कर्नाटक सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंची, बाइक टैक्सी प्रतिबंध हटाने के हाई कोर्ट फैसले को दी चुनौती
सारांश
Key Takeaways
- कर्नाटक सरकार ने बाइक टैक्सी प्रतिबंध हटाने के उच्च न्यायालय के फैसले को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी।
- अपील एएनआई टेक्नोलॉजीज और अन्य कैब एग्रीगेटर्स के खिलाफ दायर; सुनवाई की तारीख अभी तय नहीं।
- मुख्य न्यायाधीश विभु बाखरू और जस्टिस सी.एम. जोशी की खंडपीठ ने कहा था कि वाहन के मोटरसाइकिल होने के आधार पर परमिट नहीं रोका जा सकता।
- जस्टिस बी. श्याम प्रसाद की खंडपीठ ने अप्रैल 2025 में एकल न्यायाधीश के प्रतिबंध आदेश को रद्द किया था।
- अदालत ने माना कि प्रतिबंध अनुच्छेद 19(1)(जी) के तहत व्यापार की स्वतंत्रता का उल्लंघन है।
कर्नाटक सरकार ने बाइक टैक्सी सेवाओं पर लगे प्रतिबंध को हटाने के कर्नाटक उच्च न्यायालय के हालिया आदेश को चुनौती देते हुए सर्वोच्च न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाया है। यह अपील एएनआई टेक्नोलॉजीज और अन्य कैब एग्रीगेटर्स के खिलाफ दायर की गई है, जिसकी अभी तक सुनवाई की तारीख तय नहीं हुई है।
मामले की पृष्ठभूमि
कर्नाटक उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश विभु बाखरू और जस्टिस सी.एम. जोशी की खंडपीठ ने ओला, उबर और रैपिडो सहित टैक्सी एग्रीगेटर्स की अपीलों पर सुनवाई करते हुए यह महत्वपूर्ण फैसला सुनाया था। अदालत ने स्पष्ट किया था कि राज्य सरकार केवल इस आधार पर परमिट देने से इनकार नहीं कर सकती कि वाहन मोटरसाइकिल है।
गौरतलब है कि जस्टिस बी. श्याम प्रसाद की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने अप्रैल 2025 में एकल न्यायाधीश के उस आदेश को रद्द कर दिया था, जिसमें राज्य को व्यापक नियामक ढाँचा बनाने तक बाइक टैक्सी सेवाएँ बंद रखने का निर्देश दिया गया था।
उच्च न्यायालय का तर्क
खंडपीठ ने अपने फैसले में कहा कि मोटरसाइकिल को कॉन्ट्रैक्ट कैरिज (किराए की गाड़ी) के रूप में चलाने से रोकना संविधान के अनुच्छेद 19(1)(जी) के तहत व्यापार और पेशे की स्वतंत्रता पर अनुचित रोक है। अदालत ने यह भी माना कि मोटरसाइकिल मोटर व्हीकल एक्ट के अंतर्गत 'ट्रांसपोर्ट व्हीकल' की श्रेणी में आती है, इसलिए उसे टैक्सी परमिट से बाहर नहीं किया जा सकता।
हालाँकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य के पास बाइक टैक्सी सेवाओं को नियंत्रित करने और उन पर नियम व शर्तें लगाने का अधिकार बना रहेगा — केवल वाहन के मोटरसाइकिल होने के आधार पर आवेदन खारिज नहीं किया जा सकता।
रोज़गार पर असर और एग्रीगेटर्स की दलील
कैब एग्रीगेटर्स और ड्राइवर संगठनों ने एकल न्यायाधीश के प्रतिबंध आदेश को चुनौती देते हुए तर्क दिया था कि इस तरह का प्रतिबंध हज़ारों ड्राइवरों की आजीविका पर सीधा प्रहार करता है। खंडपीठ ने इस दलील से सहमति जताई और प्रतिबंध हटाने का आदेश दिया।
आगे क्या होगा
कर्नाटक सरकार की सर्वोच्च न्यायालय में दायर अपील पर अभी सुनवाई की तारीख तय नहीं हुई है। यह मामला न केवल कर्नाटक बल्कि देशभर में बाइक टैक्सी सेवाओं के भविष्य और उनके नियामक ढाँचे को प्रभावित कर सकता है। सर्वोच्च न्यायालय का फैसला यह तय करेगा कि क्या राज्य सरकारें बिना स्पष्ट कानूनी ढाँचे के ऐसी सेवाओं पर रोक लगा सकती हैं।