आरबीआई ने रेपो रेट 5.25% पर रखा स्थिर, पश्चिम एशिया तनाव और महंगाई जोखिम के बीच 'न्यूट्रल' रुख बरकरार
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने 5 जून 2026 को रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखने का सर्वसम्मत निर्णय लिया। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि 3, 4 और 5 जून को हुई छह सदस्यीय समिति की बैठक में आर्थिक एवं वित्तीय परिस्थितियों की विस्तृत समीक्षा के बाद यह फैसला लिया गया। केंद्रीय बैंक ने नीतिगत रुख (पॉलिसी स्टांस) भी 'न्यूट्रल' बनाए रखा है।
वैश्विक परिदृश्य और दबाव
गवर्नर मल्होत्रा ने कहा कि अप्रैल 2026 की पिछली MPC बैठक के बाद से वैश्विक आर्थिक माहौल और जटिल हो गया है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और नाजुक युद्धविराम की स्थिति के कारण ऊर्जा कीमतों में तीव्र वृद्धि हुई है, जिसने वैश्विक सप्लाई चेन को प्रभावित किया है। उन्होंने कहा कि इसका असर आर्थिक विकास और महंगाई — दोनों मोर्चों पर एक साथ पड़ रहा है।
यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक माल ढुलाई और बीमा लागत पहले से ही ऊँचे स्तर पर बनी हुई हैं। बढ़ती ऊर्जा लागत और आपूर्ति बाधाओं से घरेलू आर्थिक गतिविधियों पर अतिरिक्त दबाव पड़ने की आशंका है, हालाँकि RBI के अनुसार भारत की अर्थव्यवस्था इन झटकों को झेलने में सक्षम है।
महंगाई की स्थिति और आगे का जोखिम
गवर्नर ने स्पष्ट किया कि फिलहाल खुदरा महंगाई (CPI) RBI के निर्धारित लक्ष्य स्तर से नीचे बनी हुई है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय कीमतों का पूरा असर अभी घरेलू बाज़ारों तक नहीं पहुँचा है। हालाँकि आने वाले महीनों में महंगाई बढ़ने की आशंका है और यह RBI की निर्धारित ऊपरी सीमा के करीब पहुँच सकती है।
गौरतलब है कि महंगाई से जुड़े जोखिम बढ़े हैं, लेकिन समिति ने मौजूदा हालात में ब्याज दरों में तत्काल बदलाव के बजाय स्थिति के और स्पष्ट होने की प्रतीक्षा करने का विवेकपूर्ण निर्णय लिया। RBI ने कहा कि वह आगे भी आँकड़ों पर आधारित नीतिगत निर्णय लेगा।
भारतीय अर्थव्यवस्था की मज़बूती
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) के दूसरे अग्रिम अनुमान के अनुसार, पिछले वित्त वर्ष में भारत की GDP वृद्धि दर 7.6 प्रतिशत रही। निजी उपभोग, निवेश, विनिर्माण और सेवा क्षेत्र के मज़बूत प्रदर्शन ने इस वृद्धि को आधार दिया।
विनिर्माण और सेवा क्षेत्र के PMI आँकड़े दोनों क्षेत्रों में निरंतर मज़बूती का संकेत दे रहे हैं और कारोबारी भरोसा सकारात्मक बना हुआ है। अप्रैल 2026 में भारत के माल निर्यात में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। उपभोक्ताओं का विवेकाधीन खर्च और निवेश गतिविधियाँ बढ़ती लागत के बावजूद अब तक स्थिर बनी हुई हैं।
मानसून और कृषि क्षेत्र की चिंता
RBI ने चेतावनी दी कि दक्षिण-पश्चिम मानसून में संभावित कमी का असर कृषि उत्पादन और ग्रामीण माँग पर पड़ सकता है। हालाँकि सरकार की फसल विविधीकरण, जल संरक्षण, जलवायु अनुकूल खेती और कम अवधि वाली फसलों जैसी योजनाएँ इस प्रभाव को काफी हद तक कम करने में सहायक हो सकती हैं।
सेवा क्षेत्र की निरंतर मज़बूती और GST सुधारों का सकारात्मक प्रभाव शहरी खपत को समर्थन देता रहेगा, हालाँकि बढ़ती महंगाई घरेलू परिवारों की क्रय शक्ति पर कुछ दबाव डाल सकती है।
आगे की राह
RBI ने स्पष्ट किया है कि मौजूदा वैश्विक अनिश्चितताओं, बढ़ती ऊर्जा कीमतों और महंगाई के जोखिमों को देखते हुए केंद्रीय बैंक सतर्क रुख बनाए रखेगा। ब्याज दरों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है, लेकिन आने वाले महीनों में आर्थिक परिस्थितियों के आधार पर आगे की रणनीति तय की जाएगी। बाज़ार विशेषज्ञों की नज़रें अब अगली MPC बैठक और मानसून के रुझान पर टिकी हैं।