5 अगस्त 2026
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आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा: मजबूत निजी खपत और निवेश से भारतीय अर्थव्यवस्था को मिल रही रफ्तार

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आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा: मजबूत निजी खपत और निवेश से भारतीय अर्थव्यवस्था को मिल रही रफ्तार

सारांश

RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने MPC घोषणा में स्पष्ट किया — निजी खपत, पूंजीगत निवेश और बैंक क्रेडिट के मजबूत संकेतकों से भारत वैश्विक अस्थिरता के बीच भी गति बनाए हुए है, लेकिन अल-नीनो से मानसून और कृषि माँग पर जोखिम बना हुआ है।

मुख्य बातें

RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने 5 अगस्त को MPC फैसलों की घोषणा में कहा कि देश में निजी खपत मजबूत बनी हुई है।
पूंजीगत निवेश , निर्माण गतिविधियाँ और बैंक क्रेडिट — तीनों संकेतक निवेश वृद्धि की पुष्टि कर रहे हैं।
सर्विस निर्यात में अच्छी बढ़ोतरी; वस्तु निर्यात में भी सुधार के संकेत।
अल-नीनो के कारण दक्षिण-पश्चिम मानसून में कमी और असमान बारिश से कृषि क्षेत्र व ग्रामीण माँग पर जोखिम।
फसल विविधीकरण और जल संरक्षण पहलों से प्रतिकूल असर कम होने की उम्मीद।
भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था के रूप में अपनी स्थिति बनाए हुए है।

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने 5 अगस्त को मौद्रिक नीति समिति (MPC) के फैसलों की घोषणा करते हुए कहा कि देश में निजी खपत मजबूत बनी हुई है और वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार कायम है। उन्होंने पूंजीगत निवेश, निर्माण गतिविधियों और बैंक क्रेडिट को इस सकारात्मक रुझान के प्रमुख संकेतकों के रूप में रेखांकित किया।

मुख्य घटनाक्रम

मल्होत्रा ने बताया कि घरेलू माँग के साथ-साथ बाहरी माँग भी सकारात्मक बनी हुई है। सर्विस निर्यात में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है और वस्तु निर्यात में भी सुधार के संकेत मिले हैं। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक व्यापार की गति धीमी पड़ने की आशंका कई अर्थशास्त्री जता रहे हैं।

जोखिम और चुनौतियाँ

गवर्नर ने स्वीकार किया कि ऊर्जा कीमतें और आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव अभी भी ऊँचे और अनिश्चित बने हुए हैं। उन्होंने कहा, 'ऊर्जा की कीमतें और आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव अभी भी अधिक और अनिश्चित बने हुए हैं। सप्लाई से जुड़े कई उपायों से इनके बुरे असर को रोकने की कोशिश की जा रही है।' इसके अलावा, अल-नीनो के प्रभाव से दक्षिण-पश्चिम मानसून में कमी और असमान वर्षा से कृषि क्षेत्र तथा ग्रामीण माँग पर कुछ जोखिम उत्पन्न हो गए हैं।

सरकारी पहलों का असर

मल्होत्रा ने बताया कि फसल विविधीकरण और जल संचयन व संरक्षण जैसी सरकारी पहलों से मानसून की अनिश्चितता के प्रतिकूल प्रभाव को कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है। इसके साथ ही, सर्विस सेक्टर में निरंतर तेजी, जीएसटी संग्रह में सुधार का जारी असर और रोजगार की स्थिर स्थिति शहरी माँग को सहारा देती रहेगी।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं

गवर्नर ने कहा, 'क्षमता का भरपूर इस्तेमाल, क्रेडिट का अच्छा प्रवाह और इंफ्रास्ट्रक्चर पर सरकार का लगातार जोर निवेश गतिविधियों को बनाए रखेगा। साथ ही, सर्विस निर्यात के बने रहने की उम्मीद है, वहीं हालिया ट्रेड एग्रीमेंट और विविधीकरण पर जोर से वस्तु निर्यात को बढ़ावा मिलेगा।' गौरतलब है कि मजबूत घरेलू माँग, मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस गतिविधियों में निरंतर विस्तार और अनुकूल निर्यात आँकड़ों ने मिलकर दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था के रूप में भारत की स्थिति को और सुदृढ़ किया है।

आगे की राह

RBI के अनुसार, वैश्विक आर्थिक उतार-चढ़ाव का असर आगे चलकर घरेलू गतिविधियों पर पड़ सकता है, इसलिए नीतिगत सतर्कता बनाए रखना आवश्यक होगा। हालिया ट्रेड एग्रीमेंट और निर्यात विविधीकरण की रणनीति से वस्तु निर्यात को नई दिशा मिलने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसमें कुछ अनकही बातें भी हैं। अल-नीनो का उल्लेख एक स्वीकारोक्ति है कि ग्रामीण माँग — जो भारत की खपत कहानी का आधार है — अभी भी मौसम पर निर्भर है। सर्विस निर्यात की तेजी असली है, लेकिन यह मुख्यतः IT और BPM क्षेत्र तक सीमित है, जो व्यापक रोजगार सृजन का पर्याय नहीं। 'दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था' का दावा तब तक अधूरा है जब तक यह वृद्धि आम नागरिक की क्रय शक्ति में नहीं दिखती — और यह प्रश्न MPC की किसी भी बैठक में पर्याप्त गहराई से नहीं उठाया जाता।
RashtraPress
5 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने MPC बैठक में क्या कहा?
उन्होंने कहा कि भारत में निजी खपत मजबूत बनी हुई है और पूंजीगत निवेश, निर्माण तथा बैंक क्रेडिट जैसे संकेतक निवेश वृद्धि की पुष्टि करते हैं। वैश्विक अस्थिरता के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की गति कायम है।
अल-नीनो से भारतीय अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ सकता है?
अल-नीनो के कारण दक्षिण-पश्चिम मानसून में कमी और असमान बारिश से कृषि क्षेत्र और ग्रामीण माँग पर जोखिम उत्पन्न हो सकता है। हालाँकि, सरकार की फसल विविधीकरण और जल संचयन पहलों से इस प्रभाव को कम करने की उम्मीद है।
भारत के निर्यात की स्थिति कैसी है?
RBI गवर्नर के अनुसार, सर्विस निर्यात में अच्छी बढ़ोतरी हुई है और वस्तु निर्यात में भी सुधार के संकेत हैं। हालिया ट्रेड एग्रीमेंट और विविधीकरण की रणनीति से वस्तु निर्यात को और बढ़ावा मिलने की संभावना है।
भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए आगे क्या जोखिम हैं?
ऊर्जा कीमतें और आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव अभी भी ऊँचे और अनिश्चित हैं। इसके अलावा, वैश्विक आर्थिक उतार-चढ़ाव का असर घरेलू गतिविधियों पर पड़ सकता है, जिससे नीतिगत सतर्कता आवश्यक है।
शहरी माँग को किन कारकों से समर्थन मिल रहा है?
सर्विस सेक्टर में निरंतर तेजी, जीएसटी संग्रह में सुधार का जारी असर और रोजगार की स्थिर स्थिति शहरी माँग को सहारा दे रही है। क्षमता के भरपूर उपयोग और क्रेडिट के अच्छे प्रवाह से निवेश गतिविधियाँ भी बनी रहेंगी।
राष्ट्र प्रेस
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