RBI MPC की तीन दिवसीय बैठक शुरू, 7 अक्टूबर को रेपो रेट पर होगा बड़ा फैसला
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की तीन दिवसीय बैठक 5 अक्टूबर 2026 को शुरू हो गई है और 7 अक्टूबर को RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ब्याज दरों पर अंतिम निर्णय की घोषणा करेंगे। यह बैठक ऐसे नाज़ुक समय में हो रही है जब कच्चे तेल की कीमत $100 प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई है और महंगाई का दबाव लगातार बढ़ रहा है।
बैठक की पृष्ठभूमि
विशेषज्ञों की नज़र इस बात पर टिकी है कि क्या केंद्रीय बैंक फरवरी 2023 के बाद पहली बार रेपो रेट में बदलाव करेगा या इसे मौजूदा 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रखेगा। गौरतलब है कि करीब दो साल तक मौद्रिक समर्थन देने के बाद अब RBI के समक्ष नीति कड़ी करने का दबाव बढ़ता जा रहा है।
यह बैठक ऐसे समय में आई है जब वैश्विक स्तर पर बॉन्ड यील्ड तेज़ हो रहे हैं और घरेलू महंगाई के आँकड़े चिंताजनक संकेत दे रहे हैं। अर्थशास्त्रियों का एक बड़ा वर्ग मानता है कि RBI इस बैठक में दरें बढ़ाने की प्रक्रिया शुरू कर सकता है।
महंगाई का बढ़ता दायरा
उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित महंगाई दर जुलाई में 4.45 प्रतिशत थी, जो अगस्त में बढ़कर 4.82 प्रतिशत हो गई। इसके अलावा, अल-नीनो की मज़बूत स्थिति और अक्टूबर में सामान्य से कम वर्षा रबी फसल उत्पादन के लिए जोखिम और बढ़ा सकती है, जिससे खाद्य महंगाई पर और दबाव पड़ने की आशंका है।
ऊर्जा की ऊँची कीमतें, खाने-पीने की वस्तुओं में मूल्यवृद्धि और वैश्विक स्तर पर कीमतों पर बढ़ता दबाव मिलकर RBI को यथास्थिति बनाए रखने की गुंजाइश कम कर रहे हैं।
विशेषज्ञों की राय
बैंक ऑफ अमेरिका (BofA) के अनुसार, ऊर्जा की ऊँची कीमतों, खाद्य महंगाई और कीमतों पर बढ़ते दबाव के कारण दिसंबर के बजाय अक्टूबर में ही 25 आधार अंक (बेसिस पॉइंट) की दर वृद्धि हो सकती है। BofA ने अपने विश्लेषण में कहा, 'लगभग दो साल तक मौद्रिक समर्थन देने के बाद, ऐसा लगता है कि RBI अक्टूबर की MPC बैठक में नीति समर्थन को धीरे-धीरे कम करने के लिए शुरुआती कदम उठा सकता है। इस कारण अब हमारा मानना है कि RBI अक्टूबर की MPC बैठक में दरों में 25 आधार अंक की बढ़ोतरी करेगा।'
भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की रिपोर्ट में भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों से जुड़े जोखिम और वैश्विक स्तर पर जोखिमों की पुनः-मूल्यनिर्धारण (री-प्राइसिंग) का हवाला देते हुए कहा गया है कि 'देर करने के बजाय पहले से कदम उठाना समझदारी होगी।'
वैश्विक दबाव और घरेलू संदर्भ
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, अंतरराष्ट्रीय बॉन्ड यील्ड में उछाल और वैश्विक केंद्रीय बैंकों की कड़ी होती नीतियाँ मिलकर RBI पर दबाव बना रही हैं। यह स्थिति 2022-23 की उस तेज़ दर-वृद्धि श्रृंखला की याद दिलाती है, जब RBI ने महंगाई पर काबू पाने के लिए कई दौर में दरें बढ़ाई थीं।
बाज़ार विश्लेषकों के अनुसार, यदि RBI इस बार भी दर स्थिर रखता है, तो रुपये पर दबाव और निवेशकों की धारणा पर असर पड़ सकता है। आगामी 7 अक्टूबर की घोषणा से पहले बाज़ार में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है और इस निर्णय का असर व्यापक आर्थिक नीति की दिशा तय करेगा।