कर्नाटक एसआईआर अभियान: पहले दिन 291 मृत और 116 स्थानांतरित मतदाताओं की पहचान, 12.48 लाख फॉर्म वितरित
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक में मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) अभियान के पहले दिन — 30 जून 2026 — राज्यभर में 12.48 लाख से अधिक एन्यूमरेशन फॉर्म वितरित किए गए, जो राज्य के कुल 5.54 करोड़ पंजीकृत मतदाताओं का 2.25 प्रतिशत है। कर्नाटक मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) कार्यालय ने मंगलवार को जारी अपने दैनिक प्रेस वक्तव्य में यह जानकारी दी।
पहले दिन की मुख्य पहचान
अभियान के पहले ही दिन 291 मृत मतदाताओं और 116 स्थायी रूप से दूसरी जगह शिफ्ट हो चुके मतदाताओं की पहचान की गई। इसके अलावा 77 ऐसे मतदाता मिले जिनका नाम पहले से किसी अन्य स्थान पर भी दर्ज था। 2 मामलों को 'अन्य' श्रेणी में रखा गया, जबकि बूथ लेवल अधिकारियों ने एएसडीडीओ श्रेणी के तहत 488 मामलों की अलग से पहचान की। 2 मतदाताओं से संपर्क नहीं हो सका क्योंकि वे घर पर उपलब्ध नहीं थे।
डिजिटलीकरण की प्रगति
फील्ड कार्य के साथ-साथ भरे हुए एन्यूमरेशन फॉर्मों को डिजिटल करने का काम भी पहले दिन से शुरू हो गया। 47,817 फॉर्म डिजिटल किए गए, जो कुल पंजीकृत मतदाताओं का 0.09 प्रतिशत है। इसके अतिरिक्त, 6,840 मतदाताओं ने अपने फॉर्म ऑनलाइन जमा किए, जो कुल मतदाताओं का 0.01 प्रतिशत है। गौरतलब है कि अभियान की तैयारी के तहत 91.61 प्रतिशत मतदाताओं की मैपिंग पहले ही पूरी की जा चुकी थी।
अभियान का ढाँचा और समयसीमा
16 जून 2026 तक कर्नाटक में 5,54,32,314 पंजीकृत मतदाता हैं, जो सभी इस संशोधन अभियान के दायरे में हैं। बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) द्वारा घर-घर जाकर फॉर्म वितरण और डिजिटलीकरण का कार्य 30 जून से 29 जुलाई 2026 तक चलेगा। 5 अगस्त को मतदाता सूची का मसौदा जारी किया जाएगा, जिसके बाद 4 सितंबर तक दावे और आपत्तियाँ दर्ज कराई जा सकेंगी। अंतिम मतदाता सूची 7 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित की जाएगी।
मुख्यमंत्री और著名 हस्तियों की भागीदारी
मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने मंगलवार को सदाशिवनगर स्थित अपने आवास पर स्वयं एन्यूमरेशन फॉर्म भरकर अभियान की प्रतीकात्मक शुरुआत की। उन्होंने सभी योग्य मतदाताओं से अपील की कि वे अपने मतदान अधिकारों की सुरक्षा के लिए इस प्रक्रिया को समय पर पूरा करें और इस बात पर जोर दिया कि सरकारी सुविधाओं का लाभ उठाने के लिए मतदाता पंजीकरण आवश्यक है।
बुकर पुरस्कार विजेता कन्नड़ लेखिका बानू मुश्ताक ने भी अभियान में भाग लिया और इसे 'एक सरल और सीधी प्रक्रिया' बताया। उन्होंने कहा कि उनके व्यक्तिगत अनुभव ने यह आशंका निर्मूल कर दी कि यह अभियान नागरिकों को परेशान करने के लिए शुरू किया गया था। उन्होंने अधिकारियों से आग्रह किया कि वे एन्यूमरेशन प्रक्रिया के दौरान जनता का धैर्यपूर्वक मार्गदर्शन करें।
आगे क्या होगा
यह अभियान ऐसे समय में आया है जब मतदाता सूची की शुद्धता को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज है। सीईओ कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि पहले दिन की पहचान प्रारंभिक है और आने वाले हफ्तों में यह संख्या बढ़ने की संभावना है। अभियान की सफलता काफी हद तक बीएलओ की पहुँच और मतदाताओं की सक्रिय भागीदारी पर निर्भर करेगी।