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बीएयू सबौर में '4 मिनट रिसर्च फाइंडिंग्स प्रतियोगिता 2026': 55 शोधार्थी दो दिन में प्रस्तुत करेंगे कृषि अनुसंधान

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बीएयू सबौर में '4 मिनट रिसर्च फाइंडिंग्स प्रतियोगिता 2026': 55 शोधार्थी दो दिन में प्रस्तुत करेंगे कृषि अनुसंधान

सारांश

बीएयू सबौर में 55 युवा शोधार्थी मात्र चार मिनट में अपना कृषि अनुसंधान प्रस्तुत कर रहे हैं — यह पहल वैज्ञानिक संचार को किसानों और समाज तक पहुँचाने की दिशा में बिहार के कृषि शिक्षा जगत का एक सार्थक प्रयास है।

मुख्य बातें

बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू), सबौर में 9-10 जुलाई 2026 को दो दिवसीय '4 मिनट रिसर्च फाइंडिंग्स प्रतियोगिता 2026' का आयोजन हो रहा है।
प्रतियोगिता में पाँच संघटक महाविद्यालयों के कुल 55 विद्यार्थियों ने पंजीकरण कराया है।
12 कृषि विषयों — आनुवंशिकी, मृदा विज्ञान, कीट विज्ञान, फल विज्ञान सहित — के शोधार्थी भाग ले रहे हैं।
पहल का उद्देश्य एमएससी और पीएचडी विद्यार्थियों में वैज्ञानिक संचार कौशल विकसित करना है।
समापन एवं पुरस्कार वितरण समारोह 10 जुलाई 2026 को होगा।

बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू), सबौर, भागलपुर में आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (आईक्यूएसी) के तत्वावधान में 9 और 10 जुलाई 2026 को दो दिवसीय '4 मिनट रिसर्च फाइंडिंग्स प्रतियोगिता 2026' का आयोजन किया जा रहा है। इस अनूठी प्रतियोगिता में स्नातकोत्तर (एमएससी) और पीएचडी स्तर के विद्यार्थियों को अपने शोध कार्य एवं निष्कर्षों को मात्र चार मिनट में सरल, संक्षिप्त और प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने का अवसर दिया जा रहा है। विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. डी.आर. सिंह के नेतृत्व में आयोजित इस पहल का मूल उद्देश्य युवा शोधार्थियों में वैज्ञानिक संचार कौशल को सुदृढ़ करना और गुणवत्तापूर्ण शोध के प्रभावी प्रसार को बढ़ावा देना है।

प्रतियोगिता का स्वरूप और भागीदारी

आईक्यूएसी के निदेशक डॉ. तीर्थार्थ चट्टोपाध्याय ने उद्घाटन सत्र में जानकारी दी कि इस प्रतियोगिता में विश्वविद्यालय के विभिन्न संघटक महाविद्यालयों के कुल 55 विद्यार्थियों ने पंजीकरण कराया है। इनमें बिहार कृषि महाविद्यालय, सबौर; नालंदा उद्यान महाविद्यालय, नूरसराय; मंडन भारती कृषि महाविद्यालय, सहरसा; डॉ. कलाम कृषि महाविद्यालय, किशनगंज और वीर कुंवर सिंह कृषि महाविद्यालय, डुमरांव के प्रतिभागी सम्मिलित हैं।

गौरतलब है कि प्रतियोगिता में आनुवंशिकी एवं पादप प्रजनन, आणविक जीवविज्ञान एवं जैव प्रौद्योगिकी, मृदा विज्ञान, सस्य विज्ञान, कृषि अर्थशास्त्र, कृषि सांख्यिकी, कटाई उपरांत प्रबंधन, सब्जी विज्ञान, फल विज्ञान, कीट विज्ञान, पादप रोग विज्ञान तथा पुष्प विज्ञान एवं भूदृश्य निर्माण जैसे विविध विषयों के शोधार्थी भाग ले रहे हैं।

उद्घाटन सत्र की विशेष झलकियाँ

कार्यक्रम में अतिथियों का स्वागत पुष्पगुच्छ के साथ सूखे फूलों से तैयार हस्तनिर्मित कार्ड देकर किया गया। ये कार्ड बीएयू द्वारा गोद लिए गए कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय, सबौर की छात्राओं ने बनाए थे — जो विश्वविद्यालय की सामाजिक जिम्मेदारी की भावना को भी रेखांकित करता है।

उद्घाटन सत्र के बाद एमएससी विद्यार्थियों के लिए तकनीकी सत्र आयोजित किया गया, जिसके साथ प्रस्तुतियों की औपचारिक शुरुआत हुई।

विशेषज्ञों की राय

बिहार कृषि महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. रुबी रानी ने कहा कि शोध को सरल, सटीक और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करना आज के समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है। उन्होंने विद्यार्थियों से इस मंच का बेहतर उपयोग कर अपनी प्रस्तुति कौशल को मजबूत बनाने का आह्वान किया।

निदेशक अनुसंधान शिक्षा-सह-अधिष्ठाता (स्नातकोत्तर अध्ययन) डॉ. संजय कुमार ने आईक्यूएसी की इस पहल की सराहना करते हुए विद्यार्थियों को स्पष्टता, आत्मविश्वास और वैज्ञानिक सत्यनिष्ठा के साथ अपने निष्कर्ष प्रस्तुत करने के लिए प्रेरित किया। निदेशक अनुसंधान डॉ. ए.के. सिंह ने जोर दिया कि शोध के परिणामों का लाभ किसानों और समाज तक पहुँचना चाहिए, और प्रतिभागियों से प्रस्तुतियों में नवाचार, प्रासंगिकता और सामाजिक उपयोगिता पर विशेष ध्यान देने की अपील की।

कुलपति का संदेश और आगे की राह

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति डॉ. डी.आर. सिंह ने कहा कि किसी भी शोध की वास्तविक उपयोगिता तभी साबित होती है, जब उसके निष्कर्षों को सरल और प्रभावी भाषा में संबंधित हितधारकों तक पहुँचाया जा सके। उन्होंने प्रतिभागियों से शोध में उत्कृष्टता, वैज्ञानिक नैतिकता और सत्यनिष्ठा बनाए रखते हुए सतत कृषि विकास के लिए उपयोगी समाधान विकसित करने का आह्वान किया।

प्रतियोगिता का समापन एवं पुरस्कार वितरण समारोह 10 जुलाई 2026 को आयोजित किया जाएगा, जो बिहार के कृषि अनुसंधान जगत में युवा प्रतिभाओं को एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान करेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

जबकि यही वह कड़ी है जो प्रयोगशाला को किसान से जोड़ती है। चार मिनट की प्रस्तुति की बाध्यता विद्यार्थियों को अपने शोध का सार निकालने और उसे जन-उपयोगी भाषा में ढालने के लिए प्रेरित करती है — यह कौशल भारतीय कृषि शिक्षा में अभी भी अपेक्षाकृत उपेक्षित है। यदि यह मॉडल बिहार के अन्य कृषि विश्वविद्यालयों तक फैले, तो यह शोध और किसान के बीच की दूरी को पाटने में सहायक हो सकता है।
RashtraPress
10 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बीएयू की '4 मिनट रिसर्च फाइंडिंग्स प्रतियोगिता 2026' क्या है?
यह बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर के आईक्यूएसी द्वारा 9-10 जुलाई 2026 को आयोजित दो दिवसीय प्रतियोगिता है, जिसमें एमएससी और पीएचडी विद्यार्थी अपने शोध निष्कर्षों को मात्र चार मिनट में प्रस्तुत करते हैं। इसका उद्देश्य युवा शोधार्थियों में वैज्ञानिक संचार कौशल विकसित करना है।
इस प्रतियोगिता में कितने और कहाँ-कहाँ से विद्यार्थी भाग ले रहे हैं?
कुल 55 विद्यार्थियों ने पंजीकरण कराया है, जो बीएयू के पाँच संघटक महाविद्यालयों — सबौर, नूरसराय, सहरसा, किशनगंज और डुमरांव — से आए हैं।
प्रतियोगिता में किन विषयों के शोध प्रस्तुत किए जा रहे हैं?
प्रतियोगिता में 12 से अधिक कृषि विषयों के शोधार्थी भाग ले रहे हैं, जिनमें आनुवंशिकी एवं पादप प्रजनन, आणविक जीवविज्ञान, मृदा विज्ञान, कृषि अर्थशास्त्र, कीट विज्ञान, फल विज्ञान और पादप रोग विज्ञान शामिल हैं।
पुरस्कार वितरण समारोह कब होगा?
प्रतियोगिता का समापन और पुरस्कार वितरण समारोह 10 जुलाई 2026 को आयोजित किया जाएगा।
इस पहल का किसानों और समाज से क्या संबंध है?
निदेशक अनुसंधान डॉ. ए.के. सिंह के अनुसार, शोध के परिणामों का लाभ किसानों और समाज तक पहुँचना चाहिए। यह प्रतियोगिता विद्यार्थियों को नवाचार, प्रासंगिकता और सामाजिक उपयोगिता पर ध्यान केंद्रित करते हुए अपनी प्रस्तुतियाँ तैयार करने के लिए प्रेरित करती है।
राष्ट्र प्रेस
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