कर्नाटक फॉर्म-7 विवाद: चलवाड़ी नारायण स्वामी बोले, 'यह कांग्रेस का हाई ड्रामा, चुनाव आयोग बहाना'
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक विधान परिषद में विपक्ष के नेता चलवाड़ी नारायण स्वामी ने 1 अक्टूबर 2026 को मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के उन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया, जिनमें भारतीय जनता पार्टी (BJP) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर फॉर्म-7 का दुरुपयोग कर मुस्लिम, दलित और आदिवासी मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाने का प्रयास करने का आरोप था। नारायण स्वामी ने इसे कांग्रेस का 'हाई ड्रामा' करार देते हुए कहा कि वोटर लिस्ट की समीक्षा एक सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया है और किसी एक आवेदन के आधार पर किसी मतदाता का नाम तुरंत नहीं हटाया जा सकता।
मुख्य आरोप और पलटवार
मुख्यमंत्री शिवकुमार ने BJP और RSS पर आरोप लगाया था कि उनके कार्यकर्ता फॉर्म-7 के ज़रिये बड़े पैमाने पर अल्पसंख्यक, दलित और आदिवासी मतदाताओं के नाम हटाने के लिए आवेदन दे रहे हैं। इस पर नारायण स्वामी ने कहा कि फॉर्म-6 हो या फॉर्म-7, चुनावी प्रक्रिया में सभी दलों के लिए नियम एक समान हैं — कांग्रेस और BJP के लिए अलग-अलग फॉर्म नहीं होते।
उन्होंने कहा, 'यह कोई षड्यंत्र नहीं है। कांग्रेस चुनाव आयोग को निशाना बनाने के बहाने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को राजनीतिक रूप से घेरने की कोशिश कर रही है।'
फॉर्म-7 प्रक्रिया क्या है
फॉर्म-7 वह दस्तावेज़ है जिसके ज़रिये कोई भी नागरिक किसी अन्य व्यक्ति के नाम को मतदाता सूची में शामिल करने पर आपत्ति दर्ज कर सकता है। नारायण स्वामी ने स्पष्ट किया कि केवल फॉर्म-7 दाखिल होने से किसी का नाम नहीं हटता — पहले आवेदन की जांच होती है, संबंधित व्यक्ति से दस्तावेज़ और आवश्यक जानकारी माँगी जाती है, और प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही कोई निर्णय लिया जाता है।
उन्होंने यह भी जोड़ा कि मतदाता सूची में बांग्लादेशी नागरिकों के नाम होने के जो आरोप लगते रहे हैं, उनकी जांच कर नाम हटाना भी इसी वैधानिक प्रक्रिया का हिस्सा है। 'अगर कोई व्यक्ति भारत का नागरिक नहीं है, तो उसे सूची से हटाना उचित कदम है,' उन्होंने कहा।
केपीएससी घोटाले पर विपक्ष के तेवर
फॉर्म-7 विवाद के अलावा, नारायण स्वामी ने कर्नाटक लोक सेवा आयोग (KPSC) से जुड़े कथित घोटाले पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जांच आगे बढ़ने के साथ ओएमआर शीट और अंकों में कथित बदलाव जैसे गंभीर आरोप सामने आ रहे हैं, और इसमें कुछ मंत्रियों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए। 'जो भी दोषी पाया जाए, उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए और ज़रूरत पड़ी तो जेल भी,' उन्होंने कहा।
राजनीतिक संदर्भ और व्यापक असर
यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब कर्नाटक में सत्तारूढ़ भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) और BJP के बीच चुनावी ज़मीन को लेकर तनातनी बढ़ रही है। गौरतलब है कि वोटर लिस्ट में बड़े पैमाने पर नाम जोड़ने और हटाने की शिकायतें देश के अन्य राज्यों में भी उठती रही हैं, और यह मुद्दा विपक्ष के लिए चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने का एक राजनीतिक औज़ार बन चुका है।
नारायण स्वामी ने साफ कहा कि अगर कांग्रेस के पास केंद्र सरकार के खिलाफ भ्रष्टाचार या किसी अन्य ठोस मुद्दे पर सवाल हैं, तो वे उठाए जाने चाहिए — लेकिन वोटर लिस्ट की सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक हंगामा खड़ा करना उचित नहीं है। आगे चुनाव आयोग का रुख और KPSC मामले में जांच की दिशा यह तय करेगी कि यह विवाद किस मोड़ पर जाता है।