आरबीआई अक्टूबर-दिसंबर में दो बार बढ़ा सकता है ब्याज दर, महंगाई 6% पार जाने का अनुमान: नोमुरा
सारांश
मुख्य बातें
वैश्विक वित्तीय सेवा फर्म नोमुरा के ग्लोबल मैक्रो रिसर्च प्रमुख रॉब सुब्बारमन ने 22 सितंबर 2026 को कहा कि बढ़ते महंगाई दबाव के चलते भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) आगामी अक्टूबर और दिसंबर की मौद्रिक नीति बैठकों में ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकता है। उनके अनुसार, आने वाले महीनों में भारत की महंगाई दर 6 प्रतिशत के पार जा सकती है, जो RBI के लिए दरें बढ़ाने का ठोस आधार बनेगी।
नोमुरा का अनुमान: GDP और महंगाई
सुब्बारमन ने कहा कि भारत की आर्थिक वृद्धि फिलहाल मज़बूत बनी हुई है। नोमुरा ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की GDP वृद्धि दर 7 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है। हालाँकि, महंगाई के बढ़ते दबाव को देखते हुए RBI के लिए दरों में ढील देना कठिन हो सकता है।
यह ऐसे समय में आया है जब RBI पिछले कई महीनों से मौद्रिक नीति को लेकर सतर्क रुख अपनाए हुए है। यदि महंगाई 6% की ऊपरी सीमा तोड़ती है, तो केंद्रीय बैंक पर दरें सख्त करने का दबाव बढ़ेगा।
भारत में निवेश की संभावनाएँ
सुब्बारमन ने कहा कि भारत के पास वैश्विक निवेश आकर्षित करने और वैश्विक वैल्यू चेन में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की व्यापक संभावनाएँ हैं। उन्होंने FCNR-B जमाओं में उम्मीद से बेहतर प्रवाह और मज़बूत भुगतान संतुलन अधिशेष की भी संभावना जताई।
हालाँकि, उन्होंने आगाह किया कि यदि अमेरिका और उत्तर-पूर्व एशिया में AI निवेश की गति बहुत तेज़ रही, तो कुछ चुनिंदा क्षेत्रों में भारत पीछे रह सकता है।
अमेरिकी फेड की नीति और वैश्विक संकेत
अमेरिकी फेडरल रिज़र्व ने पिछले सप्ताह अपनी नीतिगत ब्याज दर में 25 आधार अंक की बढ़ोतरी कर इसे 3.75 प्रतिशत से 4 प्रतिशत के दायरे में कर दिया। सुब्बारमन के अनुसार, FOMC के ताज़ा अनुमान व्यापक रूप से सख्त मौद्रिक नीति की दिशा में संकेत करते हैं।
गौरतलब है कि 18 नीति निर्माताओं में से 12 ने इस वर्ष एक और दर बढ़ोतरी की उम्मीद जताई है, 4 ने दो और बढ़ोतरी का अनुमान लगाया है, और केवल 2 ने आगे किसी बढ़ोतरी की संभावना नहीं जताई।
भू-राजनीतिक तनाव और ऊर्जा कीमतें
सुब्बारमन ने बताया कि बाज़ार संयुक्त राष्ट्र महासभा में होने वाली कूटनीतिक गतिविधियों और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप तथा चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच संभावित बैठक पर नज़र बनाए हुए हैं। उनके अनुसार, सफल कूटनीति वैश्विक व्यापार तनाव कम कर सकती है, जिससे ऊर्जा लागत और लंबी अवधि की बॉन्ड यील्ड में गिरावट आ सकती है।
उन्होंने चेतावनी दी कि ईरान के पास अभी भी दबाव बनाने की क्षमता है। अमेरिका में गैसोलीन की कीमत करीब $4.50 प्रति गैलन और डीजल रिकॉर्ड स्तर के करीब $6.50 प्रति गैलन पहुँच गई है, जो डाउनस्ट्रीम तेल कारोबार पर दबाव डाल रही है।
आगे क्या
यदि नोमुरा का आकलन सही रहा और महंगाई 6% के पार बनी रही, तो RBI के लिए अक्टूबर और दिसंबर 2026 की बैठकों में दरें बढ़ाना लगभग अपरिहार्य हो जाएगा। इसका सीधा असर होम लोन, कार लोन और कॉर्पोरेट क्रेडिट की लागत पर पड़ेगा, जिससे आम उपभोक्ता और उद्योग दोनों प्रभावित होंगे।