पीओजेके भारत का अभिन्न अंग, सरकार वापस लेगी — भाजपा प्रवक्ताओं का विपक्ष पर हमला
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के जम्मू स्थित प्रवक्ताओं अभिजीत जसरोटिया और डॉ. ताहिर चौधरी ने 31 जुलाई 2026 को पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) में कथित अत्याचारों को लेकर पाकिस्तान पर तीखा हमला बोला और केंद्र सरकार के रुख को दोहराया कि पीओजेके भारत का अभिन्न हिस्सा है जिसे वापस लिया जाएगा। साथ ही, उन्होंने नेशनल कॉन्फ्रेंस और पीडीपी सहित विपक्षी दलों पर इस मुद्दे पर मौन रहने का आरोप लगाया।
सरकार का रुख और भाजपा का दावा
भाजपा प्रवक्ता डॉ. ताहिर चौधरी ने कहा, 'एनडीए सरकार हमेशा पीओजेके और वहाँ के लोगों के साथ खड़ी है। पिछले 12 वर्षों में प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री ने बार-बार स्पष्ट किया है कि पीओजेके हमारा है, वहाँ के लोग हमारे हैं और इसे सरकार वापस लेगी, क्योंकि यह हमारा हिस्सा है जिस पर पाकिस्तान ने अवैध रूप से कब्जा कर रखा है।' उन्होंने आरोप लगाया कि पीओजेके में पाकिस्तान लगातार मानवाधिकारों का उल्लंघन कर रहा है — वहाँ के निवासियों पर कथित अत्याचार, अभिव्यक्ति की आज़ादी पर पाबंदी और प्राकृतिक संसाधनों का दोहन जारी है।
विपक्ष पर सीधा निशाना
भाजपा प्रवक्ता अभिजीत जसरोटिया ने नेशनल कॉन्फ्रेंस के डॉ. फारूक अब्दुल्ला और पीडीपी नेत्री महबूबा मुफ्ती पर सवाल उठाते हुए कहा, 'क्या इनमें से किसी ने कभी पाकिस्तान की निंदा की? क्या उन्होंने पाकिस्तान का जिक्र भी किया? मैं पूछना चाहता हूँ कि पाकिस्तान के लिए यह प्यार क्यों है?' जसरोटिया ने नेशनल कॉन्फ्रेंस के अकबर लोन का नाम लेते हुए कहा कि विधानसभा में 'पाकिस्तान' के नारे लगाने वालों को पीओजेके के लोगों की परवाह नहीं है।
पप्पू यादव के विरोध प्रदर्शन पर प्रतिक्रिया
जसरोटिया ने पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव के नेतृत्व में हुए एक विरोध प्रदर्शन का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा, 'चाहे पप्पू यादव हों या कोई और, जहाँ तक मैं समझता हूँ, इनकी सोच हमेशा सनातन और हिंदुओं के खिलाफ रही है। हमारा घर, हमारा मंदिर — हम देखेंगे।' उन्होंने आरोप लगाया कि इन नेताओं के लिए 'भगवान राम काल्पनिक हैं' और 'राम सेतु जैसा कोई पुल कभी था ही नहीं' — और ऐसी भाषा के बाद उन्हें सनातन पर बोलने का अधिकार नहीं।
पीओजेके का भू-राजनीतिक संदर्भ
गौरतलब है कि पीओजेके का मुद्दा भारत-पाकिस्तान संबंधों में दशकों से विवाद का केंद्र रहा है। 1947 के विभाजन के बाद से भारत इस क्षेत्र को अपना अभिन्न हिस्सा मानता आया है, जबकि पाकिस्तान ने इस पर नियंत्रण बनाए रखा है। यह ऐसे समय में आया है जब पीओजेके में कथित विरोध-प्रदर्शनों और मानवाधिकार उल्लंघनों की खबरें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में हैं।
आगे क्या
भाजपा का यह आक्रामक रुख स्पष्ट संकेत देता है कि पार्टी पीओजेके को जम्मू-कश्मीर की राजनीति में एक प्रमुख मुद्दे के रूप में उठाती रहेगी। विपक्षी दलों — नेशनल कॉन्फ्रेंस और पीडीपी — की ओर से अभी तक इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।