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RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा का 'वेट एंड वॉच' रुख: नीतिगत दर बदलाव से पहले महंगाई में स्पष्टता ज़रूरी

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RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा का 'वेट एंड वॉच' रुख: नीतिगत दर बदलाव से पहले महंगाई में स्पष्टता ज़रूरी

सारांश

RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने साफ किया — नीतिगत दर बदलने से पहले महंगाई की पूरी तस्वीर देखनी होगी। MPC मिनट्स बताते हैं कि केंद्रीय बैंक 'वेट एंड वॉच' मोड में है, जबकि आपूर्ति-पक्ष के झटके, वैश्विक अनिश्चितता और अल नीनो का साया अर्थव्यवस्था पर मंडरा रहा है।

मुख्य बातें

RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने नीतिगत दर बदलाव से पहले महंगाई की दिशा में पूर्ण स्पष्टता की शर्त रखी।
MPC मिनट्स ( 19 अगस्त ) के अनुसार ऊँची महंगाई मुख्यतः आपूर्ति-पक्ष के झटकों से प्रेरित है, व्यापक दबाव के संकेत सीमित हैं।
सदस्य नागेश कुमार ने पश्चिम एशिया संघर्ष, कच्चे तेल की अस्थिरता और अल नीनो के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की मज़बूती को रेखांकित किया।
सदस्य पूनम गुप्ता के अनुसार विकास का परिणाम जून 2026 के अनुमान से बेहतर और महंगाई मामूली कम रह सकती है।
सदस्य सौगत भट्टाचार्य और राम सिंह ने वैश्विक व घरेलू अनिश्चितता के बीच महंगाई व विकास दोनों पर नज़र रखने की ज़रूरत बताई।

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने स्पष्ट किया है कि नीतिगत दर में किसी भी बदलाव से पहले वे महंगाई की दिशा को लेकर पूरी स्पष्टता का इंतज़ार करेंगे। 19 अगस्त को जारी मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक के मिनट्स में यह रुख सामने आया, जो दर्शाता है कि केंद्रीय बैंक फिलहाल 'वेट एंड वॉच' मोड में है।

गवर्नर का रुख: महंगाई पर नज़र, जल्दबाज़ी नहीं

मल्होत्रा के अनुसार, नीतिगत निर्णय लेने से पहले मौजूदा या ऊँचे स्तरों पर महंगाई के आँकड़ों की निरंतरता, भविष्य के पूर्वानुमान और उस संभावित स्तर को देखा जाएगा जिस पर महंगाई सामान्य होकर स्थिर हो सकती है। उन्होंने कहा कि ऊँची महंगाई मुख्य रूप से आपूर्ति-पक्ष के झटकों से प्रेरित है और अभी इस बात के सीमित संकेत हैं कि यह दबाव व्यापक रूप ले रहा है।

हालाँकि, गवर्नर ने सतर्कता बरतने की ज़रूरत पर भी ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि खाद्य पदार्थों, ईंधन और अन्य इनपुट की ऊँची कीमतें यदि व्यापक महंगाई में तब्दील हों और महंगाई संबंधी उम्मीदें अस्थिर हों, तो नीतिगत सख्ती की आवश्यकता पड़ सकती है।

वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था मज़बूत

MPC सदस्य नागेश कुमार ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष से उपजी चुनौतियों — विशेषकर कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव — व्यापार नीति की अनिश्चितताओं और अल नीनो से उत्पन्न कृषि जोखिमों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था ने उल्लेखनीय मज़बूती दिखाई है।

MPC सदस्य इंद्रनील भट्टाचार्य ने बताया कि उच्च आवृत्ति वाले आर्थिक संकेतक और कंपनियों के शुरुआती नतीजे पहली तिमाही में औद्योगिक और सेवा क्षेत्रों में मज़बूत गति का संकेत देते हैं। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि पूंजीगत वस्तुओं का उत्पादन, बढ़ता कर्ज़ और सरकार का पूंजीगत व्यय निवेश की गति को बनाए हुए हैं, जबकि मज़बूत निर्यात ने ऊँचे आयात के असर को कम किया।

वैश्विक अनिश्चितता और घरेलू संकेत

MPC सदस्य पूनम गुप्ता ने कहा कि जून 2026 में वैश्विक अनिश्चितताओं में कुछ राहत के बाद जुलाई में वे फिर बढ़ गईं। घरेलू मोर्चे पर हालिया हफ्तों में मानसून वर्षा की मात्रा और वितरण में सुधार दर्ज हुआ है। उनके अनुसार, आर्थिक विकास का परिणाम जून की मौद्रिक नीति में लगाए गए अनुमान से कुछ बेहतर रह सकता है, जबकि महंगाई मामूली रूप से कम रह सकती है।

सदस्य सौगत भट्टाचार्य ने कहा कि 2026 में वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में बाज़ार में तेज़ उतार-चढ़ाव, महंगाई की चिंताएँ और नीतिगत उम्मीदों में बदलाव देखा गया है। वहीं, सदस्य राम सिंह ने महंगाई की दिशा पर करीबी नज़र रखने और घरेलू आर्थिक परिस्थितियों में महंगाई तथा विकास — दोनों मोर्चों पर ध्यान देने की आवश्यकता जताई।

आगे क्या होगा

MPC के सामूहिक रुख से स्पष्ट है कि निकट भविष्य में दर में कटौती की संभावना सीमित है। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक केंद्रीय बैंक भी महंगाई और विकास के बीच संतुलन साधने की कोशिश कर रहे हैं। अगली MPC बैठक के निर्णय पर सभी की निगाहें टिकी रहेंगी — खासकर यदि खाद्य महंगाई के आँकड़े लगातार ऊँचे बने रहे।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसके पीछे एक गहरी दुविधा है — यदि महंगाई आपूर्ति-पक्ष की है तो दर बढ़ाना उसे नहीं रोकेगा, बल्कि विकास को नुकसान पहुँचाएगा। RBI इस जाल को पहचानता है, इसलिए 'स्पष्टता' की शर्त दरअसल समय खरीदने की रणनीति है। असली परीक्षा तब होगी जब खाद्य महंगाई लंबे समय तक ऊँची रहे और उम्मीदें अस्थिर हों — उस स्थिति में 'वेट' का विकल्प महँगा पड़ सकता है। मुख्यधारा की कवरेज 'दर नहीं बदली' तक सिमटी रहती है, जबकि असली खबर यह है कि MPC के भीतर विकास और महंगाई की प्राथमिकता को लेकर सूक्ष्म मतभेद उभर रहे हैं।
RashtraPress
20 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा का नीतिगत दर पर क्या रुख है?
गवर्नर मल्होत्रा ने कहा है कि नीतिगत दर में बदलाव से पहले महंगाई की दिशा को लेकर पूरी स्पष्टता ज़रूरी है। इसमें महंगाई के आँकड़ों की निरंतरता, पूर्वानुमान और वह स्तर शामिल है जिस पर महंगाई स्थिर हो सके।
MPC मिनट्स 19 अगस्त 2026 में क्या खुलासा हुआ?
19 अगस्त को जारी MPC मिनट्स में सामने आया कि RBI 'वेट एंड वॉच' मोड में है। सदस्यों ने वैश्विक अनिश्चितता, आपूर्ति-पक्ष की महंगाई और भारतीय अर्थव्यवस्था की मज़बूती — तीनों पहलुओं पर अपने विचार रखे।
क्या RBI जल्द रेपो रेट में कटौती करेगा?
MPC के सामूहिक रुख के अनुसार निकट भविष्य में दर कटौती की संभावना सीमित दिखती है। जब तक महंगाई की दिशा स्पष्ट नहीं होती और आपूर्ति-पक्ष के झटके व्यापक दबाव में नहीं बदलते, तब तक दर में बदलाव की उम्मीद कम है।
भारतीय अर्थव्यवस्था पर वैश्विक जोखिमों का क्या असर है?
MPC सदस्य नागेश कुमार के अनुसार पश्चिम एशिया संघर्ष, कच्चे तेल की अस्थिरता और अल नीनो के कृषि जोखिमों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था ने मज़बूती दिखाई है। सदस्य पूनम गुप्ता ने कहा कि विकास जून 2026 के अनुमान से बेहतर रह सकता है।
महंगाई के व्यापक रूप लेने पर RBI क्या करेगा?
गवर्नर मल्होत्रा ने संकेत दिया है कि यदि खाद्य, ईंधन और इनपुट की ऊँची कीमतें व्यापक महंगाई में बदलने लगें या महंगाई संबंधी उम्मीदें अस्थिर हों, तो नीतिगत सख्ती यानी दर वृद्धि की आवश्यकता पड़ सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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