हिजाब फैसले पर ओवैसी की आलोचना के बाद संजय निरुपम का पलटवार: 'मुसलमानों की भावनाएं भड़काकर राजनीति करते हैं'
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना नेता संजय निरुपम ने 26 अगस्त 2026 को नागपुर में मीडिया से बातचीत के दौरान एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी पर तीखा हमला बोला। यह प्रतिक्रिया तब आई जब ओवैसी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के हिजाब संबंधी फैसले को संविधान के विरुद्ध करार दिया था। निरुपम ने आरोप लगाया कि ओवैसी मुसलमानों की भावनाओं को लगातार भड़काकर अपनी राजनीतिक रोटियाँ सेंकते हैं।
ओवैसी पर निरुपम का आरोप
निरुपम ने कहा कि ओवैसी एक कट्टरपंथी सोच वाले नेता हैं जो धर्म के नाम पर देश के कानूनों की अनदेखी करते हैं। उनके अनुसार, ओवैसी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। निरुपम ने स्पष्ट किया कि वे व्यक्तिगत रूप से हिजाब के विरोधी नहीं हैं, लेकिन उनका मानना है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले का — जिसमें सार्वजनिक स्थानों पर हिजाब के प्रदर्शन पर रोक की बात कही गई है — देश के कानून का सम्मान करने वाले हर नागरिक को पालन करना चाहिए।
कृति सेनन विवाद पर महिला स्वतंत्रता की पैरवी
भाजपा सांसद कंगना रनौत द्वारा एक राखी विज्ञापन में अभिनेत्री कृति सेनन के पहनावे की आलोचना और विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा कृति सेनन के समर्थन पर भी निरुपम ने अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि महिलाओं की पसंद और उनकी स्वतंत्रता का सम्मान होना चाहिए और आज महिलाएं दुनिया का नेतृत्व कर रही हैं, जो स्वागत योग्य है। हालाँकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि आज़ादी के नाम पर मर्यादा का ध्यान रखना ज़रूरी है और अश्लीलता को बढ़ावा नहीं दिया जाना चाहिए।
राहुल गांधी पर हिमंता के बयान पर प्रतिक्रिया
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के राहुल गांधी संबंधी बयान पर निरुपम ने संतुलित रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि वे राहुल गांधी को 'पागल' जैसे शब्दों से नहीं नवाज़ेंगे, लेकिन यह ज़रूर माना कि राहुल गांधी के बयानों में अक्सर संदर्भहीनता और असंगति होती है, जिसके कारण आम जनता उनसे नहीं जुड़ पाती। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष के नेता के खिलाफ उस स्तर तक जाकर टिप्पणी करना उचित नहीं लगता।
न्यूयॉर्क मेयर की टिप्पणी पर पलटवार
न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी द्वारा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के कार्यक्रम पर की गई आपत्तिजनक टिप्पणी को निरुपम ने खारिज किया। उन्होंने कहा कि ममदानी मूल रूप से भारतीय हैं, लेकिन उनकी सोच कट्टर वामपंथी और सनातन-विरोधी है। निरुपम के अनुसार, ऐसे लोगों ने हमेशा हिंदुत्व और सनातन परंपरा का विरोध किया है, इसलिए उनकी आपत्ति की कोई अहमियत नहीं। उन्होंने कहा कि संघ प्रमुख का दुनियाभर में सनातन का प्रचार करना सराहनीय है और इसे किसी विदेशी नेता की मंज़ूरी की ज़रूरत नहीं।
आगे का परिदृश्य
इलाहाबाद हाईकोर्ट का हिजाब फैसला और उस पर उठे राजनीतिक विवाद आने वाले दिनों में और तीखे होने की संभावना है। निरुपम के बयान ने स्पष्ट कर दिया है कि शिवसेना इस मुद्दे पर एआईएमआईएम की राजनीति को सीधे चुनौती देने के मूड में है।