15 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

RBI वार्षिक रिपोर्ट 2025-26: चालू खाता घाटा नियंत्रण में, भारतीय अर्थव्यवस्था वैश्विक उथल-पुथल में भी मजबूत

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
RBI वार्षिक रिपोर्ट 2025-26: चालू खाता घाटा नियंत्रण में, भारतीय अर्थव्यवस्था वैश्विक उथल-पुथल में भी मजबूत

सारांश

वैश्विक उथल-पुथल और अमेरिकी टैरिफ के झटकों के बीच RBI की वार्षिक रिपोर्ट ने भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करार दिया — चालू खाता घाटा नियंत्रण में, महंगाई नरम, और जमा-ऋण में दोहरे अंकों की वृद्धि। घरेलू माँग और सेवा क्षेत्र देश की असली ताकत बनकर उभरे।

मुख्य बातें

RBI ने वित्त वर्ष 2025-26 की वार्षिक रिपोर्ट में भारतीय अर्थव्यवस्था को वैश्विक अनिश्चितता के बावजूद मजबूत बताया।
चालू खाता घाटा निर्धारित सीमा के भीतर रहा; विदेशी मुद्रा भंडार पर्याप्त स्तर पर बना रहा।
जमा और ऋण में दोहरे अंकों की वृद्धि ; खाद्य अपस्फीति से मुख्य महंगाई दर में नरमी ।
अप्रैल 2025 के अमेरिकी टैरिफ झटके के बाद भी भारत दुनिया की सबसे तेज़ बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना रहा।
इक्विटी बाज़ारों में द्विदिशात्मक गति — सहायक नीतियों और भू-राजनीतिक दबावों के बीच संतुलन।
केंद्र सरकार ने राजकोषीय समेकन और पूंजीगत व्यय पर ध्यान बनाए रखा।

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने शुक्रवार को वित्त वर्ष 2025-26 की वार्षिक रिपोर्ट जारी करते हुए कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत बनी रही। केंद्रीय बैंक के अनुसार, चालू खाता घाटा निर्धारित सीमा के भीतर रहा और विदेशी मुद्रा भंडार पर्याप्त स्तर पर बना रहा, जिससे व्यापक आर्थिक और वित्तीय स्थिरता को बल मिला। स्थिर घरेलू माँग और सेवा क्षेत्र की तेज़ रफ्तार ने इस मजबूती की नींव रखी।

मुख्य आर्थिक संकेतक

RBI की रिपोर्ट के अनुसार, 2025-26 में जमा और ऋण दोनों में दोहरे अंकों की वृद्धि दर्ज की गई। खाद्य पदार्थों में अपस्फीति और अनुकूल आधार प्रभाव के कारण मुख्य महंगाई दर में नरमी आई। मुद्रा बाजार दरें नीतिगत रेपो दर और मौजूदा तरलता स्थितियों के अनुरूप बनी रहीं, जो वित्तीय प्रणाली में संतुलन का संकेत देती हैं।

गौरतलब है कि अप्रैल 2025 में अमेरिकी टैरिफ के रूप में आए बाहरी झटके के बाद भी भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था बना रहा। केंद्रीय बैंक ने इसका श्रेय स्थिर निवेश, उपभोग में वृद्धि, सेवा क्षेत्र की मजबूती और औद्योगिक गतिविधि में आपूर्ति-पक्ष सुधार को दिया।

राजकोषीय और बाह्य क्षेत्र की स्थिति

रिपोर्ट में कहा गया कि केंद्र सरकार ने राजकोषीय समेकन की राह बनाए रखी और पूंजीगत व्यय पर निरंतर जोर दिया गया। RBI के अनुसार, वैश्विक अनिश्चितता बढ़ने के बाद भी बाह्य क्षेत्र लचीला बना रहा। चालू खाता घाटे का निर्धारित सीमा में रहना इस लचीलेपन का प्रमुख प्रमाण है।

इक्विटी बाज़ार: दोहरी चुनौती

केंद्रीय बैंक के अनुसार, 2025-26 में इक्विटी बाजारों में द्विदिशात्मक गति देखी गई। एक ओर सहायक मौद्रिक और राजकोषीय नीतियों ने बाज़ार भावना को मजबूत किया, तो दूसरी ओर भू-राजनीतिक तनाव, टैरिफ अनिश्चितताओं और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी वैश्विक चिंताओं ने दबाव बनाया।

आगे की राह

RBI की यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब वैश्विक व्यापार तनाव और केंद्रीय बैंकों की नीतिगत अनिश्चितता चरम पर है। विश्लेषकों का मानना है कि घरेलू माँग और सेवा क्षेत्र की यही बुनियाद भारत को आने वाली तिमाहियों में भी स्थिरता देती रहेगी, बशर्ते वैश्विक कमोडिटी कीमतें और रुपये की विनिमय दर नियंत्रण में रहें।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन 'निर्धारित सीमा के भीतर' जैसे वाक्यांश उस सटीक आँकड़े को छुपाते हैं जो नीति-निर्माताओं और निवेशकों को चाहिए। दोहरे अंकों की ऋण वृद्धि और नरम महंगाई एक साथ एक स्वस्थ चक्र का संकेत देती हैं, लेकिन अमेरिकी टैरिफ का दीर्घकालिक असर अभी पूरी तरह परिलक्षित नहीं हुआ है। इक्विटी बाज़ारों में 'द्विदिशात्मक गति' दरअसल उस अनिश्चितता की स्वीकृति है जिसे केंद्रीय बैंक अभी तक पूरी तरह नहीं नाप सका। असली कसौटी यह होगी कि क्या यह स्थिरता अगली दो तिमाहियों में भी बनी रहती है जब वैश्विक माँग में संभावित सुस्ती का असर निर्यात पर दिखना शुरू होगा।
RashtraPress
15 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

RBI की वार्षिक रिपोर्ट 2025-26 में भारतीय अर्थव्यवस्था के बारे में क्या कहा गया?
RBI की वार्षिक रिपोर्ट 2025-26 के अनुसार, वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत बनी रही। स्थिर घरेलू माँग, सेवा क्षेत्र की तेज़ वृद्धि और पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार इस मजबूती के प्रमुख कारण बताए गए।
भारत का चालू खाता घाटा 2025-26 में कहाँ रहा?
RBI के अनुसार, 2025-26 में चालू खाता घाटा निर्धारित सीमा के भीतर रहा। इससे व्यापक आर्थिक और वित्तीय स्थिरता को समर्थन मिला और बाह्य क्षेत्र लचीला बना रहा।
अमेरिकी टैरिफ के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था कैसे मजबूत रही?
RBI की रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल 2025 में अमेरिकी टैरिफ के झटके के बाद भी भारत दुनिया की सबसे तेज़ बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना रहा। स्थिर निवेश, उपभोग में वृद्धि, सेवा क्षेत्र की मजबूती और औद्योगिक गतिविधि में सुधार ने इसे संभव बनाया।
2025-26 में भारत में महंगाई की क्या स्थिति रही?
RBI के अनुसार, खाद्य पदार्थों में अपस्फीति और मजबूत अनुकूल आधार प्रभाव के कारण 2025-26 में मुख्य महंगाई दर में नरमी आई। इसके साथ ही जमा और ऋण दोनों में दोहरे अंकों की वृद्धि दर्ज की गई।
भारतीय इक्विटी बाज़ारों पर 2025-26 में क्या असर रहा?
RBI की रिपोर्ट के अनुसार, 2025-26 में इक्विटी बाज़ारों में द्विदिशात्मक गति देखी गई। सहायक मौद्रिक और राजकोषीय नीतियों ने बाज़ार भावना को बेहतर बनाया, जबकि भू-राजनीतिक तनाव, टैरिफ अनिश्चितताओं और AI से जुड़ी वैश्विक चिंताओं ने दबाव बनाया।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 5 महीने पहले
  6. 6 महीने पहले
  7. 9 महीने पहले
  8. 11 महीने पहले