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कर्नाटक एसआईआर: पाँच दिनों में 2.78 करोड़ एन्यूमरेशन फॉर्म बाँटे, 50.19% लक्ष्य पूरा

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कर्नाटक एसआईआर: पाँच दिनों में 2.78 करोड़ एन्यूमरेशन फॉर्म बाँटे, 50.19% लक्ष्य पूरा

सारांश

कर्नाटक में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत पाँच दिनों में 50% से अधिक एन्यूमरेशन फॉर्म बाँटे जा चुके हैं। लेकिन केंद्रीय मंत्री कुमारस्वामी की रद्द करने की माँग और BJP की शिकायत ने इस प्रशासनिक अभियान को राजनीतिक रंग दे दिया है।

मुख्य बातें

2,78,21,970 एन्यूमरेशन फॉर्म वितरित — कुल मतदाताओं का 50.19 प्रतिशत , पाँच दिनों में।
6,352 पोलिंग स्टेशनों (10.76%) ने शत-प्रतिशत वितरण पूरा किया; 5,538 स्टेशनों (9.38%) ने 90% से अधिक।
17,88,330 फॉर्म डिजिटल किए गए (3.23%); 77,624 मतदाताओं ने ऑनलाइन फॉर्म जमा किया।
एएसडीडीओ श्रेणी में 28,611 मतदाताओं की पहचान — जिनमें 13,859 मृत और 11,697 स्थानांतरित शामिल।
केंद्रीय मंत्री एच.डी.
कुमारस्वामी ने एसआईआर को विश्वसनीयता-विहीन बताते हुए रद्द करने की माँग की।
कर्नाटक BJP ने राज्य चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज कर नए एसआईआर की माँग की।

कर्नाटक में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान ने शुरुआती पाँच दिनों में ही उल्लेखनीय रफ्तार पकड़ ली है। कर्नाटक मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) कार्यालय द्वारा जारी ताज़ा आँकड़ों के अनुसार, राज्यभर में 2,78,21,970 एन्यूमरेशन फॉर्म (ईएफ) वितरित किए जा चुके हैं, जो कुल पंजीकृत मतदाताओं का 50.19 प्रतिशत है। यह घर-घर सत्यापन अभियान 30 जून से 29 जुलाई 2026 तक चलाया जा रहा है।

मुख्य घटनाक्रम

सीईओ कार्यालय के आँकड़ों के अनुसार, 6,352 पोलिंग स्टेशनों (10.76 प्रतिशत) ने एन्यूमरेशन फॉर्म का शत-प्रतिशत वितरण पूरा कर लिया है। इसके अतिरिक्त, 5,538 पोलिंग स्टेशनों (9.38 प्रतिशत) ने 90 प्रतिशत से अधिक वितरण पूरा किया है। डिजिटाइजेशन की प्रक्रिया भी साथ-साथ चल रही है — अब तक 17,88,330 फॉर्म डिजिटल किए जा चुके हैं, जो कुल मतदाताओं का 3.23 प्रतिशत है।

77,624 मतदाताओं (0.14 प्रतिशत) ने अपने एन्यूमरेशन फॉर्म ऑनलाइन जमा किए हैं, जो डिजिटल भागीदारी की शुरुआती स्वीकार्यता का संकेत देता है।

एएसडीडीओ श्रेणी में 28,611 मतदाताओं की पहचान

सत्यापन प्रक्रिया के दौरान बूथ स्तरीय अधिकारियों (बीएलओ) ने एएसडीडीओ (अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत और डुप्लिकेट) श्रेणी के तहत 28,611 मतदाताओं की पहचान की है। इनमें 433 मतदाता अनुपस्थित या नहीं मिल पाए, 11,697 मतदाता स्थायी रूप से अन्यत्र चले गए, 13,859 मतदाताओं के मृत होने की सूचना मिली, 2,461 मतदाता पहले से कहीं और पंजीकृत पाए गए, और 161 मामले अन्य कारणों की श्रेणी में रखे गए।

16 जून 2026 की मतदाता सूची के अनुसार, कर्नाटक में कुल 5,54,32,314 पंजीकृत मतदाता हैं। बूथ स्तरीय अधिकारियों को एन्यूमरेशन फॉर्म मुद्रित करके दिए गए हैं।

राजनीतिक विरोध और आरोप

केंद्रीय भारी उद्योग और इस्पात मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने शनिवार को एसआईआर प्रक्रिया की कड़ी आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया में विश्वसनीयता की कमी है और माँग की कि पूरी प्रक्रिया को रद्द किया जाए। गौरतलब है कि कुमारस्वामी की यह आलोचना ऐसे समय में आई है जब राज्य में विपक्षी दलों की नज़र मतदाता सूची की शुद्धता पर टिकी है।

कर्नाटक भारतीय जनता पार्टी (BJP) इकाई ने राज्य चुनाव आयोग में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है। पार्टी ने माँग की है कि जिन क्षेत्रों में गड़बड़ियाँ सामने आ रही हैं, वहाँ मतदाता सूची का नया एसआईआर कराया जाए।

एसआईआर का उद्देश्य और आगे की प्रक्रिया

चुनाव आयोग संशोधित मतदाता सूची जारी करने से पहले घर-घर गणना और एन्यूमरेशन फॉर्म की डिजिटल प्रोसेसिंग के ज़रिए सूची को सत्यापित और अद्यतन कर रहा है। यह प्रक्रिया मतदाता सूची की सटीकता सुनिश्चित करने के लिए चुनाव आयोग (ECI) द्वारा अपनाई गई एक मानक पद्धति है, जिसमें फर्ज़ी, मृत और स्थानांतरित मतदाताओं को सूची से हटाया जाता है।

अभियान 29 जुलाई 2026 तक जारी रहेगा, और डिजिटाइजेशन की गति बढ़ने के साथ आँकड़ों में तेज़ी से बदलाव आने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि 28,611 संदिग्ध मतदाताओं की पहचान के बाद हटाने की प्रक्रिया कितनी पारदर्शी होगी। कुमारस्वामी की 'विश्वसनीयता की कमी' वाली आलोचना और BJP की औपचारिक शिकायत यह दर्शाती है कि मतदाता सूची शुद्धता का मुद्दा तकनीकी नहीं, बल्कि गहरे राजनीतिक निहितार्थ रखता है। डिजिटाइजेशन मात्र 3.23% पर होना यह भी बताता है कि असली चुनौती वितरण नहीं, बल्कि सत्यापन और डेटा प्रोसेसिंग की गति है।
RashtraPress
4 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कर्नाटक एसआईआर क्या है और यह क्यों किया जा रहा है?
एसआईआर यानी विशेष गहन पुनरीक्षण, चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची को सटीक और अद्यतन रखने की एक प्रक्रिया है। इसमें बूथ स्तरीय अधिकारी घर-घर जाकर मतदाताओं की जानकारी सत्यापित करते हैं और फर्ज़ी, मृत व स्थानांतरित मतदाताओं को सूची से हटाया जाता है।
कर्नाटक में कितने एन्यूमरेशन फॉर्म बाँटे गए हैं?
सीईओ कार्यालय के आँकड़ों के अनुसार, अब तक 2,78,21,970 एन्यूमरेशन फॉर्म वितरित किए गए हैं, जो कुल 5,54,32,314 पंजीकृत मतदाताओं का 50.19 प्रतिशत है। यह वितरण 30 जून से शुरू हुए घर-घर सत्यापन अभियान के पाँच दिनों में हुआ है।
एच.डी. कुमारस्वामी ने एसआईआर की आलोचना क्यों की?
केंद्रीय मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने आरोप लगाया कि एसआईआर प्रक्रिया में विश्वसनीयता की कमी है और इसे रद्द किया जाना चाहिए। उनकी यह आलोचना ऐसे समय में आई है जब कर्नाटक BJP ने भी राज्य चुनाव आयोग में गड़बड़ियों की शिकायत दर्ज कराई है।
एसआईआर के दौरान कितने मतदाताओं को सूची से हटाया जा सकता है?
अब तक बूथ स्तरीय अधिकारियों ने एएसडीडीओ श्रेणी में 28,611 मतदाताओं की पहचान की है। इनमें 13,859 मृत, 11,697 स्थानांतरित, 2,461 डुप्लिकेट और 433 अनुपस्थित मतदाता शामिल हैं — हालाँकि अंतिम निर्णय सत्यापन के बाद होगा।
कर्नाटक एसआईआर अभियान कब तक चलेगा?
घर-घर गणना और एन्यूमरेशन फॉर्म वितरण का काम 30 जून से 29 जुलाई 2026 तक चलेगा। इसी अवधि में फॉर्म का डिजिटाइजेशन भी जारी रहेगा, जिसके बाद संशोधित मतदाता सूची जारी की जाएगी।
राष्ट्र प्रेस
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