RBI MPC बैठक से पहले 25 BPS दर बढ़ोतरी के आसार, अर्थशास्त्रियों का अनुमान
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक 5 से 7 अक्टूबर 2026 के बीच होनी है, और बैठक से पहले प्रमुख अर्थशास्त्रियों व वैश्विक ब्रोकरेज फर्मों का मानना है कि केंद्रीय बैंक इस बार 25 आधार अंक (बेसिस पॉइंट्स) की दर बढ़ोतरी कर सकता है। यह कदम ऐसे समय में अनुमानित है जब बढ़ती ऊर्जा कीमतें, खाद्य महंगाई और वैश्विक बॉन्ड यील्ड में उछाल ने नीतिगत परिदृश्य को जटिल बना दिया है। पहले यह बढ़ोतरी दिसंबर में होने की उम्मीद थी, लेकिन बदले हालात ने समयसीमा को आगे खींच दिया है।
मुख्य पूर्वानुमान और विशेषज्ञों की राय
बैंक ऑफ अमेरिका (BofA) के अनुसार, लगभग दो साल की मौद्रिक नरमी के बाद RBI अक्टूबर MPC में नीतिगत समर्थन वापस लेने की दिशा में पहला कदम उठा सकता है। BofA ने कहा, 'हमें लगता है कि RBI अक्टूबर MPC में 25 BPS की दर से बढ़ोतरी करेगा।' यह बयान संस्था के उस पहले के अनुमान से अलग है जिसमें दिसंबर को संभावित तारीख बताया गया था।
SBI रिसर्च ने भी अपनी ताज़ा रिपोर्ट में माना है कि 25 BPS की बढ़ोतरी का जोखिम 'काफी बढ़ गया है।' रिपोर्ट में कहा गया कि महंगाई का दायरा बढ़ना, वैश्विक हालात का बिगड़ना, तरलता (लिक्विडिटी) की मौजूदा स्थिति और वैश्विक जोखिमों का पुनर्मूल्यांकन — ये सभी कारक अग्रिम कार्रवाई की ज़रूरत को मज़बूत करते हैं। SBI की रिपोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि 'कर्व से पीछे रहने के बजाय पहले से ही कदम उठाना समझदारी होगी।'
महंगाई की चिंता — आंकड़े क्या कहते हैं
उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित महंगाई अगस्त में बढ़कर 4.82 प्रतिशत हो गई, जो जुलाई में 4.45 प्रतिशत थी। विश्लेषकों के अनुसार मज़बूत अल नीनो और अक्टूबर में सामान्य से कम बारिश रबी की पैदावार के लिए अतिरिक्त जोखिम पैदा कर सकती है, जिससे खाद्य महंगाई आगे और बढ़ सकती है।
इसके अलावा, ब्रेंट क्रूड का मूल्य 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर निकल गया है और अमेरिका के 10 साल के ट्रेजरी यील्ड 5 प्रतिशत की ओर बढ़ रहे हैं। BNP पारिबा इंडिया ने चेतावनी दी है कि इन घटनाक्रमों से भारत का समग्र आर्थिक परिदृश्य (मैक्रो-आउटलुक) पिछले कुछ हफ्तों में कमज़ोर हुआ है।
नोमुरा का संतुलित दृष्टिकोण
वैश्विक ब्रोकरेज नोमुरा के विश्लेषकों ने एक अलग नज़रिया पेश किया है। उनके अनुसार, RBI मौजूदा दर-वृद्धि चक्र में बढ़ोतरी को 25 से 50 BPS तक सीमित रख सकता है, जबकि बाज़ार इससे अधिक सख्ती की उम्मीद कर रहा है। नोमुरा ने 75 BPS से अधिक की व्यापक सख्ती के बजाय सीमित बढ़ोतरी की 80 प्रतिशत संभावना जताई है।
गौरतलब है कि बेसिस पॉइंट (BPS) वित्त और बैंकिंग में ब्याज दरों या यील्ड में होने वाले छोटे बदलाव को मापने की एक मानक इकाई है — 1 BPS = 0.01 प्रतिशत।
आगे क्या होगा
MPC की 5 से 7 अक्टूबर की बैठक में बेंचमार्क रेपो रेट पर अंतिम फैसला लिया जाएगा। यदि RBI दरें बढ़ाता है तो यह लगभग दो साल की नरम मौद्रिक नीति के बाद नई दिशा की शुरुआत होगी, जिसका असर आवास ऋण, वाहन ऋण और कॉर्पोरेट उधारी की लागत पर सीधे पड़ेगा। बाज़ार विश्लेषक MPC के बयान के हर शब्द पर नज़र रखेंगे कि आगे दरों की दिशा क्या रहेगी।