दीपावली से पहले रामलीला मैदान रैली पर सीटीआई का विरोध, ₹10-12 हज़ार करोड़ के कारोबार पर संकट
सारांश
मुख्य बातें
चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (सीटीआई) ने 1 नवंबर 2026 को रामलीला मैदान, नई दिल्ली में प्रस्तावित इंडिया ब्लॉक की महारैली के खिलाफ आवाज़ उठाई है। सीटीआई ने इंडिया ब्लॉक के प्रमुख घटक दलों के नेताओं को पत्र लिखकर रैली को दीपावली के बाद 10 या 11 नवंबर तक टालने की माँग की है, क्योंकि धनतेरस और दीपावली से ठीक पहले दिल्ली के 20 ऐतिहासिक बाज़ारों में रोज़ाना ₹10,000 से ₹12,000 करोड़ का कारोबार होता है जो बाधित होने की आशंका है।
सीटीआई की माँग और पत्र
सीटीआई चेयरमैन बृजेश गोयल ने स्पष्ट किया कि व्यापारी वर्ग रैली का विरोध नहीं कर रहा, बल्कि उसका समय बदलने की अपील कर रहा है। उन्होंने कहा कि 1 नवंबर धनतेरस और दीपावली की तैयारियों का 'पीक दिन' है। सीटीआई ने कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी और राहुल गांधी को अलग-अलग पत्र लिखकर रैली स्थगित करने का अनुरोध किया है। इसके अलावा, इंडिया ब्लॉक के नेता अखिलेश यादव, ममता बनर्जी, तेजस्वी यादव और उद्धव ठाकरे सहित सभी घटक दलों को भी पत्र भेजे गए हैं।
प्रभावित बाज़ार और कारोबार
सीटीआई के अनुसार, रामलीला मैदान के 5 किलोमीटर दायरे में 300 साल पुराने 20 बाज़ार स्थित हैं जो पूरे भारत को माल की आपूर्ति करते हैं। इनमें चांदनी चौक, सदर बाज़ार, कनॉट प्लेस, पालिका बाज़ार, जनपथ, भागीरथ पैलेस, खारी बावली, कश्मीरी गेट, नया बाज़ार, लाजपत राय मार्केट, चावड़ी बाज़ार, किनारी बाज़ार, दरीबा कलाँ, बल्लीमारान, फतेहपुरी, तिलक बाज़ार, करोल बाग, जामा मस्जिद, नबी करीम, गफ्फार मार्केट, अजमेरी गेट-पहाड़गंज और दरियागंज शामिल हैं।
इन बाज़ारों में प्रतिदिन नरेला, बवाना, ओखला, मायापुरी, मुंडका, उद्योग नगर, मंगोलपुरी सहित 56 औद्योगिक क्षेत्रों से 5,000 ट्रक-टेम्पो माल लाते हैं। यहाँ से 3,000 ट्रक रोज़ाना गुड़गाँव, नोएडा, गाज़ियाबाद, फरीदाबाद, सोनीपत, पानीपत सहित एनसीआर के 25 शहरों और देश के सभी राज्यों को माल भेजते हैं।
असर 31 अक्टूबर से ही शुरू
व्यापारियों का कहना है कि रैली का व्यवधान केवल 1 नवंबर तक सीमित नहीं रहेगा। 31 अक्टूबर की दोपहर से ही बसें और गाड़ियाँ सिंघु, टिकरी, गाज़ीपुर और बदरपुर बॉर्डर पर आने लगेंगी। शाम से बहादुर शाह ज़फर मार्ग और जेएलएन मार्ग पर बैरिकेडिंग शुरू हो सकती है। ट्रांसपोर्टर 31 अक्टूबर से ही माल वाहन भेजने से इनकार कर रहे हैं।
विकल्प का सुझाव
सीटीआई ने सुझाव दिया है कि यदि रैली करनी ही हो तो उसे रामलीला मैदान की जगह बुराड़ी मैदान में आयोजित किया जाए, जहाँ 15,000 गाड़ियों की पार्किंग की सुविधा उपलब्ध है। गौरतलब है कि रामलीला मैदान का केंद्रीय दिल्ली में स्थित होना ही सबसे बड़ी समस्या है, क्योंकि यह देश के सबसे घने व्यावसायिक क्षेत्र के बीचोबीच है।
आगे क्या
यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि इंडिया ब्लॉक ने सीटीआई के पत्र पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया दी है या नहीं। धनतेरस और दीपावली से पहले के इन दिनों में कारोबार का नुकसान न केवल दिल्ली, बल्कि एनसीआर और राष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखला को भी प्रभावित कर सकता है। व्यापारी वर्ग रैली आयोजकों से जल्द जवाब का इंतज़ार कर रहा है।