RBI अक्टूबर बुलेटिन 2026: भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियाद मजबूत, IMF ने GDP अनुमान बढ़ाकर 7% किया
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने 23 अक्टूबर 2026 को जारी अपने अक्टूबर 2026 मासिक बुलेटिन में कहा है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था को मज़बूत व्यापक आर्थिक बुनियादी सिद्धांतों और जोखिमों के नकारात्मक प्रभाव को कम करने वाले नीतिगत हस्तक्षेपों से ठोस सहारा मिला है। केंद्रीय बैंक के अनुसार, उद्योग और सेवा क्षेत्र के उच्च आवृत्ति संकेतक घरेलू अर्थव्यवस्था के लगातार मज़बूत प्रदर्शन की पुष्टि करते हैं।
मुख्य आर्थिक संकेतक
बुलेटिन के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 के पहले छह महीनों में वस्तुओं के निर्यात में दोहरे अंकों की वृद्धि दर्ज हुई, जिससे सितंबर 2026 में व्यापार घाटा कम हुआ। अगस्त 2026 में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI), बाहरी वाणिज्यिक उधारी (ECB) और रेमिटेंस का प्रवाह मज़बूत रहा। FCNR (B) स्वैप सुविधा के तहत पूंजी प्रवाह से विदेशी मुद्रा भंडार में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई।
आपूर्ति पक्ष पर, विनिर्माण क्षेत्र में मज़बूत गति से वृद्धि हुई, जबकि घरेलू और विदेशी मांग में तेज़ी के कारण सेवा क्षेत्र की गतिविधियाँ और सुदृढ़ हुईं। गौरतलब है कि दक्षिण-पश्चिम मानसून की कमी और असमान वितरण के बावजूद खरीफ फसलों की बुवाई पूरी हुई और कुल बुवाई क्षेत्र सामान्य स्तर से अधिक रहा।
महंगाई और मौद्रिक नीति
RBI बुलेटिन में स्वीकार किया गया है कि खुदरा महंगाई में पिछले कुछ महीनों के दौरान मामूली बढ़ोतरी हुई है और विभिन्न वस्तुओं में महंगाई के अधिक व्यापक होने के संकेत मिले हैं। बुलेटिन के शब्दों में, 'ऐसे में मौद्रिक नीति के रुख में उसी के अनुरूप बदलाव की ज़रूरत है।' सितंबर 2026 में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित खुदरा महंगाई में बढ़ोतरी हुई, जिसकी वजह खाद्य पदार्थों, ईंधन और कोर महंगाई के घटकों में व्यापक वृद्धि रही।
यह ऐसे समय में आया है जब RBI महंगाई को अपने 4% के लक्ष्य के करीब बनाए रखने की कोशिश कर रहा है। महंगाई के आधार व्यापक होने का संकेत आगामी मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक में दर-निर्धारण को प्रभावित कर सकता है।
रुपया और विदेशी मुद्रा भंडार
बुलेटिन के अनुसार, अक्टूबर की शुरुआत तक दबाव में रहने के बाद भारतीय रुपए में मज़बूती आई। विदेशी मुद्रा बाज़ार में सट्टेबाज़ी वाली गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए RBI की ओर से उठाए गए नियामकीय कदमों के बाद रुपए को समर्थन मिला। पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार के समर्थन से बाहरी क्षेत्र की संवेदनशीलता से जुड़े संकेतक नियंत्रण में बने रहे।
अप्रैल-अगस्त 2026 के दौरान ECB गतिविधियों में मज़बूती आई। इस अवधि में पंजीकरण और शुद्ध पूंजी प्रवाह, दोनों में पिछले वर्ष की तुलना में सुधार दर्ज किया गया।
IMF का संशोधित अनुमान
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि दर का अनुमान जुलाई के अनुमान से 60 आधार अंक बढ़ाकर 7% कर दिया है। IMF ने इसके पीछे उम्मीद से बेहतर आर्थिक गति, मज़बूत घरेलू माँग और सेवा क्षेत्र की दमदार गतिविधियों को प्रमुख कारण बताया है।
ऊर्जा का शुद्ध आयातक होने के बावजूद भारत की GDP वृद्धि को निरंतर घरेलू माँग और सेवा क्षेत्र से समर्थन मिलना, वैश्विक उथल-पुथल के बीच भारत की आर्थिक लचीलेपन का प्रमाण माना जा रहा है।
आगे की राह
आँकड़ों के अनुसार, भारतीय अर्थव्यवस्था के व्यापक संकेतक फिलहाल सकारात्मक दिशा में हैं, हालाँकि महंगाई का व्यापक होना एक चुनौती बनी हुई है। RBI की नीतिगत प्रतिक्रिया और आगामी तिमाहियों में FDI तथा निर्यात के रुझान यह तय करेंगे कि वृद्धि की यह गति टिकाऊ है या नहीं।