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दिल्ली विरोध-प्रदर्शनों से कनॉट प्लेस समेत प्रमुख बाजारों को रोजाना ₹100 करोड़ का नुकसान: व्यापारी

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दिल्ली विरोध-प्रदर्शनों से कनॉट प्लेस समेत प्रमुख बाजारों को रोजाना ₹100 करोड़ का नुकसान: व्यापारी

सारांश

त्योहारी सीजन में दिल्ली के व्यापारी दोहरी मार झेल रहे हैं — एक तरफ भारी निवेश में डूबा स्टॉक, दूसरी तरफ खाली बाजार। कनॉट प्लेस में रोजाना ₹100 करोड़ के नुकसान का दावा और 70% तक गिरी फुटफॉल बता रही है कि विरोध-प्रदर्शनों की आर्थिक कीमत सबसे पहले आम दुकानदार चुका रहा है।

मुख्य बातें

नई दिल्ली ट्रेडर्स एसोसिएशन के अनुसार, कनॉट प्लेस और जुड़े इलाकों में रोजाना ₹100 करोड़ तक का व्यापारिक नुकसान हो रहा है।
शंकर मार्केट के दुकानदारों ने फुटफॉल में 70 प्रतिशत तक की गिरावट का दावा किया।
लाजपत नगर मार्केट एसोसिएशन के अध्यक्ष कुलदीप अरोरा के अनुसार प्रदर्शन वाले दिनों में कारोबार पर 50 प्रतिशत असर पड़ता है।
बंगाली मार्केट में जुलाई 2026 से व्यापार प्रभावित है; बाजार में 40 प्रमुख दुकानें हैं।
व्यापारियों ने माँग की कि प्रदर्शन तय स्थानों पर हों, ताकि मुख्य व्यापारिक क्षेत्र प्रभावित न हों।
बिजली बिल, वेतन और परिचालन लागत जारी रहने से व्यापारियों पर आर्थिक दबाव और बढ़ रहा है।

दिल्ली में जारी विरोध-प्रदर्शनों और सड़क बंदी का सीधा असर राजधानी के प्रमुख व्यापारिक केंद्रों पर पड़ रहा है। नई दिल्ली ट्रेडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अतुल भार्गव के अनुसार, अकेले कनॉट प्लेस और उससे जुड़े इलाकों में व्यापारियों को प्रतिदिन लगभग ₹100 करोड़ तक का नुकसान हो रहा है। त्योहारी सीजन के ठीक बीच बैरिकेडिंग, यातायात प्रतिबंध और भारी सुरक्षा व्यवस्था ने ग्राहकों की बाजारों तक पहुँच को मुश्किल बना दिया है।

प्रभावित बाजार और नुकसान का दायरा

भार्गव ने बताया कि जनपथ, पालिका बाजार, मोहन सिंह प्लेस, म्युनिसिपल मार्केट और शंकर मार्केट सहित पूरे केंद्रीय व्यापारिक क्षेत्र में कारोबार बुरी तरह प्रभावित हुआ है। उन्होंने कहा, 'त्योहारी सीजन को ध्यान में रखते हुए व्यापारियों ने पहले से ही बड़े पैमाने पर स्टॉक खरीदा और निवेश किया था, लेकिन लगातार बाधाओं के कारण बिक्री उम्मीद के मुताबिक नहीं हो पा रही है। यदि हालात जल्द सामान्य नहीं हुए तो नुकसान और बढ़ सकता है।'

खान मार्केट ट्रेडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष संजीव मेहता ने कहा कि जहाँ सामान्य दिनों में बाजारों में अच्छी भीड़ होती है, वहीं अब मुश्किल से कुछ ग्राहक ही दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने रेखांकित किया, 'अक्टूबर, नवंबर और दिसंबर का समय व्यापारियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि इन्हीं महीनों की बिक्री से सालभर का कारोबार प्रभावित होता है।'

जुलाई से जारी है व्यापार की मार

बंगाली मार्केट ट्रेडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष मुकेश गुप्ता ने बताया कि उनके बाजार में व्यापार पर बुरा असर जुलाई से ही पड़ना शुरू हो गया था। उनके अनुसार बाजार में लगभग 40 प्रमुख दुकानें हैं जहाँ मंत्री और उच्च पदस्थ व्यक्ति आते-जाते रहते हैं, लेकिन विरोध प्रदर्शनों ने स्थानीय व्यापार को लगभग ठप कर दिया है। यह ऐसे समय में आया है जब दिल्ली के व्यापारी अभी कोविड-काल के बाद की आर्थिक भरपाई की प्रक्रिया में हैं।

लाजपत नगर मार्केट एसोसिएशन के अध्यक्ष कुलदीप अरोरा ने कहा कि प्रदर्शनों का बाजार पर 50 प्रतिशत तक असर पड़ता है। उनके अनुसार, 'जिन दिनों विरोध प्रदर्शन होते हैं, उन दिनों बाजार पूरी तरह ठप हो जाता है। यातायात जाम और अराजकता के कारण लोग घरों से बाहर निकलने से बचते हैं, और दुकानदारों को ही नुकसान उठाना पड़ता है।'

फुटफॉल में 70 प्रतिशत तक की गिरावट

शंकर मार्केट के कई दुकानदारों ने बताया कि प्रदर्शन अक्सर उन्हीं समयों में शुरू होते हैं जब बाजारों में ग्राहकों की सबसे अधिक आवाजाही रहती है। कुछ व्यापारियों का दावा है कि उनके यहाँ फुटफॉल में 70 प्रतिशत तक की गिरावट आई है। कनॉट प्लेस के एक दुकानदार ने कहा कि भारी पुलिस बल और सुरक्षा व्यवस्था देखकर कई लोग बाजार आने से बचते हैं और जब मेट्रो स्टेशनों पर प्रतिबंध लगते हैं या यातायात प्रभावित होता है, तो ग्राहकों का बाजार तक पहुँचना और मुश्किल हो जाता है।

गौरतलब है कि त्योहारी खरीदारी, जो आमतौर पर इस समय अपने चरम पर होती है, इस बार लक्ष्य से कहीं पीछे चल रही है। व्यापारियों ने यह भी कहा कि बिजली बिल, कर्मचारियों के वेतन और अन्य परिचालन खर्च लगातार जारी रहते हैं, ऐसे में बिक्री कम होने से आर्थिक दबाव और बढ़ जाता है।

व्यापारियों की माँग और आगे की राह

व्यापारियों ने माँग की है कि यदि प्रदर्शन करना है तो उसके लिए तय स्थानों का इस्तेमाल किया जाना चाहिए, क्योंकि मुख्य सड़कों और बाजार क्षेत्रों में आयोजित प्रदर्शनों का सीधा असर कारोबार पर पड़ता है। एक व्यापारी ने कथित तौर पर यह भी कहा कि इन प्रदर्शनों में कुछ असामाजिक तत्वों के शामिल होने की आशंका रहती है, जिससे दुकानों की सुरक्षा को लेकर सतर्कता बरतनी पड़ती है। यदि प्रशासन शीघ्र यातायात और व्यवस्था को सामान्य नहीं करता, तो इस त्योहारी सीजन में व्यापारियों का कुल नुकसान कई सौ करोड़ रुपये तक पहुँच सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक गहरे टकराव की है — लोकतांत्रिक विरोध के अधिकार और आम व्यापारी की आजीविका के बीच। दिल्ली प्रशासन और पुलिस की जवाबदेही यहाँ सवालों के घेरे में है: क्या रैम्लीला मैदान या जंतर-मंतर जैसे निर्धारित स्थलों का उपयोग सुनिश्चित करने में विफलता हुई? गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है — दिल्ली के व्यापारी पिछले कई वर्षों से हर बड़े आंदोलन के दौरान इसी तरह का नुकसान उठाते रहे हैं, और हर बार मुआवजे की माँग अनसुनी रह जाती है। त्योहारी सीजन में ₹100 करोड़ प्रतिदिन का आँकड़ा बड़ा है, लेकिन इसकी स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है — मुख्यधारा की कवरेज इस पहलू को अक्सर नजरअंदाज करती है।
RashtraPress
16 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली के बाजारों में विरोध प्रदर्शनों से कितना नुकसान हो रहा है?
नई दिल्ली ट्रेडर्स एसोसिएशन के दावे के अनुसार, कनॉट प्लेस और उससे जुड़े केंद्रीय व्यापारिक क्षेत्रों में रोजाना लगभग ₹100 करोड़ तक का नुकसान हो रहा है। यह आँकड़ा व्यापारी संगठनों का अनुमान है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
कौन-कौन से दिल्ली के बाजार सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं?
कनॉट प्लेस, जनपथ, पालिका बाजार, शंकर मार्केट, खान मार्केट, बंगाली मार्केट और लाजपत नगर मार्केट सबसे ज्यादा प्रभावित बाजारों में शामिल हैं। इन सभी इलाकों में बैरिकेडिंग और यातायात प्रतिबंध के कारण ग्राहकों की संख्या में भारी गिरावट आई है।
व्यापारियों की फुटफॉल में कितनी गिरावट आई है?
शंकर मार्केट के कुछ दुकानदारों ने दावा किया है कि उनके यहाँ फुटफॉल में 70 प्रतिशत तक की गिरावट आई है। लाजपत नगर मार्केट एसोसिएशन के अध्यक्ष कुलदीप अरोरा के अनुसार प्रदर्शन वाले दिनों में बाजार पर 50 प्रतिशत असर पड़ता है।
त्योहारी सीजन में इस नुकसान का व्यापारियों पर क्या असर पड़ रहा है?
व्यापारियों ने त्योहारी सीजन से पहले बड़े पैमाने पर स्टॉक खरीदा और निवेश किया था, लेकिन ग्राहक नहीं पहुँच रहे। बिजली बिल, कर्मचारियों का वेतन और परिचालन खर्च जारी रहने के कारण बिक्री में गिरावट से आर्थिक दबाव बढ़ रहा है।
व्यापारियों ने प्रदर्शनों के बारे में क्या माँग रखी है?
व्यापारियों ने माँग की है कि प्रदर्शन तय स्थानों पर आयोजित किए जाएँ, न कि मुख्य बाजार क्षेत्रों या प्रमुख सड़कों पर। उनका कहना है कि इससे लोकतांत्रिक अधिकार और व्यापार दोनों की रक्षा हो सकेगी।
राष्ट्र प्रेस
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