वैश्विक उथल-पुथल के बीच भारत सबसे तेज़ बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना रहा: RBI जुलाई बुलेटिन
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के जुलाई 2026 बुलेटिन के अनुसार, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं, आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान और बिखरे हुए व्यापारिक संबंधों के बावजूद भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में अपनी जगह बनाए हुए है। जून 2026 तक औद्योगिक और सेवा क्षेत्र के संकेतक मज़बूत बने रहे, और घरेलू मांग ने बाहरी दबावों को झेलने में अहम भूमिका निभाई।
व्यापार और निवेश की स्थिति
वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में निर्यात और आयात दोनों में मज़बूत वृद्धि दर्ज की गई, जिससे विदेशी व्यापार की रफ्तार बनी रही। RBI बुलेटिन में कहा गया कि हाल ही में लागू हुए भारत-ब्रिटेन व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते (CETA) तथा अन्य द्विपक्षीय व्यापार समझौतों में प्रगति से इस गति को और बल मिलने की संभावना है।
अप्रैल-मई 2026 के दौरान सकल और शुद्ध प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में अधिक रहा। विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI) का शुद्ध प्रवाह जून में सकारात्मक हो गया और नीतिगत समर्थन तथा भू-राजनीतिक तनाव में कमी के बीच जुलाई में भी सकारात्मक बना रहा।
मुद्रास्फीति और तरलता
RBI के अनुसार, जून 2026 में खुदरा महंगाई में मामूली बढ़ोतरी हुई, जबकि कीमती धातुओं को छोड़कर मुख्य मुद्रास्फीति निम्न स्तर पर बनी रही। तरलता की स्थिति और बेहतर हुई, जिससे मज़बूत ऋण वृद्धि को समर्थन मिला।
कृषि क्षेत्र में दक्षिण-पश्चिम मानसून का वितरण असमान रहा है, लेकिन केंद्रीय बैंक के अनुसार खाद्यान्न का पर्याप्त भंडार होने के कारण खाद्य मुद्रास्फीति पर इसका असर सीमित रहने की संभावना है।
बाह्य क्षेत्र की मज़बूती
RBI ने कहा कि विदेशी निवेश के प्रवाह की बदौलत भारत का बाह्य क्षेत्र स्थिर बना हुआ है और इसका परिदृश्य भी बेहतर हो रहा है। मार्च 2026 के अंत तक भारत के प्रमुख बाह्य क्षेत्रीय जोखिम संकेतक मज़बूत और संतुलित स्थिति में बने हुए थे। हाल के महीनों में विदेशी निवेश में आई रिकवरी से अर्थव्यवस्था में निवेशकों के भरोसे की वापसी दिखाई देती है।
शेयर बाज़ार और वैश्विक संदर्भ
RBI बुलेटिन के अनुसार, जून 2026 में भारतीय शेयर बाज़ारों में बढ़त दर्ज की गई। हालाँकि, जुलाई की शुरुआत में युद्धविराम समाप्त होने के बाद बाज़ार सीमित दायरे में कारोबार करते रहे। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था अनिश्चित माहौल और बिखरे हुए व्यापारिक संबंधों जैसी चुनौतियों से जूझ रही है।
आगे की राह
गौरतलब है कि मज़बूत घरेलू मांग, लचीले औद्योगिक प्रदर्शन और बेहतर होती तरलता स्थिति भारत को वैश्विक प्रतिकूलताओं के बीच एक स्थिर विकास पथ पर बनाए हुए है। भारत-ब्रिटेन CETA जैसे व्यापार समझौतों का क्रियान्वयन और FPI प्रवाह की निरंतरता आने वाली तिमाहियों में विकास की गति तय करने में निर्णायक भूमिका निभाएगी।