एसआईआर विवाद: चलवाड़ी नारायण स्वामी बोले — कांग्रेस के पास वोट चोरी का एक भी सबूत नहीं
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक विधान परिषद में विपक्ष के नेता चलवाड़ी नारायण स्वामी ने 27 अक्टूबर 2026 को बेंगलुरु में विशेष मतदाता सूची पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर कांग्रेस और राहुल गांधी पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि 'वोट चोरी' के आरोप बेबुनियाद हैं और अब तक कोई ठोस सबूत सामने नहीं आया है। उनके अनुसार, चुनाव आयोग की यह प्रक्रिया पूरी तरह कानूनसम्मत है और जिन वैध मतदाताओं का नाम सूची से छूट गया है, वे अभी भी फॉर्म-6 भरकर नाम जुड़वा सकते हैं।
मुख्य आरोप और पलटवार
नारायण स्वामी ने कहा, 'उन्हें विरोध प्रदर्शन के लिए एक मुद्दा चाहिए था। केंद्र सरकार में कोई बड़ा विवाद नहीं है, भ्रष्टाचार का कोई मुद्दा नहीं मिल रहा है। इसलिए उन्होंने एसआईआर को पकड़कर पूरे देश में मुद्दा बना दिया।' उन्होंने सवाल उठाया कि क्या राहुल गांधी या किसी अन्य व्यक्ति का वोट वास्तव में चोरी हुआ है? उनके शब्दों में, 'अभी तक उनके पास इसका कोई सबूत नहीं है।'
उन्होंने यह भी कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने भी इस विषय पर कई बार संकेत दे चुका है, फिर भी कांग्रेस यह मुद्दा उठाए हुए है और मुख्य न्यायाधीश को लेकर भी बयानबाजी हो रही है।
एसआईआर प्रक्रिया पर BJP का रुख
नारायण स्वामी ने स्पष्ट किया कि अधिकांश राज्यों में एसआईआर पूरा हो चुका है और केवल तीन-चार राज्य बाकी हैं। उन्होंने कहा कि इस पूरी प्रक्रिया में अब तक 'कोई गंभीर दोष सामने नहीं आया है।' उनके अनुसार, केवल मन में आशंका आ जाने से गड़बड़ी साबित नहीं होती।
उन्होंने आश्वस्त किया कि चुनाव आयोग और संबंधित अधिकारी यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि कोई भी वैध मतदाता मतदाता सूची से बाहर न रहे। 'जिनका नाम छूट गया है, वे अभी फॉर्म-6 भरकर नाम जुड़वा सकते हैं — अवसर अभी भी उपलब्ध है,' उन्होंने कहा।
खड़गे के पटना बयान और एफआईआर पर प्रतिक्रिया
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के पटना में दिए गए बयान पर दर्ज एफआईआर के बारे में पूछे जाने पर नारायण स्वामी ने कहा कि यदि एफआईआर दर्ज हुई है तो निष्पक्ष जाँच होनी चाहिए। साथ ही उन्होंने कांग्रेस की भाषा पर आपत्ति जताते हुए कहा, 'जिस तरह की भाषा का प्रयोग किया जा रहा है, वह उचित नहीं है।'
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश के 140 करोड़ लोगों के प्रतिनिधि हैं, जबकि कांग्रेस अध्यक्ष केवल अपनी पार्टी के। उनके अनुसार, 'प्रधानमंत्री के पद का सम्मान करना सभी की जिम्मेदारी है। आलोचना कीजिए, लेकिन मर्यादा के साथ।'
आपातकाल का संदर्भ
नारायण स्वामी ने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा कि कांग्रेस के शासनकाल में इंदिरा गांधी के समय आपातकाल लगाया गया था जब संविधान की भावना को आघात पहुँचा था और पूरे देश को 'जेल जैसा' बना दिया गया था। उन्होंने कहा कि वर्तमान में ऐसी स्थिति नहीं है और मोदी एक मजबूत वैश्विक नेता के रूप में स्थापित हैं, जो कांग्रेस स्वीकार नहीं कर पा रही।
आगे क्या
यह विवाद ऐसे समय में गरमाया है जब एसआईआर प्रक्रिया देश के कई राज्यों में अंतिम चरण में है। गौरतलब है कि सर्वोच्च न्यायालय इस मामले पर पहले भी अपनी राय दे चुका है। आने वाले हफ्तों में मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन और विपक्ष की कानूनी रणनीति — दोनों पर नज़र बनी रहेगी।