आरबीआई एमपीसी बैठक 5-7 अक्टूबर: एसबीआई रिपोर्ट में 0.25% रेपो रेट बढ़ोतरी का अनुमान
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की 5 से 7 अक्टूबर 2026 के बीच होने वाली बैठक से पहले भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की एक ताज़ा रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि जोखिमों का संतुलन अब 25 आधार अंक (0.25 प्रतिशत) की ब्याज दर बढ़ोतरी के पक्ष में निर्णायक रूप से झुक चुका है। बढ़ती महंगाई, कमज़ोर होती वैश्विक आर्थिक परिस्थितियाँ, तरलता की बदलती स्थिति और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नए सिरे से उभरते जोखिम — ये सभी कारक इस संभावित कदम की ज़मीन तैयार कर रहे हैं।
महंगाई और वैश्विक दबाव: बड़े कारण
उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित महंगाई अगस्त 2026 में 4.82 प्रतिशत पर पहुँच गई, जो जुलाई के 4.45 प्रतिशत से अधिक है। SBI की रिपोर्ट के अनुसार, भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों से जुड़े जोखिम और वैश्विक जोखिमों के पुनर्मूल्यांकन को देखते हुए 'स्थिति से पीछे रहने के बजाय पहले से एहतियाती कदम उठाना बेहतर होगा।'
रिपोर्ट में यह भी अनुमान जताया गया है कि RBI वित्त वर्ष 2026-27 के लिए जीडीपी वृद्धि अनुमान में 30 आधार अंक और महंगाई के अनुमान में 20 आधार अंक की बढ़ोतरी कर सकता है।
रुपये की गिरावट और विदेशी निवेशकों की निकासी
रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय रुपया लगातार दबाव में है और डॉलर इंडेक्स मज़बूत हो रहा है। पिछले शुक्रवार से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की निरंतर बिकवाली के कारण 4.45 अरब डॉलर की निकासी हो चुकी है। ऐसे में सट्टेबाज़ी की ताकतों को नियंत्रित करने और प्रभावी ढंग से बाज़ार में हस्तक्षेप करने की RBI की क्षमता उसकी आंतरिक मज़बूती की बड़ी परीक्षा होगी।
मानसून की कमज़ोरी और रबी फसलों पर खतरा
रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि 2026 का मानसून वर्ष 2000 के बाद का चौथा सबसे कम बारिश वाला मानसून रहा, जो दीर्घकालिक औसत (LPA) का मात्र 87 प्रतिशत था। इसके अलावा 43 प्रतिशत ज़िलों में सामान्य से कम वर्षा दर्ज की गई। मज़बूत अल-नीनो परिस्थितियाँ और अक्टूबर में सामान्य से कम बारिश रबी फसलों के उत्पादन पर अतिरिक्त जोखिम डाल सकती हैं, जो महंगाई को और बढ़ा सकता है।
तरलता की स्थिति और बैंकिंग क्षेत्र पर असर
SBI की रिपोर्ट के अनुसार, कुल मिलाकर तरलता भले ही अधिशेष में दिखती हो, परंतु वास्तविक स्तर पर प्रभावी तरलता का सृजन काफ़ी सीमित है। विशेष स्वैप सुविधा के तहत रिकॉर्ड 143.5 अरब डॉलर के विदेशी मुद्रा प्रवाह के बावजूद, नियामकीय आवश्यकताएँ — CRR, SLR और LCR — बैंकों के लिए अतिरिक्त जमा राशि के उपयोग को सीमित करती हैं।
रिपोर्ट का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2026-27 में अनुमानित 16 प्रतिशत ऋण वृद्धि को समर्थन देने के लिए बैंकों के स्तर पर जमा सृजन में अभी भी ₹8.2 लाख करोड़ का अंतर बना रहेगा।
आगे क्या होगा
रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि फिलहाल भारत को घबराने की ज़रूरत नहीं है, लेकिन नीति-निर्माताओं और नियामकों के लिए यह ज़रूरी है कि वे ऐसी संभावित स्थिति के लिए पहले से तैयार रहें, जहाँ बदलती व्यापक आर्थिक परिस्थितियाँ कुछ असामान्य ब्याज दर संबंधी उपायों को अपनाने के लिए विवश कर सकती हैं। MPC का निर्णय 7 अक्टूबर 2026 को घोषित होने की संभावना है, जिस पर पूरे बाज़ार की निगाहें टिकी हैं।