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एनआईटी कुरुक्षेत्र में आत्महत्या की घटनाएं: हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने निदेशक से मांगी रिपोर्ट

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एनआईटी कुरुक्षेत्र में आत्महत्या की घटनाएं: हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने निदेशक से मांगी रिपोर्ट

सारांश

हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने एनआईटी कुरुक्षेत्र में फरवरी से अप्रैल के बीच हुई कई आत्महत्या घटनाओं पर स्वतः संज्ञान लिया। आयोग ने संस्थान के निदेशक और डीसी से रिपोर्ट मांगी है। अनुच्छेद 21 के उल्लंघन का हवाला देते हुए 19 मई को अगली सुनवाई तय की गई है।

मुख्य बातें

हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने एनआईटी कुरुक्षेत्र में आत्महत्या की घटनाओं का स्वतः संज्ञान लेकर जांच शुरू की।
फरवरी से अप्रैल 2025 के बीच संस्थान में पांच से अधिक आत्महत्या या आत्महत्या के प्रयास की घटनाएं दर्ज हुईं।
18 अप्रैल को एक प्रथम वर्ष के छात्र ने हॉस्टल की पांचवीं मंजिल से कूदने का प्रयास किया, उसे बचा लिया गया।
आयोग ने प्रशासन द्वारा केवल दो प्रोफेसरों के तबादले को अपर्याप्त और अप्रभावी करार दिया।
न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) ललित बत्रा की अध्यक्षता वाले आयोग ने अनुच्छेद 21 के उल्लंघन का हवाला दिया।
मामले की अगली सुनवाई 19 मई 2025 को निर्धारित की गई है, जिसमें निदेशक और डीसी को रिपोर्ट पेश करनी होगी।

चंडीगढ़, 23 अप्रैलहरियाणा मानवाधिकार आयोग ने राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) कुरुक्षेत्र में लगातार सामने आ रही आत्महत्या और आत्महत्या के प्रयास की घटनाओं का स्वतः संज्ञान लेते हुए गंभीर जांच प्रक्रिया शुरू की है। आयोग ने संस्थान के निदेशक और संबंधित जिला उपायुक्त से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। मामले की अगली सुनवाई 19 मई को निर्धारित की गई है।

मुख्य घटनाक्रम: एक के बाद एक सामने आईं घटनाएं

फरवरी और मार्च 2025 में एनआईटी कुरुक्षेत्र में दो छात्रों की मौत के मामले सामने आए। इसके बाद 8 अप्रैल को एक और घटना दर्ज की गई। 16 अप्रैल को एक द्वितीय वर्ष के छात्र का शव उसके हॉस्टल कमरे में मिला, जिसके बाद छात्रों ने प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए जोरदार विरोध प्रदर्शन किया।

इसके महज दो दिन बाद, 18 अप्रैल को एक प्रथम वर्ष के छात्र ने हॉस्टल की पांचवीं मंजिल से कूदकर आत्महत्या का प्रयास किया। समय रहते उसे बचा लिया गया और अस्पताल में भर्ती कराया गया। इन घटनाओं की श्रृंखला ने पूरे देश का ध्यान खींचा और मानवाधिकार आयोग को हस्तक्षेप करने पर मजबूर किया।

आयोग की कड़ी टिप्पणी और संस्थान पर सवाल

आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) ललित बत्रा, सदस्य कुलदीप जैन और दीप भाटिया ने कहा कि इतनी कम अवधि में इतनी घटनाओं का सामने आना छात्र सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य और संस्थागत जवाबदेही पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है।

आयोग ने स्पष्ट रूप से कहा कि संस्थान द्वारा अब तक उठाए गए कदम — जिसमें केवल दो प्रोफेसरों का तबादला शामिल है — न तो पर्याप्त हैं और न ही प्रभावी। आयोग ने यह भी रेखांकित किया कि इन घटनाओं से संस्थान में मानसिक स्वास्थ्य सहायता, काउंसलिंग सेवाओं, निगरानी व्यवस्था और संकट प्रबंधन तंत्र में गंभीर कमियां उजागर होती हैं।

संवैधानिक और मानवाधिकार दायित्व

आयोग ने जोर देकर कहा कि किसी भी शैक्षणिक संस्थान की जिम्मेदारी केवल अकादमिक शिक्षा तक सीमित नहीं है। छात्रों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य की रक्षा करना भी संस्थान का दायित्व है।

आयोग ने कहा कि इन घटनाओं की पुनरावृत्ति भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन, गरिमा और मानसिक स्वास्थ्य के अधिकार का उल्लंघन है। साथ ही यह मामला मानव अधिकारों के सार्वभौमिक घोषणापत्र के तहत भारत की अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं से भी जुड़ा हुआ है।

आगे की कार्रवाई और अपेक्षाएं

आयोग ने एनआईटी कुरुक्षेत्र के निदेशक और संबंधित जिला उपायुक्त को निर्देश दिया है कि वे घटनाओं की विस्तृत जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करें। इसमें संस्थान में उपलब्ध काउंसलिंग सुविधाओं, हॉस्टल सुरक्षा व्यवस्था और संकट प्रबंधन प्रोटोकॉल का पूरा ब्योरा शामिल करने को कहा गया है।

मामले की अगली सुनवाई 19 मई 2025 को होगी। उम्मीद है कि इस सुनवाई में आयोग संस्थान से ठोस सुधारात्मक कदमों की मांग करेगा और यदि जवाब संतोषजनक नहीं रहा तो उच्चतर कार्रवाई की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि देश के उच्च तकनीकी शिक्षा तंत्र में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति उदासीनता का प्रतीक है। मानवाधिकार आयोग का हस्तक्षेप स्वागतयोग्य है, लेकिन असली परीक्षा तब होगी जब संस्थान ठोस और दीर्घकालिक सुधार लागू करे — न कि महज तबादलों से काम चलाए।
RashtraPress
8 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने एनआईटी कुरुक्षेत्र के बारे में क्या कदम उठाया?
हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने एनआईटी कुरुक्षेत्र में लगातार हो रही आत्महत्या की घटनाओं का स्वतः संज्ञान लिया और संस्थान के निदेशक व जिला उपायुक्त से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। मामले की अगली सुनवाई 19 मई 2025 को होगी।
एनआईटी कुरुक्षेत्र में कितनी आत्महत्या की घटनाएं हुईं?
फरवरी और मार्च में दो छात्रों की मौत हुई, 8 अप्रैल को एक और घटना दर्ज हुई, 16 अप्रैल को एक छात्र का शव हॉस्टल में मिला और 18 अप्रैल को एक प्रथम वर्ष के छात्र ने पांचवीं मंजिल से कूदने का प्रयास किया। कुल मिलाकर कुछ महीनों में पांच से अधिक घटनाएं सामने आईं।
एनआईटी कुरुक्षेत्र प्रशासन ने इन घटनाओं पर क्या कार्रवाई की?
प्रशासन ने अब तक केवल दो प्रोफेसरों का तबादला किया है। हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने इसे अपर्याप्त बताते हुए कहा कि यह कदम न तो पर्याप्त है और न ही प्रभावी।
इन घटनाओं का संविधान के अनुच्छेद 21 से क्या संबंध है?
आयोग ने कहा कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद 21 प्रत्येक नागरिक को जीवन, गरिमा और मानसिक स्वास्थ्य का अधिकार देता है। संस्थान में इन घटनाओं की पुनरावृत्ति इस अधिकार के उल्लंघन को दर्शाती है।
एनआईटी कुरुक्षेत्र में छात्रों की मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का कारण क्या है?
आयोग के अनुसार संस्थान में मानसिक स्वास्थ्य सहायता, काउंसलिंग सेवाओं, निगरानी व्यवस्था और संकट प्रबंधन तंत्र में गंभीर कमियां हैं। इन्हीं कमियों के कारण छात्र मानसिक दबाव में इस तरह के कदम उठाने पर मजबूर हो रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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