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RBI का GDP वृद्धि अनुमान 7.1% तक बढ़ाया, रेपो रेट 5.50% पर; महंगाई को लेकर सतर्कता बरकरार

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RBI का GDP वृद्धि अनुमान 7.1% तक बढ़ाया, रेपो रेट 5.50% पर; महंगाई को लेकर सतर्कता बरकरार

सारांश

RBI ने भारत की GDP वृद्धि का अनुमान 6.7% से बढ़ाकर 7.1% किया और रेपो दर 5.50% पर पहुँचाई — लेकिन साथ में महंगाई की चेतावनी भी दी। मानसून की कमी, पश्चिम एशिया संघर्ष और ऊर्जा कीमतों के बीच केंद्रीय बैंक का रुख साफ है: दरों में कटौती अभी दूर है।

मुख्य बातें

RBI ने FY2026-27 के लिए GDP वृद्धि अनुमान संशोधित कर 7.1 प्रतिशत किया, अगस्त के 6.7 प्रतिशत से 40 आधार अंक अधिक।
MPC ने सर्वसम्मति से नीतिगत रेपो दर में 25 आधार अंक की बढ़ोतरी कर इसे 5.50 प्रतिशत किया।
CPI आधारित खुदरा महंगाई तीसरी तिमाही में सहनशीलता की ऊपरी सीमा तक पहुँचने और अगली दो तिमाहियों में 5% से काफी ऊपर बने रहने का अनुमान।
पश्चिम एशिया संघर्ष से ऊर्जा कीमतों और सप्लाई चेन पर दबाव; आपूर्ति विविधीकरण से प्रभाव सीमित करने की कोशिश।
दक्षिण-पश्चिम मानसून की कमी और अल नीनो से ग्रामीण मांग को जोखिम; खाद्यान्न भंडार और सरकारी नीतिगत पहल राहत देंगी।
निकट भविष्य में ब्याज दरों में कटौती की संभावना नहीं; आगे की नीतिगत कार्रवाई महंगाई और वृद्धि के आंकड़ों पर निर्भर।

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने 21 अक्टूबर 2026 को मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक का विवरण जारी करते हुए कहा कि वैश्विक अनिश्चितता का घरेलू आर्थिक गतिविधियों पर कुछ असर जारी रहेगा, लेकिन भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियाद मजबूत बनी हुई है। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए GDP वृद्धि का अनुमान संशोधित कर 7.1 प्रतिशत कर दिया है, जो अगस्त के 6.7 प्रतिशत के अनुमान से 40 आधार अंक अधिक है। साथ ही, MPC ने सर्वसम्मति से नीतिगत रेपो दर में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी कर इसे 5.50 प्रतिशत कर दिया है।

MPC की बैठक में क्या हुआ

5 से 7 अक्टूबर 2026 के बीच हुई MPC की बैठक के विवरण के अनुसार, केंद्रीय बैंक ने नीतिगत रुख को बदलकर 'संतुलित मौद्रिक सख्ती' का रास्ता चुना है। समिति ने सर्वसम्मति से रेपो दर 5.25 प्रतिशत से बढ़ाकर 5.50 प्रतिशत करने का निर्णय लिया। इस बदलाव का सीधा संकेत यह है कि निकट भविष्य में ब्याज दरों में कटौती की संभावना नहीं है और आगे की नीतिगत कार्रवाई आर्थिक परिस्थितियों पर निर्भर करेगी।

वैश्विक अनिश्चितता और घरेलू अर्थव्यवस्था पर असर

बैठक के विवरण में RBI ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच ऊर्जा की कीमतों और सप्लाई चेन पर दबाव बना हुआ है, हालांकि निकट भविष्य में इनका रुख अनिश्चित बना रहेगा। केंद्रीय बैंक के अनुसार, आपूर्ति के स्रोतों में सक्रिय रूप से विविधता लाने से इन प्रतिकूल प्रभावों को सीमित किया जा रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर केंद्रीय बैंक मुद्रास्फीति और वृद्धि के बीच संतुलन बनाने की चुनौती से जूझ रहे हैं।

कृषि और ग्रामीण मांग को लेकर चेतावनी

बैठक के विवरण में कहा गया कि 'दक्षिण-पश्चिम मानसून की कमी और अल नीनो की मजबूत परिस्थितियों से कृषि क्षेत्र की संभावनाओं और ग्रामीण मांग के लिए जोखिम पैदा हो रहे हैं।' हालांकि, केंद्रीय बैंक ने यह भी स्पष्ट किया कि खाद्यान्न का पर्याप्त भंडार और सरकार की सक्रिय नीतिगत पहल इन प्रभावों को कम करने में सहायक होंगी। इसके विपरीत, शहरी मांग को सेवा क्षेत्र की तेजी और स्थिर रोजगार परिदृश्य से समर्थन मिलने की उम्मीद है।

महंगाई को लेकर RBI की चिंता

RBI गवर्नर मल्होत्रा ने कहा कि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित खुदरा महंगाई के तीसरी तिमाही में सहनशीलता की ऊपरी सीमा तक पहुंचने और अगली दो तिमाहियों में 5 प्रतिशत से काफी ऊपर बने रहने का अनुमान है। केंद्रीय बैंक के अनुसार, मांग पक्ष से महंगाई के दबाव के सीमित संकेत हैं, फिर भी मुद्रा और कर्ज के कुल आंकड़ों में मजबूत वृद्धि को देखते हुए जोखिम बने हुए हैं। गौरतलब है कि ब्याज दरों में बढ़ोतरी का चक्र कितना लंबा चलेगा, यह अंतर्निहित महंगाई, कीमतों में बढ़ोतरी की व्यापकता और आपूर्ति संबंधी झटकों के दूसरे दौर के प्रभाव पर निर्भर करेगा।

निवेश और निर्यात को लेकर सकारात्मक संकेत

केंद्रीय बैंक ने कहा कि क्षमता का मजबूत उपयोग, कर्ज का बेहतर प्रवाह और बुनियादी ढांचे पर सरकार का जोर निवेश गतिविधियों को गति देता रहेगा। RBI के अनुसार, जहाँ सेवा क्षेत्र का निर्यात मजबूत बने रहने की उम्मीद है, वहीं द्विपक्षीय व्यापार समझौतों से वस्तुओं के निर्यात को भी बढ़ावा मिलना चाहिए। इन सकारात्मक संकेतों के बावजूद, बाहरी क्षेत्र में अनिश्चितता बनी रहेगी और केंद्रीय बैंक की नज़र वैश्विक घटनाक्रमों पर टिकी रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसके साथ आई महंगाई की चेतावनी उस उत्साह को संतुलित करती है — यही RBI का असली संदेश है। रेपो दर अब 5.50% पर है और 'संतुलित सख्ती' के रुख का अर्थ है कि सस्ते कर्ज की उम्मीद लगाए बैठे कारोबारी और गृह-ऋण धारकों को अभी राहत नहीं मिलेगी। मानसून की कमी और अल नीनो से ग्रामीण मांग पर जो जोखिम बताए गए हैं, वे असल में उस उपभोग-आधारित वृद्धि की कहानी के लिए बड़ी चुनौती हैं जिस पर भारत की 7%+ GDP वृद्धि टिकी है। सवाल यह है कि क्या शहरी सेवा क्षेत्र की तेजी अकेले उस खाई को भर सकती है जो कमज़ोर ग्रामीण माँग छोड़ेगी।
RashtraPress
21 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

RBI ने अक्टूबर 2026 में रेपो दर में क्या बदलाव किया?
RBI की मौद्रिक नीति समिति ने 5 से 7 अक्टूबर 2026 की बैठक में सर्वसम्मति से रेपो दर में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी कर इसे 5.50 प्रतिशत कर दिया। यह निर्णय बढ़ते महंगाई दबाव को देखते हुए लिया गया।
RBI ने FY2026-27 के लिए GDP वृद्धि अनुमान कितना रखा है?
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए GDP वृद्धि का अनुमान संशोधित कर 7.1 प्रतिशत कर दिया है, जो अगस्त के 6.7 प्रतिशत के अनुमान से 40 आधार अंक अधिक है।
क्या निकट भविष्य में ब्याज दरों में कटौती होगी?
RBI के संकेतों के अनुसार निकट भविष्य में ब्याज दरों में कटौती की संभावना नहीं है। MPC ने 'संतुलित मौद्रिक सख्ती' का रुख अपनाया है, जिसके तहत आगे दरें या तो बढ़ाई जा सकती हैं या स्थिर रखी जा सकती हैं।
महंगाई को लेकर RBI का क्या अनुमान है?
RBI के अनुसार CPI आधारित खुदरा महंगाई तीसरी तिमाही में सहनशीलता की ऊपरी सीमा तक पहुँच सकती है और अगली दो तिमाहियों में 5 प्रतिशत से काफी ऊपर बनी रह सकती है। हालांकि, मांग पक्ष से महंगाई के दबाव के अभी सीमित संकेत हैं।
वैश्विक अनिश्चितता का भारतीय अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ेगा?
RBI के अनुसार पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष से ऊर्जा की कीमतों और सप्लाई चेन पर दबाव बना हुआ है, जिसका घरेलू आर्थिक गतिविधियों पर कुछ असर जारी रहेगा। आपूर्ति स्रोतों में विविधता लाकर इस प्रभाव को सीमित करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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