलन समाप्त नहीं होगा।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 20 घंटे पहले
  2. कल
  3. 4 दिन पहले
  4. 4 दिन पहले
  5. 3 महीने पहले
  6. 4 महीने पहले
  7. 4 महीने पहले
  8. 5 महीने पहले