आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा: मजबूत निजी खपत और निवेश से भारतीय अर्थव्यवस्था को मिल रही रफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने 5 अगस्त को मौद्रिक नीति समिति (MPC) के फैसलों की घोषणा करते हुए कहा कि देश में निजी खपत मजबूत बनी हुई है और वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार कायम है। उन्होंने पूंजीगत निवेश, निर्माण गतिविधियों और बैंक क्रेडिट को इस सकारात्मक रुझान के प्रमुख संकेतकों के रूप में रेखांकित किया।
मुख्य घटनाक्रम
मल्होत्रा ने बताया कि घरेलू माँग के साथ-साथ बाहरी माँग भी सकारात्मक बनी हुई है। सर्विस निर्यात में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है और वस्तु निर्यात में भी सुधार के संकेत मिले हैं। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक व्यापार की गति धीमी पड़ने की आशंका कई अर्थशास्त्री जता रहे हैं।
जोखिम और चुनौतियाँ
गवर्नर ने स्वीकार किया कि ऊर्जा कीमतें और आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव अभी भी ऊँचे और अनिश्चित बने हुए हैं। उन्होंने कहा, 'ऊर्जा की कीमतें और आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव अभी भी अधिक और अनिश्चित बने हुए हैं। सप्लाई से जुड़े कई उपायों से इनके बुरे असर को रोकने की कोशिश की जा रही है।' इसके अलावा, अल-नीनो के प्रभाव से दक्षिण-पश्चिम मानसून में कमी और असमान वर्षा से कृषि क्षेत्र तथा ग्रामीण माँग पर कुछ जोखिम उत्पन्न हो गए हैं।
सरकारी पहलों का असर
मल्होत्रा ने बताया कि फसल विविधीकरण और जल संचयन व संरक्षण जैसी सरकारी पहलों से मानसून की अनिश्चितता के प्रतिकूल प्रभाव को कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है। इसके साथ ही, सर्विस सेक्टर में निरंतर तेजी, जीएसटी संग्रह में सुधार का जारी असर और रोजगार की स्थिर स्थिति शहरी माँग को सहारा देती रहेगी।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
गवर्नर ने कहा, 'क्षमता का भरपूर इस्तेमाल, क्रेडिट का अच्छा प्रवाह और इंफ्रास्ट्रक्चर पर सरकार का लगातार जोर निवेश गतिविधियों को बनाए रखेगा। साथ ही, सर्विस निर्यात के बने रहने की उम्मीद है, वहीं हालिया ट्रेड एग्रीमेंट और विविधीकरण पर जोर से वस्तु निर्यात को बढ़ावा मिलेगा।' गौरतलब है कि मजबूत घरेलू माँग, मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस गतिविधियों में निरंतर विस्तार और अनुकूल निर्यात आँकड़ों ने मिलकर दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था के रूप में भारत की स्थिति को और सुदृढ़ किया है।
आगे की राह
RBI के अनुसार, वैश्विक आर्थिक उतार-चढ़ाव का असर आगे चलकर घरेलू गतिविधियों पर पड़ सकता है, इसलिए नीतिगत सतर्कता बनाए रखना आवश्यक होगा। हालिया ट्रेड एग्रीमेंट और निर्यात विविधीकरण की रणनीति से वस्तु निर्यात को नई दिशा मिलने की संभावना है।