आरबीआई अगस्त एमपीसी बैठक: ब्याज दरें स्थिर रहने का अनुमान, महंगाई लक्ष्य सीमा में
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की अगस्त 2026 की बैठक में ब्याज दरों को यथावत रखे जाने की संभावना है, क्योंकि खुदरा महंगाई अभी भी केंद्रीय बैंक की निर्धारित सीमा के भीतर बनी हुई है और आर्थिक विकास को गति देना प्राथमिकता में है। विशेषज्ञों ने मंगलवार, 4 अगस्त को यह आकलन साझा किया।
महंगाई की मौजूदा स्थिति
फिलहाल देश की खुदरा महंगाई दर RBI द्वारा तय 2–6 प्रतिशत की सीमा के भीतर है। केंद्रीय बैंक इस दायरे के मध्य यानी 4 प्रतिशत के स्तर को अपना आदर्श लक्ष्य मानता है। जून 2026 में खुदरा महंगाई दर 4.38 प्रतिशत दर्ज की गई, जिसकी मुख्य वजह वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी और कुछ आयातित उत्पादन सामग्री का महँगा होना रहा।
गौरतलब है कि सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों ने कच्चे तेल की बढ़ी कीमतों का अधिकांश बोझ स्वयं वहन किया, जिससे उपभोक्ताओं पर सीधा असर सीमित रहा। इसके अलावा, भारत ने जुलाई में रूस से रियायती दरों पर 50 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल आयात किया, जो खाड़ी देशों पर निर्भरता घटाने और कीमतें नियंत्रित रखने की रणनीति का हिस्सा है।
आरबीआई गवर्नर का रुख
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि मौद्रिक नीति समीक्षा समिति ब्याज दरों में तभी बढ़ोतरी करेगी जब महंगाई का दबाव व्यापक और स्थायी हो — न कि केवल आपूर्ति-पक्ष की अस्थायी बाधाओं के कारण। यह रुख दर्शाता है कि निकट भविष्य में दरों में इज़ाफे की संभावना कम है।
जून 2026 में जारी RBI के आर्थिक अनुमानों के अनुसार, 31 मार्च 2027 को समाप्त होने वाले वित्त वर्ष में खुदरा महंगाई दर 5.1 प्रतिशत और सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की वृद्धि दर 6.6 प्रतिशत रहने का अनुमान है। ये अनुमान 95 डॉलर प्रति बैरल की औसत कच्चे तेल की कीमत की धारणा पर आधारित हैं। चूँकि वास्तविक कीमतें इस स्तर से नीचे रही हैं, इसलिए अनुमान सही साबित होने की उम्मीद है।
रुपए की स्थिरता और विदेशी पूँजी प्रवाह
कुछ विशेषज्ञों की राय थी कि RBI को रुपए को सँभालने के लिए ब्याज दरें बढ़ानी चाहिए, ताकि वैश्विक निवेशकों से अधिक विदेशी मुद्रा आकर्षित हो सके। हालाँकि, केंद्रीय बैंक ने इसके बजाय वैकल्पिक उपाय अपनाए।
इनमें भारतीय सरकारी बॉन्ड रखने वाले विदेशी निवेशकों के लिए कैपिटल-गेन्स टैक्स समाप्त करना और अनिवासी भारतीयों (NRI) के लिए डॉलर जमा योजनाओं को अधिक आकर्षक बनाना शामिल है। इन कदमों से रुपए को स्थिर रखने में मदद मिली है और लगभग $40 अरब (40 बिलियन डॉलर) का विदेशी मुद्रा प्रवाह आकर्षित हुआ है।
इसी तरह, सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों ने अपने LPG आयात का 70 प्रतिशत से अधिक हिस्सा अमेरिका से मँगाना शुरू कर दिया है, जो आपूर्ति विविधीकरण की दिशा में एक उल्लेखनीय बदलाव है।
आगे क्या होगा
विशेषज्ञों के अनुसार, जब तक महंगाई RBI की सहनशीलता सीमा के भीतर रहती है और वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें नियंत्रित रहती हैं, तब तक केंद्रीय बैंक के लिए दरें बढ़ाने की कोई तात्कालिक आवश्यकता नहीं दिखती। बुधवार को आने वाला MPC का निर्णय यह तय करेगा कि वृद्धि और स्थिरता के बीच संतुलन बनाने की नीति अगले चरण में किस दिशा में जाती है।