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कर्नाटक एसआईआर अभियान: 86.32% जनगणना प्रपत्र वितरित, 85,088 मृत मतदाताओं की पहचान

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कर्नाटक एसआईआर अभियान: 86.32% जनगणना प्रपत्र वितरित, 85,088 मृत मतदाताओं की पहचान

सारांश

कर्नाटक में एसआईआर अभियान तेज़ी से आगे बढ़ रहा है — 86.32% जनगणना प्रपत्र वितरित हो चुके हैं और 85,088 मृत मतदाताओं की पहचान की जा चुकी है। 29 जुलाई की समयसीमा से पहले यह अभियान राज्य की 5.54 करोड़ से अधिक मतदाताओं वाली सूची को साफ और सटीक बनाने की कोशिश है।

मुख्य बातें

कर्नाटक में 4,78,47,260 जनगणना प्रपत्र वितरित — कुल मतदाताओं का 86.32% ।
26,668 मतदान केंद्रों ( 45.16% ) पर शत-प्रतिशत वितरण पूरा।
सत्यापन में 85,088 मृत मतदाता और 1,13,697 स्थानांतरित मतदाता चिह्नित।
डिजिटलीकरण अब तक 74,80,396 प्रपत्रों का — कुल का 13.49% ।
अभियान 30 जून से 29 जुलाई 2026 तक; 16 जून 2026 तक कुल 5,54,32,314 पंजीकृत मतदाता।

कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) कार्यालय ने 9 जुलाई 2026 को जारी आधिकारिक आँकड़ों में बताया कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के तहत राज्य भर में कुल 4,78,47,260 जनगणना प्रपत्र (ईएफ) वितरित किए जा चुके हैं, जो पंजीकृत मतदाताओं का 86.32 प्रतिशत है। इस प्रक्रिया में अब तक 85,088 मृत मतदाताओं की पहचान की जा चुकी है, जो मतदाता सूची की सफाई की दिशा में एक उल्लेखनीय कदम है।

मुख्य घटनाक्रम

26,668 मतदान केंद्रों — यानी कुल केंद्रों के 45.16 प्रतिशत — पर जनगणना प्रपत्रों का शत-प्रतिशत वितरण पूरा हो चुका है। इसके अलावा, 14,013 मतदान केंद्रों (23.73 प्रतिशत) पर 90 प्रतिशत से अधिक वितरण दर्ज किया गया है। गौरतलब है कि 16 जून 2026 तक कर्नाटक में कुल 5,54,32,314 पंजीकृत मतदाता थे।

डिजिटलीकरण की स्थिति

अब तक 74,80,396 जनगणना प्रपत्रों का डिजिटलीकरण किया जा चुका है, जो कुल मतदाताओं का 13.49 प्रतिशत है। केवल 6 मतदान केंद्रों का शत-प्रतिशत डिजिटलीकरण पूरा हुआ है, जबकि 150 मतदान केंद्रों ने 90 प्रतिशत का आँकड़ा पार किया है। मतदाताओं द्वारा 1,86,321 प्रपत्र यानी 0.34 प्रतिशत ऑनलाइन जमा किए गए हैं।

सत्यापन में सामने आए तथ्य

सत्यापन प्रक्रिया के दौरान अधिकारियों ने एएसडीडीओ (अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत और अन्य) श्रेणी के अंतर्गत 2,20,549 मामले दर्ज किए हैं। इनमें 6,544 मतदाता लापता या अनुपस्थित पाए गए और 1,13,697 मतदाता अपने पंजीकृत पते से स्थायी रूप से स्थानांतरित हो चुके थे। इसके अतिरिक्त, 14,370 व्यक्ति ऐसे पाए गए जो पहले से किसी अन्य स्थान पर पंजीकृत थे, और 850 मामले अन्य श्रेणियों में वर्गीकृत किए गए।

अभियान की समयसीमा और उद्देश्य

घर-घर जाकर गणना और प्रपत्रों के डिजिटलीकरण का कार्य 30 जून 2026 से प्रारंभ हुआ है और 29 जुलाई 2026 तक जारी रहेगा। सभी बूथ स्तरीय अधिकारियों (बीएलओ) को प्रपत्र मुद्रित कर वितरण हेतु उपलब्ध करा दिए गए हैं। इस पूरे अभियान का उद्देश्य आगामी चुनावों से पहले मतदाता सूचियों को सटीक और अद्यतन बनाना है, ताकि अयोग्य या निष्क्रिय मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जा सकें और वास्तविक मतदाताओं का पंजीकरण सुनिश्चित हो सके।

संपादकीय दृष्टिकोण

088 मृत मतदाताओं की पहचान यह सवाल उठाती है कि ये नाम पिछले चुनावों में मतदाता सूची में क्यों बने रहे — और क्या यह सफाई अभियान पर्याप्त है या महज़ एक नियमित प्रशासनिक कवायद। एसआईआर जैसी प्रक्रियाएँ तभी सार्थक होती हैं जब डिजिटलीकरण की गति — अभी मात्र 13.49% — वितरण की गति के साथ कदम मिलाए। 29 जुलाई की समयसीमा और डिजिटलीकरण के बीच की खाई बताती है कि असली चुनौती प्रपत्र बाँटना नहीं, बल्कि उन्हें सत्यापन-योग्य डेटा में बदलना है।
RashtraPress
9 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कर्नाटक में एसआईआर अभियान क्या है?
एसआईआर यानी विशेष गहन पुनरीक्षण एक चुनाव आयोग की प्रक्रिया है जिसके तहत बूथ स्तरीय अधिकारी घर-घर जाकर मतदाता सूची को सत्यापित और अद्यतन करते हैं। कर्नाटक में यह अभियान 30 जून से 29 जुलाई 2026 के बीच चल रहा है।
कर्नाटक में अब तक कितने जनगणना प्रपत्र वितरित हुए हैं?
9 जुलाई 2026 तक कुल 4,78,47,260 जनगणना प्रपत्र वितरित किए जा चुके हैं, जो राज्य के कुल पंजीकृत मतदाताओं का 86.32 प्रतिशत है।
कर्नाटक एसआईआर में कितने मृत मतदाताओं की पहचान हुई?
सत्यापन प्रक्रिया के दौरान अब तक 85,088 मृत मतदाताओं की पहचान की गई है। इसके अलावा 1,13,697 मतदाता स्थायी रूप से अपने पंजीकृत पते से स्थानांतरित पाए गए।
डिजिटलीकरण की प्रगति कहाँ तक पहुँची है?
अब तक 74,80,396 जनगणना प्रपत्रों का डिजिटलीकरण हुआ है, जो कुल मतदाताओं का 13.49 प्रतिशत है। केवल 6 मतदान केंद्रों का शत-प्रतिशत डिजिटलीकरण पूरा हुआ है।
यह अभियान कब तक पूरा होगा और इसका उद्देश्य क्या है?
घर-घर गणना और डिजिटलीकरण का कार्य 29 जुलाई 2026 तक जारी रहेगा। इसका उद्देश्य आगामी चुनावों से पहले मतदाता सूची को सटीक बनाना और अयोग्य या निष्क्रिय मतदाताओं के नाम हटाना है।
राष्ट्र प्रेस
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