आरबीआई बुलेटिन: पश्चिम एशिया संकट के बीच अप्रैल में भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत, CPI महंगाई 3.5%
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने 22 मई 2026 को जारी अपने मासिक बुलेटिन में कहा कि पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बावजूद अप्रैल 2026 में भारत की आर्थिक गतिविधियों ने उल्लेखनीय मजबूती प्रदर्शित की। औद्योगिक और सेवा क्षेत्र के कई खंडों में प्रदर्शन सकारात्मक बना रहा, जबकि घरेलू मांग विकास की प्रमुख चालक शक्ति के रूप में स्थापित रही।
औद्योगिक एवं सेवा क्षेत्र का प्रदर्शन
वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही के लिए सूचीबद्ध निजी गैर-वित्तीय कंपनियों के शुरुआती नतीजों में पिछली तिमाही की तुलना में कारोबारी प्रदर्शन में सुधार दर्ज किया गया। बुलेटिन के अनुसार, इन कंपनियों की कुल बिक्री और परिचालन लाभ दोनों में दोहरे अंक की वृद्धि देखी गई — जो व्यापक आर्थिक दबावों के बीच कॉर्पोरेट क्षेत्र की सहनशीलता को दर्शाती है।
कृषि क्षेत्र और खाद्य सुरक्षा
RBI के बुलेटिन के अनुसार, सामान्य से अधिक प्री-मानसून वर्षा और जलाशयों में पर्याप्त जल भंडारण के चलते ग्रीष्मकालीन बुवाई में तेजी आई है। हालाँकि, देश के कुछ हिस्सों में सामान्य से अधिक न्यूनतम तापमान और बेमौसम बारिश से बची हुई रबी फसलों की कटाई पर जोखिम बना रह सकता है।
गौरतलब है कि सार्वजनिक खाद्यान्न भंडार फिलहाल निर्धारित बफर मानकों से काफी ऊपर है, जिससे देश की खाद्य सुरक्षा स्थिति सुदृढ़ बनी हुई है।
महंगाई और पूंजी प्रवाह की स्थिति
बुलेटिन के अनुसार, अप्रैल में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित महंगाई बढ़कर 3.5 प्रतिशत हो गई, जिसका मुख्य कारण खाद्य महंगाई रही। वहीं कोर महंगाई स्थिर रही, जो यह संकेत देती है कि बढ़ती इनपुट लागत का असर घरेलू कीमतों पर सीमित रहा। कुल महंगाई दर अभी RBI की निर्धारित सीमा के भीतर है, किंतु घरेलू कीमतों पर इसके प्रभाव पर निरंतर निगरानी आवश्यक बताई गई है।
पूंजी प्रवाह के मोर्चे पर, मार्च में शुद्ध प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) लगातार दूसरे महीने सकारात्मक रहा। दूसरी ओर, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) अप्रैल और मई में भी शुद्ध बिकवाल बने रहे, यद्यपि पूंजी निकासी की गति कुछ धीमी पड़ी है।
पश्चिम एशिया संकट का असर और बाहरी चुनौतियाँ
RBI ने स्पष्ट किया कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर कमोडिटी बाज़ार, वैश्विक व्यापार और सप्लाई चेन पर पड़ रहा है, जिससे वित्तीय बाज़ारों में अस्थिरता बनी हुई है। बुलेटिन में वित्तीय परिस्थितियाँ, कच्चे तेल की कीमतें और पूंजी प्रवाह को बाहरी क्षेत्र के लिए प्रमुख चुनौतियों के रूप में चिह्नित किया गया है।
यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिकी मौद्रिक नीति की अनिश्चितता एक साथ उभर रही है — जिससे उभरते बाज़ारों पर दोहरा दबाव है।
भारत की स्थिति और आगे का परिदृश्य
इन चुनौतियों के बावजूद, RBI के बुलेटिन में रेखांकित किया गया कि भारत मजबूत व्यापक आर्थिक बुनियाद के साथ इस दौर में प्रवेश कर रहा है। मजबूत सेवा निर्यात, सकारात्मक शुद्ध FDI प्रवाह, पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार और सरकार तथा RBI के सक्रिय नीतिगत हस्तक्षेप भारतीय अर्थव्यवस्था को बाहरी झटकों से बचाने में सहायक हो सकते हैं। हालाँकि, सप्लाई पक्ष के दबावों के कारण निकट अवधि का परिदृश्य कुछ चुनौतीपूर्ण बना रह सकता है।