2 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

कर्नाटक फॉर्म-7 विवाद: चलवाड़ी नारायण स्वामी बोले, 'यह कांग्रेस का हाई ड्रामा, चुनाव आयोग बहाना'

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
कर्नाटक फॉर्म-7 विवाद: चलवाड़ी नारायण स्वामी बोले, 'यह कांग्रेस का हाई ड्रामा, चुनाव आयोग बहाना'

सारांश

कर्नाटक में फॉर्म-7 को लेकर सियासत गरमाई — CM शिवकुमार के BJP-RSS पर दलित-मुस्लिम मतदाता हटाने के आरोपों पर विपक्ष नेता नारायण स्वामी ने पलटवार किया और इसे 'कांग्रेस का हाई ड्रामा' बताया। KPSC घोटाले में मंत्रियों की भूमिका पर भी जांच की माँग उठी।

मुख्य बातें

चलवाड़ी नारायण स्वामी ने 1 अक्टूबर 2026 को CM डीके शिवकुमार के फॉर्म-7 दुरुपयोग के आरोपों को 'कांग्रेस का हाई ड्रामा' बताया।
शिवकुमार का आरोप था कि BJP और RSS के कार्यकर्ता फॉर्म-7 के ज़रिये मुस्लिम, दलित और आदिवासी मतदाताओं के नाम हटाने की कोशिश कर रहे हैं।
नारायण स्वामी ने स्पष्ट किया कि केवल फॉर्म-7 दाखिल होने से कोई नाम नहीं हटता — पूरी प्रक्रिया और जांच के बाद ही निर्णय होता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस चुनाव आयोग को बहाना बनाकर PM मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को निशाना बना रही है।
KPSC कथित घोटाले में ओएमआर शीट और अंकों में बदलाव के आरोपों पर नारायण स्वामी ने जांच तेज करने और दोषियों को जेल भेजने की माँग की।

कर्नाटक विधान परिषद में विपक्ष के नेता चलवाड़ी नारायण स्वामी ने 1 अक्टूबर 2026 को मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के उन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया, जिनमें भारतीय जनता पार्टी (BJP) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर फॉर्म-7 का दुरुपयोग कर मुस्लिम, दलित और आदिवासी मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाने का प्रयास करने का आरोप था। नारायण स्वामी ने इसे कांग्रेस का 'हाई ड्रामा' करार देते हुए कहा कि वोटर लिस्ट की समीक्षा एक सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया है और किसी एक आवेदन के आधार पर किसी मतदाता का नाम तुरंत नहीं हटाया जा सकता।

मुख्य आरोप और पलटवार

मुख्यमंत्री शिवकुमार ने BJP और RSS पर आरोप लगाया था कि उनके कार्यकर्ता फॉर्म-7 के ज़रिये बड़े पैमाने पर अल्पसंख्यक, दलित और आदिवासी मतदाताओं के नाम हटाने के लिए आवेदन दे रहे हैं। इस पर नारायण स्वामी ने कहा कि फॉर्म-6 हो या फॉर्म-7, चुनावी प्रक्रिया में सभी दलों के लिए नियम एक समान हैं — कांग्रेस और BJP के लिए अलग-अलग फॉर्म नहीं होते।

उन्होंने कहा, 'यह कोई षड्यंत्र नहीं है। कांग्रेस चुनाव आयोग को निशाना बनाने के बहाने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को राजनीतिक रूप से घेरने की कोशिश कर रही है।'

फॉर्म-7 प्रक्रिया क्या है

फॉर्म-7 वह दस्तावेज़ है जिसके ज़रिये कोई भी नागरिक किसी अन्य व्यक्ति के नाम को मतदाता सूची में शामिल करने पर आपत्ति दर्ज कर सकता है। नारायण स्वामी ने स्पष्ट किया कि केवल फॉर्म-7 दाखिल होने से किसी का नाम नहीं हटता — पहले आवेदन की जांच होती है, संबंधित व्यक्ति से दस्तावेज़ और आवश्यक जानकारी माँगी जाती है, और प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही कोई निर्णय लिया जाता है।

उन्होंने यह भी जोड़ा कि मतदाता सूची में बांग्लादेशी नागरिकों के नाम होने के जो आरोप लगते रहे हैं, उनकी जांच कर नाम हटाना भी इसी वैधानिक प्रक्रिया का हिस्सा है। 'अगर कोई व्यक्ति भारत का नागरिक नहीं है, तो उसे सूची से हटाना उचित कदम है,' उन्होंने कहा।

केपीएससी घोटाले पर विपक्ष के तेवर

फॉर्म-7 विवाद के अलावा, नारायण स्वामी ने कर्नाटक लोक सेवा आयोग (KPSC) से जुड़े कथित घोटाले पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जांच आगे बढ़ने के साथ ओएमआर शीट और अंकों में कथित बदलाव जैसे गंभीर आरोप सामने आ रहे हैं, और इसमें कुछ मंत्रियों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए। 'जो भी दोषी पाया जाए, उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए और ज़रूरत पड़ी तो जेल भी,' उन्होंने कहा।

राजनीतिक संदर्भ और व्यापक असर

यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब कर्नाटक में सत्तारूढ़ भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) और BJP के बीच चुनावी ज़मीन को लेकर तनातनी बढ़ रही है। गौरतलब है कि वोटर लिस्ट में बड़े पैमाने पर नाम जोड़ने और हटाने की शिकायतें देश के अन्य राज्यों में भी उठती रही हैं, और यह मुद्दा विपक्ष के लिए चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने का एक राजनीतिक औज़ार बन चुका है।

नारायण स्वामी ने साफ कहा कि अगर कांग्रेस के पास केंद्र सरकार के खिलाफ भ्रष्टाचार या किसी अन्य ठोस मुद्दे पर सवाल हैं, तो वे उठाए जाने चाहिए — लेकिन वोटर लिस्ट की सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक हंगामा खड़ा करना उचित नहीं है। आगे चुनाव आयोग का रुख और KPSC मामले में जांच की दिशा यह तय करेगी कि यह विवाद किस मोड़ पर जाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन कर्नाटक में इस बार यह विवाद इसलिए अधिक महत्वपूर्ण है क्योंकि दोनों पक्ष — सत्ता और विपक्ष — एक-दूसरे पर प्रक्रिया का राजनीतिकरण करने का आरोप लगा रहे हैं। असली सवाल यह है कि क्या चुनाव आयोग बड़े पैमाने पर दाखिल फॉर्म-7 आवेदनों की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच सुनिश्चित कर पाएगा, या यह प्रक्रिया ही राजनीतिक दबाव का शिकार बनेगी। KPSC घोटाले के आरोप इस विवाद में एक और परत जोड़ते हैं — कर्नाटक की सिद्धारमैया-शिवकुमार सरकार पहले से ही कई मोर्चों पर घिरी है, और विपक्ष इस राजनीतिक माहौल का पूरा लाभ उठाना चाहता है।
RashtraPress
2 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कर्नाटक में फॉर्म-7 विवाद क्या है?
मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने आरोप लगाया है कि BJP और RSS के कार्यकर्ता फॉर्म-7 के ज़रिये मुस्लिम, दलित और आदिवासी मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाने के लिए बड़े पैमाने पर आवेदन दे रहे हैं। BJP ने इन आरोपों को राजनीतिक ड्रामा बताते हुए खारिज किया है।
फॉर्म-7 क्या है और इससे नाम कैसे हटता है?
फॉर्म-7 वह चुनावी दस्तावेज़ है जिसके ज़रिये कोई नागरिक किसी अन्य व्यक्ति के मतदाता सूची में नाम पर आपत्ति दर्ज कर सकता है। चलवाड़ी नारायण स्वामी के अनुसार, केवल फॉर्म-7 दाखिल होने से कोई नाम नहीं हटता — पहले जांच होती है, दस्तावेज़ माँगे जाते हैं और तभी अंतिम निर्णय लिया जाता है।
चलवाड़ी नारायण स्वामी ने कांग्रेस पर क्या आरोप लगाया?
नारायण स्वामी ने कहा कि कांग्रेस चुनाव आयोग को निशाना बनाने के बहाने असल में PM नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और BJP को राजनीतिक रूप से घेरना चाहती है। उन्होंने इसे 'हाई ड्रामा' बताया और कहा कि वोटर लिस्ट की समीक्षा एक सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया है।
KPSC घोटाले में विपक्ष क्या माँग कर रहा है?
नारायण स्वामी ने कर्नाटक लोक सेवा आयोग (KPSC) के कथित घोटाले में ओएमआर शीट और अंकों में बदलाव जैसे गंभीर आरोपों की निष्पक्ष जांच की माँग की है। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ मंत्रियों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए और दोषियों को जेल भेजा जाना चाहिए।
क्या बांग्लादेशी नागरिकों के नाम वोटर लिस्ट में होने का मामला भी उठा?
हाँ, नारायण स्वामी ने इस संदर्भ में कहा कि अगर कोई व्यक्ति भारत का नागरिक नहीं है, तो जांच के बाद उसका नाम मतदाता सूची से हटाना प्रक्रिया का हिस्सा है। उन्होंने आरोप लगाया कि इसी वजह से कांग्रेस को आपत्ति हो रही है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 5 घंटे पहले
  2. 6 घंटे पहले
  3. 14 घंटे पहले
  4. 5 दिन पहले
  5. 1 सप्ताह पहले
  6. 1 महीना पहले
  7. 1 महीना पहले
  8. 2 महीने पहले