आरबीआई जून बैठक में रेपो रेट यथावत रखेगा, 5 जून को होगा फैसले का ऐलान
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) अपनी 3 से 5 जून के बीच होने वाली तीन दिवसीय बैठक में रेपो रेट को मौजूदा स्तर पर बनाए रखने की संभावना है। वैश्विक स्तर पर बढ़ती अस्थिरता, पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और कमोडिटी कीमतों पर उनके प्रभाव को देखते हुए बाज़ार विशेषज्ञों और अर्थशास्त्रियों का मानना है कि केंद्रीय बैंक फिलहाल सतर्क रुख अपनाए रखेगा। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा 5 जून को बैठक के निर्णय की आधिकारिक घोषणा करेंगे।
अप्रैल के बाद फिर यथास्थिति की संभावना
गौरतलब है कि MPC ने अप्रैल 2026 में हुई अपनी पिछली बैठक में भी दरों में कोई बदलाव नहीं किया था। उस समय भी भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं और मुद्रास्फीति तथा विकास संभावनाओं पर उनके संभावित असर को आधार बनाया गया था। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक केंद्रीय बैंक भी दर-कटौती के निर्णयों में सावधानी बरत रहे हैं।
मुद्रास्फीति और जीडीपी अनुमान
एसबीआई रिसर्च की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, उपभोक्ता मूल्य मुद्रास्फीति (CPI) अगले तीन तिमाहियों तक 5 प्रतिशत से ऊपर बनी रह सकती है, जबकि चालू तिमाही में यह 4 से 4.1 प्रतिशत के बीच रहने का अनुमान है। रिपोर्ट में वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही में भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि लगभग 7.2 प्रतिशत और पूरे वर्ष के लिए 7.5 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है। वित्त वर्ष 2027 के लिए जीडीपी वृद्धि दर 6.6 प्रतिशत रहने का पूर्वानुमान है, हालांकि रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई है कि भू-राजनीतिक परिस्थितियों के आधार पर ये अनुमान बदल सकते हैं।
किन कारकों पर रहेगी नज़र
अर्थशास्त्रियों के अनुसार, RBI कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों, आपूर्ति श्रृंखलाओं में व्यवधान और बाहरी दबावों के कारण रुपए पर पड़ने वाले असर को लेकर सतर्क है। इन कारकों के चलते केंद्रीय बैंक चालू वित्त वर्ष के लिए अपने मुद्रास्फीति पूर्वानुमान को ऊपर की ओर संशोधित कर सकता है और जीडीपी वृद्धि अनुमानों में कटौती भी संभव है।
वैकल्पिक नीतिगत उपाय भी विकल्प में
एसबीआई रिसर्च की रिपोर्ट में तर्क दिया गया है कि यदि मुद्रास्फीति का दबाव बढ़ता है, तो RBI के पास बेंचमार्क दरों में बदलाव किए बिना भी बाज़ार को नियंत्रित करने के विकल्प उपलब्ध हैं — जैसे कि ऑपरेशन ट्विस्ट। रिपोर्ट में आँकड़ों पर आधारित दृष्टिकोण अपनाते हुए दरों को फिलहाल अपरिवर्तित रखने की सिफारिश की गई है। 5 जून को गवर्नर मल्होत्रा की प्रेस कॉन्फ्रेंस में नई नीतिगत दिशा स्पष्ट होगी।