30 जुलाई 2026
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पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर नहीं, 'पाकिस्तानी कश्मीर' लिखने पर न्यूयॉर्क टाइम्स को भारतीय दूतावास की कड़ी फटकार

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पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर नहीं, 'पाकिस्तानी कश्मीर' लिखने पर न्यूयॉर्क टाइम्स को भारतीय दूतावास की कड़ी फटकार

सारांश

न्यूयॉर्क टाइम्स ने पीओके को 'पाकिस्तानी कश्मीर' लिखा — भारतीय दूतावास ने एक्स पर तत्काल पलटवार किया। पृष्ठभूमि में पीओके में चुनावी हिंसा, 37 मौतें और हिजबुल मुजाहिदीन की घुसपैठ के गंभीर आरोप हैं।

मुख्य बातें

भारतीय दूतावास ने 30 जुलाई को एक्स पर न्यूयॉर्क टाइम्स की उस रिपोर्टिंग की निंदा की जिसमें पीओके को 'पाकिस्तानी कश्मीर' लिखा गया।
दूतावास ने स्पष्ट किया कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत के अभिन्न और अटूट हिस्से हैं।
पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में चुनावी हिंसा में पिछले तीन दिनों में करीब 37 लोगों की मौत और 200 लोग घायल ।
इंटेलिजेंस ब्यूरो के एक अधिकारी के अनुसार, हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकवादियों ने प्रदर्शनों में घुसकर हिंसा भड़काई।
जॉइंट एक्शन अवामी कमेटी (जेएएसी) ने बार-बार शांति की अपील की, बावजूद इसके हिंसा जारी रही।

अमेरिका स्थित भारतीय दूतावास ने 30 जुलाई को अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स की उस रिपोर्टिंग की तीखी आलोचना की, जिसमें पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) को 'पाकिस्तानी कश्मीर' लिखा गया था। दूतावास ने स्पष्ट किया कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत के अभिन्न अंग हैं और पाकिस्तान का वहाँ कोई वैध दावा नहीं है। यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब पीओके में चुनावी हिंसा और प्रदर्शनों के बीच हालात गंभीर बने हुए हैं।

दूतावास का कड़ा जवाब

भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर न्यूयॉर्क टाइम्स का वह आर्टिकल साझा करते हुए लिखा, 'न्यूयॉर्क टाइम्स की गुमराह करने वाली और गलत हेडलाइन। कोई पाकिस्तानी कश्मीर नहीं है, सिर्फ पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर है। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश भारत का एक अभिन्न और अटूट हिस्सा रहे हैं, अब भी हैं और हमेशा रहेंगे। पाकिस्तान ने इन इलाकों के कुछ हिस्सों पर गैर-कानूनी तरीके से कब्जा कर लिया है और अब कब्जे वाले लोगों के खिलाफ हिंसा का इस्तेमाल कर रहा है।'

उल्लेखनीय है कि न्यूयॉर्क टाइम्स के उस आर्टिकल की हेडलाइन थी — 'स्थानीय चुनाव के लिए वोटिंग शुरू होते ही पाकिस्तानी कश्मीर में झड़पें।' भारत की दृष्टि में यह शब्दावली न केवल भ्रामक है, बल्कि भारत की संप्रभुता के विरुद्ध भी है।

पीओके में चुनावी हिंसा की पृष्ठभूमि

पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में हाल के स्थानीय चुनाव चुनावी धांधली के आरोपों, प्रदर्शनकारियों पर बलप्रयोग और जबरन गायब किए जाने की खबरों के साये में हुए। विरोध आंदोलन का नेतृत्व कर रही जॉइंट एक्शन अवामी कमेटी (जेएएसी) ने बार-बार लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की, और रिपोर्टों के अनुसार अधिकांश प्रदर्शनकारियों ने इन निर्देशों का पालन भी किया।

इसके बावजूद पीओके के अलग-अलग हिस्सों से हिंसा की कई घटनाएँ सामने आईं। पिछले तीन दिनों में करीब 37 लोगों की मौत और लगभग 200 लोगों के घायल होने की खबरें हैं।

खुफिया एजेंसी का दावा: आतंकवादियों ने भड़काई हिंसा

इंटेलिजेंस ब्यूरो के एक अधिकारी के अनुसार, हिंसा की शुरुआत स्थानीय प्रदर्शनकारियों की ओर से नहीं हुई। अधिकारी ने बताया, 'इलाके से मिले इनपुट से पता चलता है कि हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकवादियों को विरोध प्रदर्शनों में घुसने का निर्देश दिया गया था। उनका मकसद प्रदर्शनकारियों के साथ घुलना-मिलना, हिंसा भड़काना और फिर मौके से भाग जाना था, जिससे यह लगे कि प्रदर्शनकारियों ने ही अशांति फैलाई है।'

अधिकारी के अनुसार, कथित तौर पर आतंकवादियों और किराए के गुंडों द्वारा की गई इस हिंसा ने सुरक्षा एजेंसियों को प्रदर्शनकारियों के विरुद्ध बल प्रयोग का बहाना दे दिया। अधिकांश प्रदर्शनकारियों को यह भी स्पष्ट नहीं था कि उन पर बल क्यों प्रयोग किया जा रहा है।

भारत का दीर्घकालिक रुख और आगे की राह

भारत लगातार यह स्थिति दोहराता आया है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उसके संवैधानिक रूप से मान्यता प्राप्त केंद्र शासित प्रदेश हैं और पाकिस्तान का वहाँ का कब्जा अवैध है। दूतावास की यह त्वरित प्रतिक्रिया भारत की उस नीति का हिस्सा है जिसके तहत अंतरराष्ट्रीय मीडिया में कश्मीर से जुड़ी किसी भी भ्रामक शब्दावली को तत्काल चुनौती दी जाती है। पीओके में बिगड़ती स्थिति को देखते हुए आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय दबाव और कूटनीतिक सक्रियता और बढ़ने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक ऐसी भ्रामक भाषा है जो दशकों पुराने भारतीय संप्रभुता के रुख को कमज़ोर करती है। भारतीय दूतावास की त्वरित और सार्वजनिक प्रतिक्रिया यह संकेत देती है कि नई दिल्ली अब अंतरराष्ट्रीय मीडिया में इस तरह की भाषाई चूकों को नज़रअंदाज़ करने के मूड में नहीं है। साथ ही, पीओके में हिजबुल मुजाहिदीन की कथित घुसपैठ का खुलासा — यदि सत्यापित होता है — यह दर्शाता है कि पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियाँ नागरिक असंतोष को दबाने के लिए सशस्त्र समूहों का उपयोग कर रही हैं। मुख्यधारा की कवरेज इस आंतरिक दमन के आयाम को अक्सर नज़रअंदाज़ कर देती है।
RashtraPress
30 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारतीय दूतावास ने न्यूयॉर्क टाइम्स की आलोचना क्यों की?
न्यूयॉर्क टाइम्स ने अपनी एक रिपोर्ट में पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर को 'पाकिस्तानी कश्मीर' लिखा, जिसे भारत ने भ्रामक और गलत बताया। भारतीय दूतावास ने एक्स पर स्पष्ट किया कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत के संवैधानिक रूप से मान्यता प्राप्त हिस्से हैं और पाकिस्तान का कब्जा अवैध है।
पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में इस समय क्या हो रहा है?
पीओके में स्थानीय चुनावों के दौरान व्यापक हिंसा भड़की है। पिछले तीन दिनों में करीब 37 लोगों की मौत और 200 से अधिक लोग घायल हुए हैं। चुनावी धांधली के आरोप और जबरन गायब करने की घटनाएँ भी सामने आई हैं।
जॉइंट एक्शन अवामी कमेटी (जेएएसी) कौन है?
जेएएसी पीओके में विरोध आंदोलन का नेतृत्व करने वाली संस्था है। इसने बार-बार स्थानीय लोगों से शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की अपील की है, लेकिन इसके बावजूद हिंसा की घटनाएँ हुईं।
हिजबुल मुजाहिदीन का पीओके हिंसा से क्या संबंध बताया जा रहा है?
इंटेलिजेंस ब्यूरो के एक अधिकारी के अनुसार, हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकवादियों को प्रदर्शनों में घुसकर हिंसा भड़काने और फिर भाग जाने का निर्देश दिया गया था, ताकि दोष प्रदर्शनकारियों पर मढ़ा जा सके। यह दावा अभी तक स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हुआ है।
भारत का पीओके पर आधिकारिक रुख क्या है?
भारत का स्थायी रुख यह है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उसके अभिन्न और अटूट केंद्र शासित प्रदेश हैं। पाकिस्तान का पीओके पर कब्जा भारत की दृष्टि में पूरी तरह अवैध है और किसी भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर इसे मान्यता नहीं दी जा सकती।
राष्ट्र प्रेस
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