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क्या एसआईआर फेज-2 में 12 राज्यों में 99.53 प्रतिशत गणना प्रपत्र वितरित हो चुके हैं?

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क्या एसआईआर फेज-2 में 12 राज्यों में 99.53 प्रतिशत गणना प्रपत्र वितरित हो चुके हैं?

सारांश

बिहार के बाद, 12 राज्यों में एसआईआर प्रक्रिया ने तेजी से गति पकड़ी है। भारतीय चुनाव आयोग के अनुसार, 99.53 प्रतिशत गणना प्रपत्र वितरित किए जा चुके हैं, जो कि डिजिटल इंडिया के लक्ष्य की ओर एक महत्वपूर्ण कदम है। जानें इस प्रक्रिया के बारे में और क्या है इसके महत्व।

मुख्य बातें

99.53 प्रतिशत गणना प्रपत्र वितरित किए जा चुके हैं।
डिजिटलीकरण दर 78.97 प्रतिशत तक पहुँच गई है।
गोवा और लक्षद्वीप में 100 प्रतिशत वितरण हुआ है।
उत्तर प्रदेश में 99.74 प्रतिशत वितरण किया गया है।
चुनाव आयोग ने सत्यापन में तेजी लाने का आग्रह किया है।

नई दिल्ली, 29 नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। बिहार के बाद, देश के 12 राज्यों में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया में तेजी से प्रगति हो रही है। भारतीय चुनाव आयोग ने शनिवार को एक दैनिक बुलेटिन जारी कर यह जानकारी दी कि 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 99.53 प्रतिशत गणना प्रपत्र (ईएफ) पहले ही वितरित किए जा चुके हैं।

दैनिक बुलेटिन के अनुसार, देशभर में ईएफ वितरण 99.53 प्रतिशत तक पहुँच गया है। 4 नवंबर से 4 दिसंबर तक चलने वाले गणना चरण के दौरान, 50.97 करोड़ योग्य मतदाताओं में से कुल 50.73 करोड़ को ईएफ पहले ही दिए जा चुके हैं। ईएफ का डिजिटलीकरण भी तेजी से बढ़ रहा है। अब तक 40.25 करोड़ फॉर्म डिजिटल किए जा चुके हैं, जिससे कुल डिजिटलीकरण दर 78.97 प्रतिशत हो गई है।

गोवा और लक्षद्वीप में ईएफ का वितरण पूरी तरह से 100 प्रतिशत दर्ज किया गया है। इसके बाद अंडमान और निकोबार में 99.99 प्रतिशत, मध्य प्रदेश में 99.9 प्रतिशत, पश्चिम बंगाल में 99.85 प्रतिशत और गुजरात में 99.82 प्रतिशत वितरण हुआ है। मतदाता संख्या के हिसाब से सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश ने 15.40 करोड़ से ज्यादा मतदाताओं को कवर करते हुए 99.74 प्रतिशत ईएफ वितरण हासिल किया है।

केरल 98.4 प्रतिशत, पुडुचेरी 98.39 प्रतिशत, और तमिलनाडु 98.34 प्रतिशत के साथ सबसे कम प्रदर्शन करने वाले राज्य हैं। पश्चिम बंगाल में 7.65 करोड़ या 99.85 प्रतिशत ईएफ वितरित किए जा चुके हैं। चुनाव आयोग के एक बयान में कहा गया है कि राज्य में 91.77 प्रतिशत ईएफ का डिजिटलीकरण किया जा चुका है।

डिजिटलीकरण के मामले में लक्षद्वीप 100 प्रतिशत के साथ सबसे आगे है, उसके बाद गोवा 95.17 प्रतिशत और राजस्थान 92.66 प्रतिशत के साथ दूसरे स्थान पर हैं।

उत्तर प्रदेश में ईएफ का डिजिटलीकरण सबसे धीमा 60.91 प्रतिशत दर्ज किया गया है, उसके बाद केरल (73.02 प्रतिशत) का स्थान है।

चुनाव आयोग ने कहा कि मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों से सत्यापन और डिजिटलीकरण में तेजी लाने के लिए और अधिक बूथ स्तरीय एजेंट नियुक्त करने का आग्रह किया गया है। चुनाव आयोग ने एक बयान में कहा कि राजस्थान के आंकड़ों में अंता विधानसभा क्षेत्र शामिल नहीं है, जहाँ उपचुनाव के कारण संशोधन स्थगित कर दिया गया था।

आयोग ने कहा कि जैसे-जैसे संशोधन प्रक्रिया 4 दिसंबर की समय सीमा की ओर बढ़ेगी, एजेंसी निर्धारित बुलेटिन जारी करती रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह लोकतंत्र को मजबूत बनाने का एक महत्वपूर्ण कदम भी है। चुनाव आयोग के प्रयासों से, डिजिटल इंडिया के लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद मिलेगी।
RashtraPress
4 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एसआईआर प्रक्रिया का उद्देश्य क्या है?
एसआईआर प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य मतदाता सूची का गहन पुनरीक्षण करना और सुनिश्चित करना है कि सभी योग्य मतदाता सूची में शामिल हों।
डिजिटलीकरण की प्रक्रिया में क्या शामिल है?
डिजिटलीकरण की प्रक्रिया में गणना प्रपत्रों को डिजिटल फॉर्मेट में परिवर्तित करना और उनका सुरक्षित भंडारण सुनिश्चित करना शामिल है।
कौन से राज्य सबसे अधिक और सबसे कम वितरण प्रतिशत के साथ हैं?
गोवा और लक्षद्वीप में 100 प्रतिशत वितरण हुआ है, जबकि केरल में 98.4 प्रतिशत के साथ सबसे कम प्रदर्शन किया गया है।
चुनाव आयोग का अगला कदम क्या होगा?
चुनाव आयोग ने और अधिक बूथ स्तरीय एजेंटों की नियुक्ति का आग्रह किया है ताकि सत्यापन और डिजिटलीकरण में तेजी लाई जा सके।
इस प्रक्रिया का लोकतंत्र पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
यह प्रक्रिया लोकतंत्र को मजबूत करेगी, जिससे अधिक से अधिक लोग मतदान में भाग ले सकेंगे।
राष्ट्र प्रेस
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