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RBI अक्टूबर MPC में 0.25% दर बढ़ोतरी संभव, महंगाई सितंबर में 5.5% तक पहुँचने का अनुमान

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RBI अक्टूबर MPC में 0.25% दर बढ़ोतरी संभव, महंगाई सितंबर में 5.5% तक पहुँचने का अनुमान

सारांश

HSBC ग्लोबल इन्वेस्टमेंट रिसर्च की रिपोर्ट के मुताबिक RBI अक्टूबर MPC में रेपो रेट 0.25% बढ़ाकर 5.5% कर सकता है, जबकि सितंबर की महंगाई 5.5% तक पहुँचने और ₹6 लाख करोड़ की तरलता वापस खींचने की ज़रूरत बताई गई है — EMI और पूंजी प्रवाह दोनों पर असर पड़ेगा।

मुख्य बातें

HSBC ग्लोबल इन्वेस्टमेंट रिसर्च के अनुसार RBI अक्टूबर MPC बैठक में रेपो रेट 0.25 प्रतिशत बढ़ाकर 5.5 प्रतिशत कर सकता है।
सितंबर 2026 में CPI महंगाई 4.8% (अगस्त) से बढ़कर लगभग 5.5% तक पहुँचने का अनुमान; 2026 की चौथी तिमाही में 6% से ऊपर जाने की आशंका।
बैंकिंग प्रणाली से ₹6 लाख करोड़ की अतिरिक्त तरलता वापस खींचने की ज़रूरत; इसमें से ₹2 लाख करोड़ करेंसी सर्कुलेशन से पूरी होगी।
कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर; 2027 अनुमान 85 डॉलर प्रति बैरल तक संशोधित।
यूके-भारत FTA लागू होने के एक महीने बाद यूके को निर्यात में 12 प्रतिशत की मासिक वृद्धि दर्ज।

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) अक्टूबर में होने वाली मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक में रेपो रेट को 0.25 प्रतिशत बढ़ाकर 5.5 प्रतिशत कर सकता है। इसके साथ ही, अगले कुछ महीनों में बैंकिंग प्रणाली से ₹6 लाख करोड़ की अतिरिक्त तरलता वापस खींचने की ज़रूरत बताई गई है। यह अनुमान HSBC ग्लोबल इन्वेस्टमेंट रिसर्च की एक हालिया रिपोर्ट में सामने आया है।

महंगाई का ताज़ा परिदृश्य

HSBC ग्लोबल इन्वेस्टमेंट रिसर्च की रिपोर्ट के अनुसार, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित महंगाई दर अगस्त के 4.8 प्रतिशत से बढ़कर सितंबर में लगभग 5.5 प्रतिशत तक पहुँचने का अनुमान है। रिपोर्ट में आगाह किया गया है कि 2026 की चौथी तिमाही में यह औसत 6 प्रतिशत से भी ऊपर जा सकती है।

रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है, 'मुख्य महंगाई में लगातार बढ़ोतरी हुई है, जिसकी मुख्य वजह सर्विस सेक्टर में महंगाई है। हमारा अनुमान है कि अगले 12 महीनों में महंगाई औसतन 5 प्रतिशत से ज़्यादा रहेगी।' यह ऐसे समय में आया है जब RBI का मध्यम अवधि का लक्ष्य महंगाई को 4 प्रतिशत पर बनाए रखना है।

तरलता प्रबंधन की रणनीति

बैंकिंग प्रणाली में मौजूद ₹6 लाख करोड़ की अतिरिक्त तरलता में से लगभग ₹2 लाख करोड़ की ज़रूरत को प्रचलन में मौजूद करेंसी से पूरा किया जा सकता है। शेष राशि को ओपन मार्केट ऑपरेशन सेल्स (OMO), फॉरेन-एक्सचेंज स्पॉट सेल्स, FX स्वैप और वेरिएबल रेट रिवर्स रेपो जैसे मौजूदा तरीकों से मैनेज किए जाने की उम्मीद है।

रिपोर्ट के अनुसार, नकदी में कमी धीरे-धीरे होने की संभावना है — जब तक कि कैश रिज़र्व रेशियो (CRR) बढ़ाने जैसे अधिक कड़े उपायों का सहारा न लिया जाए।

बाहरी जोखिम और वैश्विक दबाव

रिपोर्ट में बाहरी हालात को चिंताजनक करार दिया गया है। कच्चे तेल की कीमतें फिलहाल 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई हैं और 2027 के लिए तेल की कीमत का अनुमान 20 डॉलर प्रति बैरल बढ़ाकर 85 डॉलर प्रति बैरल कर दिया गया है। ऊँची तेल कीमतें, वैश्विक बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और मज़बूत होता डॉलर — ये तीनों कारक मिलकर उभरते बाज़ारों में पूंजी प्रवाह को नकारात्मक रूप से प्रभावित करते हैं। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि हाल ही में भारत से पूंजी की निकासी देखी गई है।

भारतीय अर्थव्यवस्था की मज़बूती के संकेत

इन चुनौतियों के बावजूद, रिपोर्ट ने भारत की अर्थव्यवस्था की बुनियादी मज़बूती को रेखांकित किया। गौरतलब है कि यूके-भारत फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) लागू होने के महज़ एक महीने बाद यूके को होने वाले निर्यात में महीने-दर-महीने के आधार पर 12 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई — जो इस व्यापार समझौते के शुरुआती सकारात्मक असर का संकेत है।

आगे क्या

अक्टूबर MPC बैठक का नतीजा निवेशकों और आम कर्ज़दारों दोनों के लिए महत्त्वपूर्ण होगा, क्योंकि दर बढ़ोतरी की स्थिति में होम लोन, ऑटो लोन और पर्सनल लोन की EMI में और इज़ाफा होगा। रिपोर्ट के अनुमानों पर RBI की आधिकारिक घोषणा निर्णायक होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो दूसरी ओर वैश्विक पूंजी निकासी और ऊँची तेल कीमतों का संयुक्त झटका विकास को धीमा कर सकता है। गौरतलब है कि RBI का 4% महंगाई लक्ष्य पहले से ही दबाव में है और अगले 12 महीनों में 5% से ऊपर रहने का अनुमान नीति-निर्माताओं के लिए सीमित विकल्प छोड़ता है। यूके-भारत FTA से निर्यात वृद्धि एक सकारात्मक संकेत ज़रूर है, लेकिन यह घरेलू मुद्रास्फीति के दबाव को नहीं संतुलित कर सकती। असली जोखिम यह है कि यदि CRR जैसे कठोर उपायों का सहारा लिया गया, तो बैंक ऋण और आम उपभोक्ता दोनों एक साथ दोहरे दबाव में आ जाएँगे।
RashtraPress
6 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

RBI अक्टूबर MPC में ब्याज दर कितनी बढ़ा सकता है?
HSBC ग्लोबल इन्वेस्टमेंट रिसर्च की रिपोर्ट के अनुसार RBI अक्टूबर MPC बैठक में रेपो रेट 0.25 प्रतिशत बढ़ाकर 5.5 प्रतिशत कर सकता है। यह अनुमान सितंबर में महंगाई के बढ़ने की आशंका और बाहरी दबावों को देखते हुए लगाया गया है।
सितंबर 2026 में भारत की महंगाई दर कितनी रह सकती है?
HSBC रिसर्च के अनुसार सितंबर 2026 में CPI महंगाई दर अगस्त के 4.8 प्रतिशत से बढ़कर लगभग 5.5 प्रतिशत तक पहुँच सकती है। 2026 की चौथी तिमाही में यह औसतन 6 प्रतिशत से थोड़ी अधिक रहने का अनुमान है।
बैंकिंग सिस्टम से ₹6 लाख करोड़ की तरलता वापस क्यों खींची जाएगी?
रिपोर्ट के अनुसार बैंकिंग प्रणाली में अतिरिक्त तरलता महंगाई को और बढ़ावा दे सकती है, इसलिए इसे धीरे-धीरे वापस खींचना ज़रूरी है। इसके लिए OMO सेल्स, FX स्पॉट सेल्स, FX स्वैप और वेरिएबल रेट रिवर्स रेपो जैसे तरीकों का उपयोग किया जाएगा।
तेल की ऊँची कीमतों का भारत पर क्या असर पड़ेगा?
रिपोर्ट में बताया गया है कि कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर हैं, जो भारत के आयात बिल और महंगाई दोनों को बढ़ाती हैं। इसके अलावा, वैश्विक बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और मज़बूत डॉलर के साथ मिलकर ये उभरते बाज़ारों से पूंजी की निकासी को तेज़ कर सकते हैं।
यूके-भारत FTA का निर्यात पर क्या असर दिखा?
HSBC रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार यूके-भारत फ्री ट्रेड एग्रीमेंट लागू होने के एक महीने बाद यूके को होने वाले निर्यात में महीने-दर-महीने 12 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। यह समझौते के शुरुआती सकारात्मक प्रभाव का संकेत है।
राष्ट्र प्रेस
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