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आरबीआई एमपीसी मिनट्स: दिसंबर में 50 बेसिस प्वाइंट रेपो रेट बढ़ोतरी की आशंका, अर्थशास्त्रियों का हॉकिश रुख बरकरार

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आरबीआई एमपीसी मिनट्स: दिसंबर में 50 बेसिस प्वाइंट रेपो रेट बढ़ोतरी की आशंका, अर्थशास्त्रियों का हॉकिश रुख बरकरार

सारांश

RBI की अक्टूबर MPC बैठक के मिनट्स ने केंद्रीय बैंक का सख्त रुख साफ़ कर दिया है। SBI और DBS के अर्थशास्त्रियों का मानना है कि बढ़ती महंगाई और रुपए पर दबाव को देखते हुए दिसंबर में 50 बेसिस प्वाइंट की एक और बढ़ोतरी लगभग तय मानी जा सकती है।

मुख्य बातें

RBI MPC की अक्टूबर 2026 बैठक के मिनट्स से केंद्रीय बैंक का हॉकिश रुख सामने आया।
अक्टूबर बैठक में रेपो रेट 25 बेसिस प्वाइंट बढ़ाया गया; नीतिगत रुख 'कैलिब्रेटेड टाइटनिंग' में बदला।
SBI की रिपोर्ट के अनुसार दिसंबर में 50 बेसिस प्वाइंट की अतिरिक्त बढ़ोतरी संभव।
DBS बैंक की राधिका राव ने कहा — Q4 में महंगाई 6% के आसपास रही तो दिसंबर में दर वृद्धि तय।
रुपया इस महीने डॉलर के मुकाबले करीब 1.5% मज़बूत हुआ; बॉन्ड यील्ड ऊँचे स्तर पर बनी है।
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और वैश्विक जोखिम भावना अभी भी बड़ी चुनौती बनी हुई है।

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की अक्टूबर 2026 बैठक के मिनट्स सार्वजनिक होने के बाद अर्थशास्त्रियों ने दिसंबर में लगातार दूसरी बार रेपो रेट में बढ़ोतरी की अपनी भविष्यवाणी पर कायम रहने का संकेत दिया है। बढ़ती महंगाई और रुपए पर बने दबाव को देखते हुए विशेषज्ञों के अनुसार 50 बेसिस प्वाइंट तक की वृद्धि संभव है। केंद्रीय बैंक का रुख पहले की तुलना में कहीं अधिक सख्त नज़र आ रहा है।

एमपीसी मिनट्स से क्या सामने आया

अक्टूबर की बैठक में रेपो रेट 25 बेसिस प्वाइंट बढ़ाया गया और नीतिगत रुख को 'कैलिब्रेटेड टाइटनिंग' में बदला गया। मिनट्स के अनुसार, समिति के सदस्यों ने बढ़ते महंगाई दबाव और मज़बूत आर्थिक वृद्धि को ब्याज दर बढ़ाने के प्रमुख कारण बताया। कुछ बाहरी सदस्यों ने महंगाई जोखिमों के विस्तार को रेखांकित करते हुए पहले से कदम उठाने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया, जबकि कुछ अन्य सदस्य क्रमिक बढ़ोतरी के पक्ष में रहे।

RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने भी संकेत दिया कि महंगाई अब अधिक व्यापक रूप लेती दिखाई दे रही है, जो नीतिगत सतर्कता की आवश्यकता को और पुख्ता करती है।

एसबीआई और डीबीएस के विशेषज्ञों की राय

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की एक रिपोर्ट के अनुसार दिसंबर की मौद्रिक नीति बैठक में 50 बेसिस प्वाइंट की अतिरिक्त बढ़ोतरी की संभावना बनी हुई है। यह वृद्धि या तो सीधे रेपो रेट में 50 बेसिस प्वाइंट की वृद्धि के रूप में हो सकती है, अथवा 25 बेसिस प्वाइंट रेपो रेट बढ़ाने के साथ-साथ लिक्विडिटी एडजस्टमेंट फैसिलिटी (LAF) कॉरिडोर को 25 बेसिस प्वाइंट के असमान समायोजन के ज़रिए चौड़ा किया जा सकता है।

SBI के ग्रुप चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर डॉ. सौम्य कांति घोष ने कहा कि महंगाई का दबाव व्यापक होता जा रहा है और रुपए में कमज़ोरी भी बनी हुई है। उन्होंने कहा, 'हमें उम्मीद है कि नवंबर तक महंगाई दर 6.5 प्रतिशत से नीचे रह सकती है, लेकिन वर्तमान स्तरों को देखते हुए आरबीआई की सतर्क निगरानी ज़रूरी है।'

DBS बैंक की वरिष्ठ अर्थशास्त्री और कार्यकारी निदेशक राधिका राव के अनुसार, यदि चालू कैलेंडर वर्ष की चौथी तिमाही में महंगाई 6 प्रतिशत के आसपास पहुँचती है, तो दिसंबर में एक और ब्याज दर बढ़ोतरी की संभावना खुली रहेगी। उन्होंने कहा कि अक्टूबर मिनट्स से स्पष्ट होता है कि RBI ने सख्त रुख अपनाया है।

रुपए और बॉन्ड बाज़ार पर असर

बॉन्ड यील्ड ऊँचे स्तर पर बनी हुई है। हालाँकि, विदेशी मुद्रा बाज़ार से जुड़े नियामकीय उपायों के चलते रुपया इस महीने डॉलर के मुकाबले करीब 1.5 प्रतिशत मज़बूत हुआ है। देश के सबसे बड़े इक्विटी आईपीओ में विदेशी निवेश प्रवाह ने भी रुपए को समर्थन दिया है।

विशेषज्ञों के अनुसार, फ़िलहाल रुपया बाहरी घटनाक्रमों पर सीमित प्रतिक्रिया दिखा रहा है, लेकिन कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर बढ़ती चिंताओं के कारण बॉन्ड बाज़ार पर दबाव बना रह सकता है।

आगे क्या होगा

यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक केंद्रीय बैंक भी महंगाई के खिलाफ सख्त रुख बनाए हुए हैं। RBI की अगली MPC बैठक दिसंबर 2026 में होने की उम्मीद है, जिसमें नीतिगत दिशा और अधिक स्पष्ट होगी। कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और वैश्विक जोखिम भावना भी अंतिम फ़ैसले को प्रभावित कर सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन विकास को नुकसान मत पहुँचाओ। 50 बेसिस प्वाइंट की अतिरिक्त बढ़ोतरी की भविष्यवाणी ठीक उस समय आई है जब कच्चे तेल की कीमतें और वैश्विक अनिश्चितता बाहरी मोर्चे पर दबाव बनाए हुए हैं। असली सवाल यह है कि क्या दर वृद्धि का यह चक्र घरेलू खपत और निवेश पर अपेक्षा से अधिक असर डालेगा — जो अभी तक RBI की संचार रणनीति में नदारद है। बिना विश्वसनीय महंगाई ट्रांसमिशन डेटा के, बाज़ार अनुमानों पर चल रहा है — और यही अनिश्चितता बॉन्ड यील्ड को ऊँचा बनाए हुए है।
RashtraPress
22 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

RBI MPC अक्टूबर 2026 के मिनट्स में क्या सामने आया?
अक्टूबर 2026 की MPC बैठक के मिनट्स से पता चलता है कि RBI ने रेपो रेट 25 बेसिस प्वाइंट बढ़ाया और नीतिगत रुख को 'कैलिब्रेटेड टाइटनिंग' में बदला। समिति के सदस्यों ने बढ़ती महंगाई और मज़बूत आर्थिक वृद्धि को दर वृद्धि का प्रमुख कारण बताया।
दिसंबर 2026 में रेपो रेट में कितनी बढ़ोतरी हो सकती है?
SBI की रिपोर्ट और DBS बैंक की अर्थशास्त्री राधिका राव के अनुसार दिसंबर में 50 बेसिस प्वाइंट तक की अतिरिक्त बढ़ोतरी संभव है। यह सीधे रेपो रेट में 50 बेसिस प्वाइंट की वृद्धि के रूप में हो सकती है या LAF कॉरिडोर को चौड़ा करके।
महंगाई दर किस स्तर पर पहुँचने पर दिसंबर में दर वृद्धि तय मानी जाएगी?
DBS बैंक की राधिका राव के अनुसार, यदि Q4 में महंगाई 6 प्रतिशत के आसपास रही तो दिसंबर में ब्याज दर बढ़ोतरी की संभावना खुली रहेगी। SBI के डॉ. सौम्य कांति घोष का अनुमान है कि नवंबर तक महंगाई 6.5 प्रतिशत से नीचे रह सकती है।
रेपो रेट बढ़ोतरी का रुपए और बॉन्ड बाज़ार पर क्या असर है?
नियामकीय उपायों के चलते रुपया इस महीने डॉलर के मुकाबले करीब 1.5 प्रतिशत मज़बूत हुआ है। हालाँकि बॉन्ड यील्ड ऊँचे स्तर पर बनी है और कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर चिंताएँ बॉन्ड बाज़ार पर दबाव बनाए रख सकती हैं।
'कैलिब्रेटेड टाइटनिंग' नीतिगत रुख का क्या मतलब है?
'कैलिब्रेटेड टाइटनिंग' का अर्थ है कि RBI ब्याज दरें बढ़ाने के पक्ष में है, लेकिन हर कदम डेटा के आधार पर और सतर्कता से उठाया जाएगा। इसका मतलब यह नहीं कि दरें अनिश्चितकाल तक बढ़ती रहेंगी, बल्कि महंगाई और विकास के संतुलन को ध्यान में रखकर निर्णय लिया जाएगा।
राष्ट्र प्रेस
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